BIHAR NEWS: अनंत सिंह की सदस्यता पर NDA की अग्निपरीक्षा, दो MLC को बचाया तो उठेंगे सवाल!

अनंत सिंह की सदस्यता: दो निर्दलीय MLC की सदस्यता पर सवाल, अनंत सिंह पर कार्रवाई से बढ़ेगा सियासी विवाद। पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों NDA के सामने एक ऐसा सियासी संकट खड़ा हो गया है, जिसमें किसी भी फैसले का राजनीतिक असर पड़ना तय माना जा रहा है। मामला भाजपा में शामिल हुए दो निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों (MLC) और मोकामा के विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता से जुड़ा है। सवाल यह है कि अगर दो MLC की सदस्यता बचती है और अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त होती है, तो NDA इस फैसले का राजनीतिक जवाब कैसे देगी? दरअसल, बिहार के दो निर्दलीय MLC ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस घटनाक्रम के बाद उनकी सदस्यता को लेकर कानूनी और संवैधानिक सवाल खड़े हो रहे हैं। दलबदल से जुड़े नियमों के तहत उनकी सदस्यता पर अयोग्यता की कार्रवाई की मांग उठ सकती है। हालांकि, इस मामले में अंतिम निर्णय विधान परिषद के सभापति को लेना है। 90 दिनों में फैसला देने की सुप्रीम कोर्ट की नसीहत सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल से जुड़े मामलों में निर्णय लेने के लिए उचित समयसीमा तय करने की जरूरत पर जोर दिया है। कई मामलों में 90 दिनों के भीतर फैसला करने की बात कही गई है। हालांकि, व्यावहारिक रूप से ऐसे मामलों के निपटारे में देरी भी देखने को मिलती रही है। यही वजह है कि दोनों MLC की सदस्यता को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। अनंत सिंह की सदस्यता का मामला भी बना चुनौती दूसरी तरफ, मोकामा के विधायक अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने को लेकर जदयू ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। ऐसे में NDA के सामने मुश्किल स्थिति बनती दिखाई दे रही है। यदि भाजपा में शामिल हुए दोनों MLC को राहत मिलती है और अनंत सिंह के खिलाफ सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई होती है, तो विपक्ष और राजनीतिक विरोधियों को सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। इस पूरे विवाद में सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। तीनों नेताओं का संबंध भूमिहार समाज से है, जिसे बिहार की राजनीति में प्रभावशाली वोट बैंक के तौर पर देखा जाता है। भूमिहार समाज की बैठक में भी उठेगा सवाल पटना में हर सप्ताह भूमिहार समाज की बैठक आयोजित करने वाले अंकित चन्द्रायण ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अनंत सिंह के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है? उन्होंने राजू सिंह और राहुल सिंह से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए NDA की कार्रवाई के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। अंकित चन्द्रायण के मुताबिक, यदि एक मामले में कार्रवाई होती है तो दूसरे मामलों में भी समान नियम लागू होने चाहिए। रविवार शाम होने वाली बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा होने की बात कही गई है। नीतीश कुमार की सहमति का बयान बढ़ा सकता है मुश्किल इस मामले को और संवेदनशील तब माना जा रहा है, जब जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा यह कह चुके हैं कि अनंत सिंह पर कार्रवाई नीतीश कुमार की सहमति से हुई है। ऐसे में अगर अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त नहीं होती है, तो राजनीतिक तौर पर यह सवाल उठ सकता है कि मुख्यमंत्री की सहमति के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई। फिलहाल NDA के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ भाजपा में शामिल हुए दोनों MLC की सदस्यता का सवाल है, तो दूसरी तरफ अनंत सिंह पर संभावित कार्रवाई का मामला। ऐसे में किसी एक पक्ष में लिया गया फैसला दूसरे पक्ष के लिए राजनीतिक सवाल खड़े कर सकता है। कुल मिलाकर, NDA के लिए स्थिति आगे कुआं और पीछे खाई जैसी बनती दिख रही है। अब सबकी नजर विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति के फैसले पर टिकी है।

रामलीला मैदान कूच करेंगे INDIA गठबंधन के नेता, राहुल-प्रियंका समेत कई दिग्गज कनॉट प्लेस पहुंचे

INDIA गठबंधन रैली दिल्ली: दिल्ली में INDIA गठबंधन के नेताओं की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी के कनॉट प्लेस में रविवार को विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता एकत्रित हुए। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और NCP-SCP सांसद सुप्रिया सुले समेत कई बड़े चेहरे शामिल रहे। जानकारी के मुताबिक, INDIA गठबंधन के नेता मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च करेंगे। इसके बाद रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में विपक्षी दलों के नेता अपनी बात रखेंगे और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरेंगे। कनॉट प्लेस में जुटे विपक्ष के कई बड़े नेता दिल्ली के कनॉट प्लेस में विपक्षी नेताओं के पहुंचने के साथ ही राजनीतिक हलचल बढ़ गई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा फारूक अब्दुल्ला, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को चर्चा में ला दिया है। इस जुटान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, NCP-SCP और RJD समेत INDIA गठबंधन से जुड़े विभिन्न दलों के नेताओं की भागीदारी देखने को मिल रही है। मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक होगा मार्च कार्यक्रम के तय कार्यक्रम के अनुसार, विपक्षी नेता मिंटो रोड से मार्च करते हुए रामलीला मैदान पहुंचेंगे। यहां आयोजित होने वाली रैली में INDIA गठबंधन के नेताओं के संबोधन की संभावना है। इस दौरान विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों को जनता के सामने रखने की तैयारी है। RJD नेता तेजस्वी यादव और TMC नेता ममता बनर्जी की मौजूदगी भी इस राजनीतिक कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बना रही है। अलग-अलग राज्यों और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं का एक मंच पर जुटना विपक्षी एकजुटता के लिहाज से चर्चा का विषय है। दिल्ली की राजनीति में बढ़ी हलचल रामलीला मैदान दिल्ली में पहले भी कई बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों और जनसभाओं का केंद्र रहा है। ऐसे में INDIA गठबंधन की इस रैली पर राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर रहेगी। फिलहाल सभी की निगाहें रामलीला मैदान में होने वाली रैली पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि विपक्षी दलों के नेता अपने संबोधन में किन मुद्दों को प्रमुखता देते हैं और केंद्र सरकार को लेकर क्या संदेश देते हैं।

रोहतक में नितिन नवीन का बड़ा बयान, बोले- 2029 में फिर लाल किले पर दिखेंगे PM मोदी

नितिन नवीन का बयान: रोहतक में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, नितिन नवीन ने 2029 को लेकर किया बड़ा दावा रोहतक (हरियाणा): हरियाणा के रोहतक में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के मत से बनी सरकार को कोई हिला नहीं सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उन्होंने दावा किया कि मोदी 2029 में भी देश की सत्ता में बने रहेंगे और एक बार फिर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते नजर आएंगे। रोहतक में आयोजित इस मार्च को भाजपा ने लोकतंत्र की रक्षा और विपक्ष की कथित अराजकता के खिलाफ अभियान का हिस्सा बताया। इस दौरान पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। मार्च के जरिए भाजपा ने जनता के बीच अपनी राजनीतिक और वैचारिक स्थिति रखने की कोशिश की। नितिन नवीन ने क्या कहा? मार्च को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि देश में जनता के मत से चुनी हुई सरकार है और उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं। साल 2029 में भी मोदी लाल किले की प्राचीर पर नजर आएंगे। उनके इस बयान को आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा के आत्मविश्वास और राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्ष के आरोपों के बीच भाजपा का शक्ति प्रदर्शन दरअसल, विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला दे रही है। भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान इसी राजनीतिक टकराव के बीच चलाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है और चुनी हुई सरकार का सम्मान किया जाना चाहिए। 2029 को लेकर अभी से सियासी बयानबाजी तेज नितिन नवीन का 2029 को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। रोहतक में दिए गए इस बयान के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी चर्चा शुरू हो गई है।

1984 सिख दंगा पीड़ितों के समर्थन में BJP का मार्च, CM रेखा गुप्ता भी हुईं शामिल

1984 सिख दंगा पीड़ित:1984 दंगा पीड़ितों के समर्थन में BJP का मार्च दिल्ली: 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों के समर्थन में दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला। इस मार्च में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा प्रमुख हर्ष मल्होत्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। मार्च के दौरान नेताओं ने दंगा पीड़ित परिवारों के प्रति समर्थन जताया। मिली जानकारी के अनुसार, यह मार्च हरि नगर बस डिपो से शुरू होकर तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक निकाला गया। इसमें भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च के जरिए 1984 के सिख विरोधी दंगों में प्रभावित परिवारों के मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की गई। रेखा गुप्ता और हर्ष मल्होत्रा ने लिया हिस्सा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली भाजपा प्रमुख हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी इस मार्च का प्रमुख आकर्षण रही। दोनों नेताओं के साथ भाजपा के कई अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी इसमें भाग लिया। मार्च में शामिल लोगों ने 1984 के दंगों के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ एकजुटता प्रदर्शित की। इस दौरान दंगा प्रभावित परिवारों को न्याय और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी चर्चा में लाया गया। 1984 के दंगों की याद और पीड़ित परिवारों का मुद्दा गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क उठी थी। दिल्ली में इसका व्यापक असर देखने को मिला था। इस हिंसा में हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में परिवारों को अपने घर, कारोबार और अपनों को खोना पड़ा। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में 2,733 लोगों की मौत हुई थी। 1984 Sikh Archive+1 चार दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा में बना हुआ है। पीड़ित परिवारों की न्याय, सम्मान और अधिकारों से जुड़ी मांगें समय-समय पर सामने आती रही हैं। दिल्ली में मार्च के क्या हैं मायने? हरि नगर से तिलक नगर तक निकाला गया भाजपा का यह मार्च 1984 के दंगा पीड़ित परिवारों के प्रति समर्थन जताने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की भागीदारी के जरिए पार्टी ने इस मुद्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मुख्य बातें: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मार्च में शामिल हुईं। दिल्ली भाजपा प्रमुख हर्ष मल्होत्रा ने भी हिस्सा लिया। हरि नगर बस डिपो से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक मार्च निकाला गया। 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित हुआ।

वाराणसी में निशांत कुमार का बड़ा बयान, UP में NDA के साथ चुनाव लड़ने के दिए संकेत

निशांत कुमार NDA गठबंधन: UP में NDA के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी, BJP से बातचीत पर निशांत ने दिया अपडेट। उत्तर प्रदेश की सियासत में NDA को लेकर नई चर्चा तेज हो गई है। वाराणसी में निशांत कुमार ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में NDA के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इस मुद्दे पर अभी बीजेपी के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। 2027 यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर JDU की तैयारी निशांत कुमार ने कहा कि जनता दल यूनाइटेड की जड़ें बिहार में हैं, लेकिन पार्टी का संगठन देश के दूसरे राज्यों में भी मौजूद है। अब पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसके लिए कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने और प्रदेश में संगठन का विस्तार करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से राज्य में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने की मांग कर रहे थे। इसी को देखते हुए वाराणसी में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया है। पार्टी आने वाले दिनों में प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में भी अपनी गतिविधियां बढ़ा सकती है। NDA के साथ चुनाव लड़ने की रणनीति पर नजर निशांत कुमार के बयान का सबसे अहम पहलू उत्तर प्रदेश में NDA के साथ चुनाव लड़ने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी NDA के घटक दल के रूप में चुनाव लड़ने का प्रयास करेगी। हालांकि, बीजेपी के साथ सीटों के बंटवारे या गठबंधन को लेकर अभी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। इस पर अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लेगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। पिछले यानी 2022 के विधानसभा चुनाव में JDU ने NDA से अलग होकर 27 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। ऐसे में इस बार NDA के साथ चुनाव लड़ने की संभावनाओं को पार्टी के लिए अहम राजनीतिक विकल्प माना जा रहा है। Web India News+2 पिता नीतीश कुमार के विकास विजन को आगे बढ़ाने की बात निशांत कुमार ने अपने पिता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों और विचारधारा को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने NDA के हालिया विधान परिषद चुनावों में जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों को बधाई दी। उनके मुताबिक, NDA की जीत जनता के बीच पिछले दो दशकों में किए गए विकास कार्यों के प्रति विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने चुनाव में मिली हार की समीक्षा करने और कमियों को दूर करने की बात भी कही। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि उत्तर प्रदेश में JDU और BJP के बीच गठबंधन को लेकर कब बातचीत शुरू होती है और 2027 के चुनाव में दोनों दल किस रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं। निशांत कुमार का यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में JDU की बढ़ती सक्रियता और संभावित NDA रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पटना के मिलर स्कूल ग्राउंड में ब्राह्मणों का महाजुटान, UGC नियम और SC/ST एक्ट को लेकर उठी आवाज

पटना ब्राह्मण महाजुटान: पटना में ब्राह्मण समाज का महाजुटान, UGC नियमों पर उठी आवाज। पटना: बिहार की राजधानी पटना में रविवार को ब्राह्मण समाज का बड़ा जुटान देखने को मिल रहा है। मिलर स्कूल ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग पहुंच रहे हैं। आयोजन स्थल पर उमड़ी भीड़ के बीच समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा हो रही है। इस महाजुटान को अपने अधिकार, सम्मान और सामाजिक भागीदारी की आवाज बुलंद करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इस आयोजन में UGC के नए नियमों और SC/ST एक्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण समाज की चिंताओं और सवालों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि समाज के लोगों के मन में कई विषयों को लेकर असंतोष है, जिन पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। अधिकार और सम्मान को लेकर एकजुट हुआ समाज कार्यक्रम में शामिल लोगों का कहना है कि उनकी किसी दूसरे समाज या वर्ग से कोई लड़ाई नहीं है। उनकी मांग है कि सभी वर्गों के अधिकारों और सम्मान का ध्यान रखा जाए। ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि उनकी समस्याओं और विचारों को भी नीतिगत फैसलों में उचित स्थान मिलना चाहिए। महाजुटान के जरिए सामाजिक एकता, सम्मान और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने की कोशिश की जा रही है। आयोजन स्थल पर जुटी भीड़ इस कार्यक्रम को लेकर लोगों की सक्रिय भागीदारी को दर्शा रही है। आशीष कुमार बब्बू के नेतृत्व में आयोजन लोक मंच के आशीष कुमार बब्बू की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। आयोजकों का उद्देश्य विभिन्न मुद्दों पर सामूहिक रूप से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। सरकार तक पहुंचेगी समाज की आवाज? इस महाजुटान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि समाज की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है। खासकर UGC के नियमों और SC/ST एक्ट को लेकर सामने आ रही चिंताओं पर सरकार की प्रतिक्रिया पर लोगों की नजर रहेगी। फिलहाल, पटना के मिलर स्कूल ग्राउंड में जुटे लोगों के बीच यह आयोजन सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस महाजुटान का क्या प्रभाव पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

1984 सिख नरसंहार की बरसी पर हिमंत बिस्वा सरमा का राहुल गांधी पर हमला, INDIA गठबंधन से मांगी माफी

हिमंत बिस्वा सरमा राहुल गांधी: 1984 सिख नरसंहार की बरसी पर हिमंत सरमा का बयान नई दिल्ली: 1984 के सिख नरसंहार की बरसी के मौके पर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की रैली के समय और तारीख पर सवाल उठाए। हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने पोस्ट में 1984 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि आज ही के दिन दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई थी। ऐसे संवेदनशील दिन पर दिल्ली में राजनीतिक रैली और हंगामे का आयोजन करना सिख समुदाय के पुराने जख्मों को फिर से कुरेदने जैसा है। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन से की माफी की मांग मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने संदेश में राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं से अपील की कि वे सिख नरसंहार की बरसी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के लिए कोई दूसरी तारीख चुन सकते थे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यक्रम किसी अन्य दिन भी आयोजित किया जा सकता था। उन्होंने अपने बयान में कांग्रेस नेतृत्व पर सिख समुदाय के प्रति असंवेदनशीलता का आरोप भी लगाया। साथ ही सुझाव दिया कि INDIA गठबंधन के नेता रैली के मंच से सिख समुदाय से माफी मांगें और 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखें। राजीव गांधी के नेतृत्व का भी किया जिक्र हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उस समय के कांग्रेस नेतृत्व का जिक्र करते हुए 1984 की हिंसा की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व के दौरान 3,000 से अधिक सिखों की हत्या हुई थी और इसके लिए कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज हिमंत बिस्वा सरमा के इस बयान के बाद 1984 के सिख नरसंहार और मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर उनका बयान कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं से जवाबदेही की मांग करता है, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। 1984 का सिख नरसंहार भारतीय इतिहास की एक दर्दनाक घटना है। इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को याद करते हुए न्याय, संवेदनशीलता और जवाबदेही का सवाल आज भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

दीपावली और छठ से पहले बेतिया-बगहा में मिठाई दुकानों पर छापेमारी, दो प्रतिष्ठानों को नोटिस

बेतिया में मिठाई दुकानों पर छापेमारी: बेतिया-बगहा में मिठाई दुकानों और कारखानों की जांच, साफ-सफाई में मिली खामियां पश्चिम चंपारण: दीपावली और छठ महापर्व को देखते हुए पश्चिम चंपारण जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को देखते हुए बेतिया और बगहा में मिठाई दुकानों एवं मिठाई बनाने वाले कारखानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई का उद्देश्य लोगों को मिलावटी और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से बचाना तथा बाजार में बिकने वाली मिठाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। प्रशासन की ओर से की गई जांच के दौरान कई दुकानों और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई तथा खाद्य पदार्थों के रखरखाव में खामियां सामने आईं। जांच टीम ने दुकानों में मिठाई तैयार करने, उन्हें सुरक्षित रखने और बिक्री के लिए प्रदर्शित करने की व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान खाद्य पदार्थों को स्वच्छ वातावरण में रखने और साफ-सफाई के निर्धारित मानकों का पालन करने में लापरवाही पाई गई। दो प्रतिष्ठानों को जारी किया गया नोटिस जांच के दौरान मिली कमियों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने दो प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किया है। संबंधित दुकानदारों और संचालकों को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जाएगी। त्योहारों में मिलावट रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट दीपावली और छठ के दौरान मिठाइयों की खरीदारी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटखोरी और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता भी बढ़ जाती है। त्योहारों के समय अधिक मुनाफा कमाने के लिए कुछ दुकानदार खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बाजारों में निगरानी तेज कर दी है। प्रशासन का कहना है कि मिठाई दुकानों और खाद्य पदार्थों के निर्माण से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच आगे भी जारी रहेगी। दुकानदारों को साफ-सफाई बनाए रखने, खाद्य सामग्री को उचित तरीके से सुरक्षित रखने और निर्धारित मानकों का पालन करने की हिदायत दी गई है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जांच के दौरान दोबारा गड़बड़ी मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि त्योहारों के दौरान आम लोगों की सेहत और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन सतर्क है। वहीं, उपभोक्ताओं को भी मिठाई खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, साफ-सफाई और विश्वसनीय दुकान का ध्यान रखने की जरूरत है।

दिल्ली में INDIA ब्लॉक की रैली में पप्पू यादव का केंद्र पर हमला, बोले- लोकतंत्र और संविधान पर हमला बर्दाश्त नहीं

पप्पू यादव का केंद्र सरकार पर हमला: दिल्ली रैली में पप्पू यादव का केंद्र पर हमला, संविधान बचाने की अपील नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA ब्लॉक की रैली में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि जब-जब देश में लोकतंत्र और संविधान पर हमला करने की कोशिश हुई है, तब-तब जनता ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। पप्पू यादव ने कहा कि भारत का लोकतंत्र जनता की ताकत से चलता है और इसकी रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। रैली को संबोधित करते हुए पप्पू यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संविधान बचाने की मुहिम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए देशभर में करीब 10 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की है। इस यात्रा के जरिए उन्होंने आम लोगों के बीच जाकर लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का उठाया मुद्दा पप्पू यादव ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक को बराबरी का अधिकार, अपनी बात रखने की आजादी और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जब इन मूल्यों पर किसी तरह का खतरा पैदा होता है, तो देश की जनता चुप नहीं बैठती। राहुल गांधी की पदयात्रा का किया जिक्र पूर्णिया सांसद ने राहुल गांधी के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान बचाने की मुहिम को लेकर उन्होंने लंबी पदयात्रा की और देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से संवाद किया। पप्पू यादव ने इस प्रयास को लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने से जोड़कर पेश किया। INDIA ब्लॉक की रैली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA ब्लॉक की इस रैली में विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की। रैली के जरिए विपक्ष ने एकजुटता दिखाने और जनता के बीच अपने राजनीतिक संदेश को पहुंचाने की कोशिश की। पप्पू यादव के बयान से साफ है कि विपक्षी दल आने वाले समय में संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाए रखना चाहते हैं।

पटना में शराब का बड़ा जखीरा बरामद, 8.80 लाख की शराब के साथ एक गिरफ्तार

पटना में शराब बरामद:महुआबाग में मद्य निषेध विभाग की बड़ी छापेमारी बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी पटना में मद्य निषेध विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की है। हवाई अड्डा थाना क्षेत्र के महुआबाग इलाके में की गई छापेमारी के दौरान एक किराए के कमरे से 733 लीटर से अधिक अंग्रेजी शराब जब्त की गई। बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब 8.80 लाख रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई में पुलिस और मद्य निषेध विभाग की टीम ने कुल 2,497 बोतल शराब बरामद की है। मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जिसकी पहचान रंजन कुमार के रूप में हुई है। विभाग की टीम आरोपी से पूछताछ कर इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है। किराए के कमरे में छिपाकर रखी गई थी शराब जानकारी के अनुसार, मद्य निषेध विभाग को महुआबाग इलाके में अवैध शराब के भंडारण की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने योजना बनाकर हवाई अड्डा थाना क्षेत्र में छापेमारी की। तलाशी के दौरान एक किराए के कमरे से बड़ी संख्या में अंग्रेजी शराब की बोतलें बरामद हुईं। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। यूपी, एमपी और हरियाणा से मंगाई जाती थी शराब गिरफ्तार आरोपी रंजन कुमार से पूछताछ के दौरान शराब तस्करी से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि शराब की खेप उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा से मंगाई जाती थी। इसके बाद इसे पटना और आसपास के इलाकों में खपाने की तैयारी की जाती थी। शराब तस्करी नेटवर्क की जांच में जुटा विभाग इस बरामदगी के बाद मद्य निषेध विभाग अब शराब की सप्लाई चेन और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गया है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि शराब किन लोगों के माध्यम से पटना पहुंचाई जा रही थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद भी लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले अवैध शराब कारोबार पर सवाल खड़े करते हैं। फिलहाल विभाग गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटा है।