पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद–बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम में ग्रामीण लोकतंत्र और पंचायतों की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम संसद के माध्यम से सिर्फ स्थानीय समस्याओं पर चर्चा ही नहीं, बल्कि विकास को लेकर नए सुझाव भी सामने आने चाहिए।
सम्राट चौधरी ने कहा कि ग्राम संसद के मंच से यह विचार किया जाना चाहिए कि बिहार किस तरह प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी को विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर से आने वाले सुझाव योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बिहार के भविष्य को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा समृद्ध बिहार की कल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2037 राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। ऐसे में आने वाले वर्षों में बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अभी से स्पष्ट लक्ष्य और दिशा तय करने की जरूरत है।
कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक व्यवस्था की भूमिका पर भी मुख्यमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को तीन स्तरों में समझा जा सकता है और आम तौर पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी जैसे पदों को सत्ता के प्रमुख केंद्रों के रूप में देखा जाता है। हालांकि, उनके अनुसार गांव के स्तर पर मुखिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि मुखिया सीधे तौर पर गांव की जनता से जुड़े होते हैं और स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में जिम्मेदारियां संभालते हैं। उन्होंने पंचायत चुनावों की प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे-जैसे लोकतांत्रिक व्यवस्था जमीनी स्तर तक पहुंचती है, चुनाव उतना ही चुनौतीपूर्ण होता जाता है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक ग्राम संसद को मजबूत बनाकर ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। इसके जरिए स्थानीय जरूरतों, विकास योजनाओं और भविष्य की प्राथमिकताओं पर संवाद को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने बिहार को समृद्ध बनाने के लक्ष्य के लिए पंचायतों और ग्रामीण प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।