मोहनिया में शराब तस्करी: मोहनिया में शराब से भरी कार पलटी, मौके पर मची अफरा-तफरी
कैमूर (मोहनिया): बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब की तस्करी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। कैमूर जिले के मोहनिया इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शराबबंदी कानून के जमीनी स्तर पर हो रहे पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दसौती गांव के पास आग लगने की घटना के बाद शराब से भरी एक कार पानी के गड्ढे में पलट गई। इसके बाद कार से शराब के पैकेट बाहर निकलते ही ग्रामीणों के बीच उन्हें उठाने की होड़ मच गई।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की।
आग लगने के बाद पानी के गड्ढे में पलटी कार
मिली जानकारी के अनुसार, मोहनिया के दसौती गांव के पास एक कार में आग लगने के बाद तस्करों ने शराब से लदी गाड़ी को पानी से भरे गड्ढे में पलट दिया। बताया जा रहा है कि कार में बड़ी मात्रा में शराब रखी हुई थी। गाड़ी पलटने के बाद शराब के पैकेट बाहर निकलकर आसपास फैल गए।
घटना के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों की नजर शराब के पैकेटों पर पड़ी। इसके बाद कई लोग पैकेट उठाकर वहां से भागने लगे। देखते ही देखते घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और शराब के पैकेट उठाने को लेकर होड़ मच गई।
शराब के पैकेट उठाकर भागने लगे ग्रामीण
इस घटना का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि कार से शराब बाहर निकलते ही कुछ ग्रामीण उसे उठाकर ले जाने लगे। शराबबंदी वाले बिहार में खुलेआम इस तरह शराब के पैकेट उठाने की घटना ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आमतौर पर शराबबंदी कानून के तहत शराब का निर्माण, बिक्री, परिवहन और सेवन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद तस्करी के लिए शराब को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
दसौती गांव के पास हुई इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर शराब तस्कर किस तरह पुलिस और प्रशासन की निगरानी से बचकर शराब की खेप को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचा रहे हैं।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी के बाद घटनास्थल की स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। शराब से भरी कार के पलटने और ग्रामीणों के पैकेट उठाकर भागने की घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, इस मामले में अब तक शराब की कुल मात्रा, कार के मालिक, चालक और तस्करी में शामिल लोगों की पहचान को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस की ओर से जांच और आगे की कार्रवाई से जुड़ी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
शराबबंदी कानून पर फिर उठे सवाल
बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए कई साल हो चुके हैं। इस कानून का उद्देश्य शराब के सेवन और अवैध कारोबार पर रोक लगाना है। लेकिन समय-समय पर अलग-अलग जिलों से शराब की बरामदगी और तस्करी की खबरें सामने आती रहती हैं।
मोहनिया के दसौती गांव के पास हुई यह घटना भी इसी चुनौती को उजागर करती है। एक तरफ शराब तस्कर अवैध तरीके से शराब की खेप ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ दुर्घटना के बाद ग्रामीणों का शराब के पैकेट उठाकर भागना कानून के प्रति जागरूकता और उसके पालन को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की जांच और आधिकारिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शराब से भरी कार किसकी थी और इसके पीछे सक्रिय तस्करी नेटवर्क तक पुलिस कब पहुंचती है।