नई दिल्ली: UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने सरकार का पक्ष सामने रखा। उन्होंने UPI को भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सिस्टम देश के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है।
सिंधिया के मुताबिक, UPI के जरिए हर महीने करीब 30 लाख करोड़ रुपये के भुगतान प्रोसेस किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई तकनीक या पेमेंट सिस्टम बड़े स्तर पर स्थापित हो जाता है, तो उसके संचालन और भविष्य की स्थिरता को लेकर भी व्यवस्था तैयार करनी पड़ती है। इसी संदर्भ में उन्होंने UPI के लिए 0.4 प्रतिशत MDR की व्यवस्था का उल्लेख किया।
केंद्रीय मंत्री ने क्रेडिट और डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान की लागत का भी उदाहरण दिया। उनके अनुसार, क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर लागत आम तौर पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत के बीच होती है, जबकि डेबिट कार्ड के मामले में यह करीब 0.9 प्रतिशत बताई गई है। इसके मुकाबले UPI के लिए सरकार और RBI की ओर से तय लागत संरचना 0.4 प्रतिशत बताई गई है।
हालांकि, सिंधिया ने स्पष्ट किया कि आम ग्राहकों के छोटे डिजिटल भुगतानों पर MDR का असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य प्रतिशत रहेगा। यानी इस सीमा तक भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए MDR के नाम पर कोई शुल्क नहीं होगा।
मंत्री ने यह भी दावा किया कि मौजूदा UPI लेनदेन में करीब 96 प्रतिशत ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये से कम राशि के होते हैं। उनके मुताबिक, इस आधार पर प्रस्तावित लागत व्यवस्था का दायरा कुल ट्रांजैक्शन के लगभग 4 प्रतिशत हिस्से तक सीमित रहेगा।
UPI MDR को लेकर सिंधिया का यह बयान ऐसे समय आया है जब डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसके संचालन, लागत और पेमेंट इकोसिस्टम की आर्थिक स्थिरता पर चर्चा जारी है। सरकार की ओर से छोटे भुगतानों को शुल्क-मुक्त रखने पर जोर दिया गया है, जबकि बड़े ट्रांजैक्शन से जुड़े लागत ढांचे को लेकर अलग व्यवस्था की बात कही जा रही है।