भागलपुर शिक्षा विभाग में ₹98 लाख का घोटाला, FIR दर्ज कराने वाले DPO पर ही साजिश का आरोप

भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिला शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षिका की आईडी बनाकर सरकारी राशि की निकासी का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। करीब 98 लाख रुपये के कथित घोटाले में पुलिस जांच के दौरान उस अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है, जिसने शुरुआत में खुद इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, डीपीओ (स्थापना) शशि चंदन चौधरी पर ही इस पूरे मामले में मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप सामने आया है। मामले में पुलिस की जांच जारी है।

🔴 फर्जी ‘तनुश्री’ आईडी से निकाली गई सरकारी राशि

जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, शिक्षा विभाग के HRMS पोर्टल पर ‘तनुश्री’ नाम से एक कथित फर्जी शिक्षिका की आईडी तैयार की गई थी। आरोप है कि इस आईडी के साथ जाली दस्तावेज और बैंक खाते की जानकारी जोड़कर सरकारी राशि निकाली गई।

बताया जा रहा है कि शुरुआत में इस आईडी के माध्यम से करीब सात लाख रुपये का सामान्य वेतन भुगतान किया गया। इसके बाद पोर्टल पर बदलाव कर मकान किराया भत्ता (HRA) की राशि असामान्य रूप से बढ़ा दी गई, जिसके बाद कुल निकासी करीब 98 लाख रुपये तक पहुंच गई।

🔴 HRA को 20% से बढ़ाकर 2000% करने का आरोप

इस कथित घोटाले में सबसे चौंकाने वाला पहलू HRA में की गई हेराफेरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पोर्टल पर मकान किराया भत्ते को मूल वेतन के 2000 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया था। जबकि खबर में बताए गए नियमों के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों के लिए HRA की अधिकतम दर 20 प्रतिशत थी।

इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे की गई और इसे किस स्तर पर मंजूरी मिली, यह जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन विवरण और अप्रूवल से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

🔴 पैसे का ट्रेल हरियाणा से भागलपुर तक

वित्तीय लेनदेन की जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि सरकारी खाते से निकाली गई रकम पहले हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में भेजी गई। इसके बाद राशि का कुछ हिस्सा वापस भागलपुर पहुंचा।

आरोप है कि यूपीआई के जरिए ऑपरेटर अविनाश राज की पत्नी काजल और गौतम कुमार नाम के युवक के खातों में भी पैसे भेजे गए। इस मामले में एक कार खरीदे जाने और एटीएम के माध्यम से नकदी निकाले जाने की बात भी सामने आई है। इन लेनदेन में किसकी कितनी भूमिका थी, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

🔴 FIR दर्ज कराने वाले अधिकारी की भूमिका पर सवाल

मामला सामने आने के बाद डीपीओ शशि चंदन चौधरी ने जोगसर थाने में संविदा ऑपरेटर अविनाश राज, उसकी पत्नी काजल और संचिका प्रभारी शिशिर झा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस जांच में अब डीपीओ की भूमिका भी संदेह के दायरे में बताई जा रही है।

यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि संविदा ऑपरेटर अविनाश राज को जून 2026 में ही काम से हटा दिया गया था, तो उसकी आईडी कथित तौर पर सक्रिय कैसे रही और उससे जुड़े लेनदेन कैसे होते रहे।

🔴 कार्यालय से अहम फाइलें गायब होने की बात

जांच के दौरान जिला शिक्षा कार्यालय में साक्ष्य जुटाने पहुंची पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण फाइलें नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। इससे मामले की जांच और गंभीर हो गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दस्तावेज कहां गए और क्या उनका इस कथित वित्तीय अनियमितता से कोई संबंध है।

🔴 हिरासत और डिजिटल साक्ष्यों की जांच

मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की विशेष टीम ने संविदा ऑपरेटर अविनाश राज को बांका जिले के शंभूगंज और डीपीओ शशि चंदन चौधरी को भागलपुर से हिरासत में लिया है। वहीं, कथित तौर पर खाते में मौजूद 46 लाख रुपये को होल्ड भी कराया गया था।

अब जांच एजेंसियां कंप्यूटर के आईपी एड्रेस, लॉगिन टाइमिंग, डिजिटल अप्रूवल लॉग और डिजिटल सिग्नेचर की जांच कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्जी आईडी बनाने और राशि निकालने में किन लोगों की भूमिका रही और क्या इसी तरीके से अन्य खातों के जरिए भी सरकारी धन की निकासी हुई।

निष्कर्ष: भागलपुर शिक्षा विभाग का यह मामला सरकारी भुगतान प्रणाली की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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