पटना: बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए राहत और सहायता का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में अपनी दो महीने की सैलरी देने की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह अपनी सैलरी बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों को समर्पित कर रहे हैं।
मनोज तिवारी ने बिहार को अपना परिवार बताते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा रहना जरूरी है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री राहत कोष में दी जाने वाली यह राशि बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
सांसद ने अपने पोस्ट में बिहार सरकार की ओर से चलाए जा रहे राहत कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, चिकित्सा सुविधाएं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जा रही है। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को 7 हजार रुपये की सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए NDRF और SDRF की टीमें तैनात हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में जरूरत के अनुसार राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने का काम किया जा रहा है। वहीं, बाढ़ के कारण किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से भी 18 सितंबर को मुख्यमंत्री राहत कोष में बिहार प्रदेश बीजेपी द्वारा 51 लाख रुपये दिए जाने की जानकारी जारी की गई थी।
मनोज तिवारी ने अपने संदेश में बाढ़ प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि राहत और बचाव के प्रयासों में हरसंभव सहयोग किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री राहत कोष में लगातार अलग-अलग लोगों और संस्थाओं की ओर से सहयोग राशि भी पहुंच रही है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक राहत कोष में हाल के दिनों में कई लोगों और संस्थाओं ने योगदान दिया है।
बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच राहत कार्यों के साथ अब फसल और अन्य नुकसान का आकलन भी अहम माना जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों और किसानों तक सहायता जल्द पहुंचाई जा सके।