नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े कर्मचारियों के लिए एक अहम फैसला लिया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि EPFO की वेतन सीमा को 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस बदलाव का उद्देश्य अधिक संख्या में कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।
मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यह फैसला लिया है। उनके अनुसार, पहले EPFO में 15,000 रुपये मासिक वेतन तक की सीमा लागू थी। ऐसे में जिन कर्मचारियों का वेतन इससे अधिक था, उनके लिए EPFO की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू नहीं होती थी और वे अपनी इच्छा के अनुसार योगदान कर सकते थे।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी EPFO के दायरे में आ सकेंगे। इससे बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारियों को भविष्य निधि और उससे जुड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है, जो अब तक इस दायरे से बाहर थे।
मनसुख मंडाविया के मुताबिक, इस फैसले से करीब 50 लाख से लेकर 1 करोड़ तक नए लाभार्थी EPFO से जुड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बदलाव को जल्द लागू करने की दिशा में काम करेगी और इसे अगले दिन से प्रभावी किए जाने की बात कही गई है।
EPFO में शामिल होने का सीधा संबंध कर्मचारियों की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से है। नौकरी के दौरान नियमित योगदान के जरिए कर्मचारी अपने भविष्य के लिए एक वित्तीय आधार तैयार कर सकते हैं। ऐसे में वेतन सीमा बढ़ने से उन कर्मचारियों को भी बचत और सामाजिक सुरक्षा की औपचारिक व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिल सकता है, जिनकी आय पहले निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण वे अनिवार्य दायरे में नहीं आते थे।
हालांकि, नई व्यवस्था के वास्तविक प्रभाव और पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित सरकारी अधिसूचना और EPFO के लागू नियमों के आधार पर स्पष्ट होगी।