सहरसा में अमीन गिरफ्तार: सहरसा में निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई, अमीन गिरफ्तार
सहरसा: बिहार के सहरसा जिले से भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आया है। मंगलवार को पटना से पहुंची निगरानी विभाग की टीम ने सोनवर्षा अंचल कार्यालय में पदस्थापित विशेष सर्वे अमीन दीपक राज को 5,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है।
5 हजार रुपये रिश्वत लेते निगरानी टीम ने किया गिरफ्तार
मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार विशेष सर्वे अमीन की पहचान दीपक राज के रूप में हुई है। वह सोनवर्षा अंचल कार्यालय में पदस्थापित थे। निगरानी विभाग की टीम ने उनके निजी कार्यालय में छापेमारी कर कथित तौर पर 5,000 रुपये रिश्वत लेते हुए उन्हें गिरफ्तार किया।
जमीन का रकबा और नक्शा सुधारने के लिए मांगी गई थी रिश्वत
इस मामले के आवेदक प्रभात कुमार ने बताया कि उनके दादा पिछले 5-6 वर्षों से करीब 480 डिसमिल जमीन के रकबा और नक्शे में सुधार कराने के लिए अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे थे। इसके बाद प्रभात कुमार भी पिछले करीब छह महीने से जमीन के रकबा और नक्शे में सुधार कराने के लिए लगातार कार्यालय जा रहे थे।
आवेदक के अनुसार, काम करने के बदले अमीन द्वारा 15 से 20 हजार रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि रिश्वत की रकम नहीं देने पर उनका काम नहीं किया जा रहा था।
14 अक्टूबर को निगरानी विभाग में की थी शिकायत
लगातार परेशान होने के बाद प्रभात कुमार ने 14 अक्टूबर को पटना स्थित निगरानी विभाग में लिखित आवेदन दिया था। शिकायत के आधार पर निगरानी विभाग ने कांड संख्या 129/26 दर्ज किया और मामले का सत्यापन कराया।
सत्यापन में शिकायत से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद निगरानी टीम ने आगे की कार्रवाई की योजना बनाई।
निजी कार्यालय में निगरानी टीम ने की छापेमारी
मंगलवार को पटना से पहुंची निगरानी विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए विशेष सर्वे अमीन दीपक राज को 5,000 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद मामले को लेकर सोनवर्षा क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई।
निगरानी डीएसपी ने दी कार्रवाई की जानकारी
इस कार्रवाई को लेकर निगरानी डीएसपी अमरेंद्र प्रताप विद्यार्थी ने बताया कि आवेदक की ओर से रिश्वत मांगने की शिकायत दी गई थी। शिकायत के आधार पर कांड दर्ज कर उसका सत्यापन कराया गया। इसके बाद मंगलवार को टीम ने अमीन के निजी कार्यालय में छापेमारी की, जहां उन्हें 5,000 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
सहरसा में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर जमीन से जुड़े सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल निगरानी विभाग की आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।