दिशा सालियान केस में सुरक्षा को लेकर निलेश ओझा का बड़ा दावा

ठाणे: दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में CBI की ओर से FIR दर्ज किए जाने के बाद अब गवाहों और मामले से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने दावा किया है कि FIR दर्ज होने के तुरंत बाद चार लोगों के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए पत्र दिया गया था। इनमें सतीश सालियान, गवाह समीर वानखेड़े, स्वयं निलेश ओझा और आशुतोष पाठक के नाम शामिल बताए गए हैं।

ओझा के अनुसार, पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय और नारकोटिक्स ब्यूरो से संबंधित रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कई गंभीर आरोपों की जांच की मांग की गई थी। उन्होंने दावा किया कि मामले में आदित्य ठाकरे समेत कई हाई-प्रोफाइल लोगों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच जरूरी है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने तक नहीं मानी जा सकती।

CBI ने सितंबर 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज की थी। FIR में कथित गैंगरेप, हत्या, साजिश, सबूत मिटाने और मामले को दबाने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, FIR में कई लोगों के नामों का उल्लेख उनकी कथित भूमिका की जांच के संदर्भ में किया गया है, लेकिन नाम दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।

निलेश ओझा ने यह भी आरोप लगाया कि मामले से जुड़े लोगों को Witness Protection Scheme और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए थी। उनका कहना है कि सुरक्षा नहीं मिलने के बाद उन्होंने उपलब्ध सामग्री और दस्तावेज CBI को सौंपे और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की।

मामले में अब CBI की जांच आगे बढ़ रही है। ऐसे में जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जा रहे साक्ष्य और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी। दूसरी ओर, आदित्य ठाकरे ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्होंने दिशा सालियान से कभी मुलाकात नहीं की और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को उन्होंने राजनीतिक एवं चरित्रहनन की कोशिश बताया है।

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