दवाओं और मेडिकल डिवाइस की सुरक्षा को लेकर WHO का जोर, भारत के साथ मिलकर हो रहा काम

नई दिल्ली: स्वास्थ्य सेवाओं में दवाओं, मेडिकल डिवाइस और अन्य चिकित्सा उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के भारत प्रतिनिधि डॉ. यवुआन जे. एफ. ह्यूटिन ने फार्माकोविजिलेंस और हेल्थकेयर सेफ्टी मॉनिटरिंग को लेकर भारत में चल रहे सहयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

डॉ. ह्यूटिन के मुताबिक, WHO भारत की इंडिया फार्माकोपिया कमीशन (IPC) के साथ कई स्तरों पर मिलकर काम कर रहा है। इस सहयोग में चिकित्सा उत्पादों के मानक तय करने से लेकर उनकी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने तक कई पहल शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि मेडिकल डिवाइस समेत विभिन्न स्वास्थ्य उत्पादों से जुड़े जोखिमों की पहचान और उनकी निगरानी के लिए तैयार किए जा रहे दिशा-निर्देश इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों और संस्थानों को ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिससे संभावित सुरक्षा जोखिमों को समय रहते पहचाना जा सके और आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

WHO प्रतिनिधि ने कहा कि हेल्थकेयर सेफ्टी केवल किसी एक संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, नियामक संस्थाओं और अन्य संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना जरूरी है। उन्होंने इसे एक साझा प्रयास बताते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुरक्षा की संस्कृति को लगातार मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

डॉ. ह्यूटिन के अनुसार, मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था विकसित करने के लिए निगरानी, मानकों और बेहतर दिशा-निर्देशों के साथ-साथ सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी भी जरूरी है।

उन्होंने भारत सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया और कहा कि देश में स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े इस लक्ष्य को लेकर सरकार लगातार गंभीरता से काम कर रही है।

फार्माकोविजिलेंस का उद्देश्य दवाओं और चिकित्सा उत्पादों के इस्तेमाल से जुड़े संभावित प्रतिकूल प्रभावों की पहचान, निगरानी और मूल्यांकन करना है। ऐसे प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने और मरीजों के हितों की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।

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