राहुल गांधी पर मंत्री दीपक प्रकाश का हमला, बोले- सरकार को अस्थिर करने की कोशिश

पटना: बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश ने राहुल गांधी के ट्वीट को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सरकार को अस्थिर करने के लिए विदेश से विचार लेकर आते हैं। मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी का हालिया ट्वीट भी इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दीपक प्रकाश ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक दल को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने व्यवस्था से बाहर जाकर लोगों को उकसाने और राजनीतिक लाभ उठाने के उद्देश्य से कार्रवाई करने को चिंताजनक बताया। मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध दर्ज कराने के लिए संवैधानिक तथा कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं। ऐसे में इन प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों को उकसाकर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिशों से बचने की बात कही। दीपक प्रकाश का यह बयान राहुल गांधी के ट्वीट और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के संदर्भ में आया है। उनके बयान से राजनीतिक मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति सामने आई है। हालांकि, राहुल गांधी के ट्वीट को लेकर मंत्री ने जो आरोप लगाए हैं, वे उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। इस संबंध में राहुल गांधी का पक्ष और ट्वीट का पूरा संदर्भ सामने आने पर मामले की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
फरक्का जल संधि पर JDU का बड़ा सवाल, बिहार के हितों को लेकर नीतीश कुमार ने शुरू की पहल

पटना: बिहार के जल संसाधनों और फरक्का जल संधि के प्रभावों को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने एक बार फिर आवाज उठाई है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को पटना स्थित पार्टी प्रदेश कार्यालय के कर्पूरी सभागार में ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान पार्टी नेताओं ने फरक्का बैराज और जल संधि के कारण बिहार में बाढ़, सिंचाई, पेयजल और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को प्रमुखता से उठाया। पार्टी का कहना है कि संधि के नवीनीकरण के समय बिहार की मौजूदा जरूरतों के साथ भविष्य की जल आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। 2050 तक की जरूरतों को ध्यान में रखने की मांग JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि फरक्का जल संधि के निर्धारण के दौरान बिहार के हितों की अनदेखी हुई। उन्होंने दावा किया कि शुष्क मौसम में गंगा में पानी का प्रवाह कम होने के बावजूद बांग्लादेश के लिए निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ने का प्रावधान बिहार के जल संसाधनों पर दबाव डालता है। उन्होंने कहा कि बिहार में खेती, पेयजल, उद्योगों और रोजगार की जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में फरक्का जल संधि के नवीनीकरण में वर्ष 2050 तक बिहार की जल जरूरतों का आकलन किया जाना चाहिए। बाढ़ और सूखे की दोहरी चुनौती का मुद्दा JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि बिहार पिछले तीन दशकों से फरक्का बैराज और जल संधि के प्रभावों का खामियाजा भुगत रहा है। उनके अनुसार, बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने और नदी तल ऊंचा होने से बाढ़ की समस्या बढ़ने का दावा किया जाता है। वहीं, शुष्क मौसम में पानी की उपलब्धता का मुद्दा भी राज्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि बिहार के जल अधिकारों से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना जरूरी है। पार्टी नेताओं ने इस विषय पर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। गंगा किनारे के 12 जिलों में चलेगा अभियान पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर जनसंवाद अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से की गई थी। इसके तहत बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में कार्यक्रम निर्धारित हैं। अभियान का समापन कटिहार में होगा। कार्यक्रम में फरक्का बैराज और जल संधि के संभावित प्रभावों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई तथा लोगों को जागरूक करने के लिए पर्चे वितरित किए गए। JDU नेताओं ने मांग की कि बिहार के किसानों, आम लोगों और उद्योगों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए जल बंटवारे पर विचार किया जाए, ताकि राज्य को भविष्य में पानी की कमी और बाढ़ जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले मेट्रो सेवाओं पर नहीं लगेगी पूरी रोक

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों से पहले मेट्रो और अन्य रेलवे सेवाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मेट्रो ट्रेनों के संचालन पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेट्रो तथा अन्य रेलवे सेवाओं का संचालन उचित तरीके से नियंत्रित किया जाए। इस निर्देश का उद्देश्य विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आम लोगों की आवाजाही को भी प्रभावित होने से बचाना है। अदालत ने अधिकारियों को सेवाओं के नियमन में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही है। मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं होंगी सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि मेट्रो ट्रेनों के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। अधिकारियों को परिस्थितियों के अनुसार सेवाओं को रेगुलेट करके चलाने की व्यवस्था करनी होगी। इससे सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ यात्रियों की परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है। मुख्य बातें: मेट्रो पर पूर्ण रोक नहीं: ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद करने के बजाय नियंत्रित तरीके से जारी रखने का निर्देश। रेलवे सेवाओं पर भी ध्यान: विरोध-प्रदर्शनों से पहले मेट्रो और अन्य रेलवे सेवाओं के उचित संचालन की व्यवस्था करने को कहा गया। यात्रियों को मिलेगी जानकारी: अधिकारियों को फैसले के बारे में व्यापक स्तर पर जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। सुरक्षा और सुविधा में संतुलन: व्यवस्थाएं बनाते समय आम यात्रियों को होने वाली असुविधा कम करने पर जोर दिया गया। यात्रियों को पहले से जानकारी देने पर जोर अदालत ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि फैसले की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित की जाए, ताकि यात्रियों को परिवहन सेवाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में समय रहते पता चल सके। इससे लोग अपनी यात्रा की योजना पहले से बना सकेंगे और अचानक होने वाली परेशानियों से बचने में मदद मिलेगी। खासकर रोजाना मेट्रो और रेलवे से सफर करने वाले लोगों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है। विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ स्थानों पर परिचालन संबंधी बदलाव किए जा सकते हैं, इसलिए यात्रियों को आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने की जरूरत होगी। क्या है आनुपातिकता का सिद्धांत? सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को ‘आनुपातिकता के सिद्धांत’ का ध्यान रखने का भी निर्देश दिया है। इसका अर्थ है कि सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदम जरूरत के अनुरूप होने चाहिए और उनके कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। कुल मिलाकर, अदालत का निर्देश सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन के बीच संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है। 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शनों से पहले अधिकारियों को इसी आधार पर मेट्रो और रेलवे सेवाओं के संचालन की व्यवस्था करनी होगी।
SIR के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहेगा, रेणुका चौधरी बोलीं- न्याय मिलने तक लड़ाई जारी रखेंगे

नई दिल्ली: SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर विपक्षी दलों का विरोध जारी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक विपक्ष अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने इस विरोध को लोकतांत्रिक अधिकारों, संविधान और जनता के हक की लड़ाई बताया। रेणुका चौधरी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष का नैतिक दायित्व है। उनके मुताबिक, देश में बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने, संविधान की बात करने और अपने अधिकारों की मांग करने पर भी सवाल खड़े किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर SIR के खिलाफ विरोध जताना भी गलत माना जाता है, तो फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का अधिकार कहां रह जाता है? संविधान से मिले अधिकारों के लिए लड़ाई कांग्रेस सांसद ने कहा कि संविधान ने नागरिकों को जो अधिकार दिए हैं, वे देश की लोकतांत्रिक विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने स्वतंत्र भारत में मिली आजादी को एक पवित्र जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि इसे बदलने या कमजोर करने का अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए। रेणुका चौधरी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार की हर कार्रवाई को बिना सवाल किए स्वीकार कर लिया जाए? उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष का काम केवल चुप रहना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करना भी है। सरकार के जवाब तक जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन कितने दिनों तक चलेगा, इस सवाल पर रेणुका चौधरी ने कहा कि जब तक सरकार सच्चाई को स्वीकार नहीं करती, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष अलग-अलग मंचों और तरीकों से अपना विरोध दर्ज कराता रहेगा। उनके बयान से स्पष्ट है कि SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है। कांग्रेस सांसद ने इस संघर्ष को अपना नैतिक कर्तव्य बताते हुए कहा कि अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए लड़ते रहना जरूरी है। मुख्य बात: रेणुका चौधरी ने SIR के खिलाफ विरोध को संविधान से मिले अधिकारों की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि न्याय मिलने और सरकार की ओर से सच्चाई स्वीकार किए जाने तक विपक्ष विभिन्न मंचों पर अपनी आवाज उठाता रहेगा।
भागलपुर शिक्षा विभाग में ₹98 लाख का घोटाला, FIR दर्ज कराने वाले DPO पर ही साजिश का आरोप

भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिला शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षिका की आईडी बनाकर सरकारी राशि की निकासी का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। करीब 98 लाख रुपये के कथित घोटाले में पुलिस जांच के दौरान उस अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है, जिसने शुरुआत में खुद इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, डीपीओ (स्थापना) शशि चंदन चौधरी पर ही इस पूरे मामले में मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप सामने आया है। मामले में पुलिस की जांच जारी है। 🔴 फर्जी ‘तनुश्री’ आईडी से निकाली गई सरकारी राशि जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, शिक्षा विभाग के HRMS पोर्टल पर ‘तनुश्री’ नाम से एक कथित फर्जी शिक्षिका की आईडी तैयार की गई थी। आरोप है कि इस आईडी के साथ जाली दस्तावेज और बैंक खाते की जानकारी जोड़कर सरकारी राशि निकाली गई। बताया जा रहा है कि शुरुआत में इस आईडी के माध्यम से करीब सात लाख रुपये का सामान्य वेतन भुगतान किया गया। इसके बाद पोर्टल पर बदलाव कर मकान किराया भत्ता (HRA) की राशि असामान्य रूप से बढ़ा दी गई, जिसके बाद कुल निकासी करीब 98 लाख रुपये तक पहुंच गई। 🔴 HRA को 20% से बढ़ाकर 2000% करने का आरोप इस कथित घोटाले में सबसे चौंकाने वाला पहलू HRA में की गई हेराफेरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पोर्टल पर मकान किराया भत्ते को मूल वेतन के 2000 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया था। जबकि खबर में बताए गए नियमों के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों के लिए HRA की अधिकतम दर 20 प्रतिशत थी। इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे की गई और इसे किस स्तर पर मंजूरी मिली, यह जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन विवरण और अप्रूवल से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। 🔴 पैसे का ट्रेल हरियाणा से भागलपुर तक वित्तीय लेनदेन की जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि सरकारी खाते से निकाली गई रकम पहले हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में भेजी गई। इसके बाद राशि का कुछ हिस्सा वापस भागलपुर पहुंचा। आरोप है कि यूपीआई के जरिए ऑपरेटर अविनाश राज की पत्नी काजल और गौतम कुमार नाम के युवक के खातों में भी पैसे भेजे गए। इस मामले में एक कार खरीदे जाने और एटीएम के माध्यम से नकदी निकाले जाने की बात भी सामने आई है। इन लेनदेन में किसकी कितनी भूमिका थी, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। 🔴 FIR दर्ज कराने वाले अधिकारी की भूमिका पर सवाल मामला सामने आने के बाद डीपीओ शशि चंदन चौधरी ने जोगसर थाने में संविदा ऑपरेटर अविनाश राज, उसकी पत्नी काजल और संचिका प्रभारी शिशिर झा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस जांच में अब डीपीओ की भूमिका भी संदेह के दायरे में बताई जा रही है। यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि संविदा ऑपरेटर अविनाश राज को जून 2026 में ही काम से हटा दिया गया था, तो उसकी आईडी कथित तौर पर सक्रिय कैसे रही और उससे जुड़े लेनदेन कैसे होते रहे। 🔴 कार्यालय से अहम फाइलें गायब होने की बात जांच के दौरान जिला शिक्षा कार्यालय में साक्ष्य जुटाने पहुंची पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण फाइलें नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। इससे मामले की जांच और गंभीर हो गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दस्तावेज कहां गए और क्या उनका इस कथित वित्तीय अनियमितता से कोई संबंध है। 🔴 हिरासत और डिजिटल साक्ष्यों की जांच मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की विशेष टीम ने संविदा ऑपरेटर अविनाश राज को बांका जिले के शंभूगंज और डीपीओ शशि चंदन चौधरी को भागलपुर से हिरासत में लिया है। वहीं, कथित तौर पर खाते में मौजूद 46 लाख रुपये को होल्ड भी कराया गया था। अब जांच एजेंसियां कंप्यूटर के आईपी एड्रेस, लॉगिन टाइमिंग, डिजिटल अप्रूवल लॉग और डिजिटल सिग्नेचर की जांच कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्जी आईडी बनाने और राशि निकालने में किन लोगों की भूमिका रही और क्या इसी तरीके से अन्य खातों के जरिए भी सरकारी धन की निकासी हुई। निष्कर्ष: भागलपुर शिक्षा विभाग का यह मामला सरकारी भुगतान प्रणाली की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
दिल्ली में फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 9 आरोपी गिरफ्तार

AI और फोटोशॉप की मदद से मेडिकल रिपोर्ट में करते थे हेरफेर, दिव्यांगता प्रमाणपत्र जनरेशन पोर्टल पर अपलोड कर तैयार करते थे फर्जी दस्तावेज नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र तैयार करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दिल्ली और उत्तर प्रदेश से कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फोटोशॉप जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर मेडिकल रिपोर्ट में बदलाव करते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जनरेशन पोर्टल पर अपलोड करके कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। उत्तरी जिले की डीसीपी निहारिका भट्ट ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने दिल्ली और यूपी में कार्रवाई कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान कई ऐसे प्रमाणपत्र सामने आए हैं, जिनकी सत्यता की पड़ताल की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले में आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। AI और फोटोशॉप से मेडिकल रिपोर्ट में करते थे बदलाव पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य तकनीक का दुरुपयोग कर मेडिकल दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर करते थे। इसके लिए नाम और जन्मतिथि जैसी जानकारियों को बदला जाता था। इसके बाद संशोधित मेडिकल रिपोर्ट को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जनरेशन पोर्टल पर अपलोड किया जाता था, ताकि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जा सकें। इस पूरे मामले में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद जांच एजेंसियां दस्तावेजों की प्रामाणिकता और उनकी तैयारी की प्रक्रिया की जांच कर रही हैं। कई प्रमाणपत्र जांच के दायरे में डीसीपी निहारिका भट्ट के मुताबिक, पुलिस को कई संदिग्ध प्रमाणपत्र मिले हैं। इन सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से तैयार किए गए और इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है। जांच के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल था और दस्तावेजों को तैयार करने के लिए किन तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। आगे भी हो सकती हैं गिरफ्तारियां फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। बरामद प्रमाणपत्रों की सत्यता की पुष्टि और पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के बयान के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। यह मामला दिखाता है कि AI और डिजिटल एडिटिंग जैसे आधुनिक उपकरणों का गलत इस्तेमाल करके आधिकारिक दस्तावेजों में हेरफेर करने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रोहतास में 276 ट्रैक्टरों के साथ ‘अन्नदाता सेवा संकल्प यात्रा’ का आगाज, नित्यानंद राय ने खुद संभाली कमान

रोहतास/दिनारा: बिहार के रोहतास जिले में किसानों के सम्मान और कृषि विकास का संदेश देने के उद्देश्य से ‘अन्नदाता सेवा संकल्प यात्रा सह किसान संवाद’ की शुरुआत हुई। प्रसिद्ध भलुनी भवानी धाम से शुरू हुई इस यात्रा में 276 ट्रैक्टर शामिल हुए। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने खुद ट्रैक्टर चलाकर यात्रा का नेतृत्व किया। कार्यक्रम में बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी समेत भाजपा और किसान मोर्चा के कई नेता, कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। 🔴 दीप प्रज्वलित कर किया यात्रा का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत शुक्रवार को इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर यात्रा का उद्घाटन किया। भलुनी धाम से कैमूर जिले के मुण्डेश्वरी धाम तक प्रस्तावित 76 किलोमीटर की यात्रा का उद्देश्य किसानों के सम्मान, कृषि विकास और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया गया। यात्रा के दौरान किसानों से संवाद कर खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा भी की गई। 🔴 नित्यानंद राय ने किसानों के हित में योजनाओं का किया जिक्र किसान संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण और ग्रामीण विकास के लिए चलाई जा रही योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों पर जोर दिया। अपने संबोधन में नित्यानंद राय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के इन नेताओं को किसानों, गरीबों और देश की चिंता करने के बजाय अपने परिवार की चिंता अधिक रहती है। उन्होंने परिवारवाद के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा। 🔴 शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राजद पर साधा निशाना बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षा और विकास कार्यों का जिक्र करते हुए राजद पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा, “दिनारा से जनता ने राजद को किनारा कर दिया।” उनके बयान के दौरान क्षेत्रीय राजनीति और विकास से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे। 🔴 अतिथियों को भेंट किया गया हल और चावल का पॉट कार्यक्रम के संयोजक एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अखिलेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कृषि संस्कृति और रोहतास जिले की पहचान को सामने रखा। उन्होंने नित्यानंद राय, मिथिलेश तिवारी और किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राम सुमरन सिंह को खेती में इस्तेमाल होने वाला हल और चावल का पॉट भेंट किया। यह भेंट किसानों के परिश्रम और रोहतास की कृषि पहचान का प्रतीक रही। कार्यक्रम में पूर्व विधायक राजेश्वर राज, भाजपा जिला अध्यक्ष संतोष पटेल सहित कई जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कुल मिलाकर, अन्नदाता सेवा संकल्प यात्रा के जरिए किसानों के सम्मान, कृषि विकास और सरकारी योजनाओं पर संवाद का संदेश दिया गया। साथ ही, कार्यक्रम के मंच से बिहार की राजनीति को लेकर भी नेताओं ने अपनी बात रखी।
तमिलनाडु उपचुनाव पर तमिलिसाई सुंदरराजन का बड़ा बयान, बोलीं- 2029 में भी BJP की जीत तय

तमिलनाडु उपचुनाव: तमिलनाडु के उपचुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने चुनावी नतीजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार की योजनाओं और राज्य की नई सरकार के प्रति जनता के समर्थन से जोड़कर देखा। उनका कहना है कि लोगों का भरोसा भाजपा के साथ बना हुआ है और पार्टी को आने वाले चुनावों में भी सफलता मिलने की पूरी उम्मीद है। केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता का समर्थन: तमिलिसाई तमिलिसाई सुंदरराजन ने कहा कि राज्य की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रति अपना समर्थन जताया है। उनके मुताबिक, लोगों ने नवगठित राज्य सरकार का भी साथ दिया है। भाजपा नेता ने इस जनसमर्थन को पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने अपने बयान में जोर दिया कि केंद्र सरकार की योजनाओं और भाजपा के प्रति जनता का विश्वास पार्टी की राजनीतिक ताकत को दर्शाता है। हालांकि, उनके इस आकलन को भाजपा नेता का राजनीतिक नजरिया माना जाना चाहिए। चुनावी नतीजों के व्यापक अर्थ को समझने के लिए दूसरे राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और मतदाताओं के मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी है। SIR के विरोध को लेकर विपक्ष पर निशाना भाजपा नेता ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में प्रदर्शन करने वाले लोगों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव का जनादेश SIR के खिलाफ आंदोलन करने वालों के विरुद्ध है। SIR को लेकर देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची, मतदाताओं के नाम और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर बहस होती रही है। ऐसे में तमिलिसाई सुंदरराजन की यह टिप्पणी चुनावी राजनीति में इस मुद्दे के महत्व को उजागर करती है। हालांकि, मतदाताओं ने किस मुद्दे को ध्यान में रखकर मतदान किया, इसका निष्कर्ष केवल एक नेता के बयान से नहीं निकाला जा सकता। 2029 के चुनाव को लेकर जताया भरोसा तमिलिसाई सुंदरराजन ने आगे कहा कि जनता को भाजपा पर भरोसा है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि पार्टी 2029 में फिर चुनाव जीतेगी। उनके इस बयान को आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा के आत्मविश्वास के रूप में देखा जा सकता है। फिलहाल, तमिलिसाई सुंदरराजन का बयान उपचुनावों के राजनीतिक महत्व, केंद्र सरकार की योजनाओं और SIR पर जारी बहस को लेकर भाजपा के रुख को सामने रखता है। 2029 के चुनाव में किस पार्टी को जनता का समर्थन मिलेगा, यह आने वाले समय में राजनीतिक परिस्थितियों, उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।
प्रशांत किशोर का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- पारदर्शिता आने तक जारी रहेगा विरोध

पटना: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को उचित बताते हुए कहा कि केवल किसी एक अधिकारी को पद से हटाने से चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। इसके लिए पूरी चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना जरूरी है। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पिछले 8 से 10 वर्षों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने, चुनाव कार्यक्रम तय करने, पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और मतगणना की प्रक्रिया पर चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने आदर्श आचार संहिता के कथित चयनात्मक पालन का मुद्दा भी उठाया। 10 हजार रुपये बांटने के आरोप पर आयोग को घेरा जन सुराज नेता ने बिहार में मतदान से पहले मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये बांटे जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि ऐसी गतिविधियों पर चुनाव आयोग की भूमिका प्रभावी नजर नहीं आ रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती है। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि जब तक चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। विधान परिषद चुनाव में शिक्षक और रोजगार बने मुद्दे प्रशांत किशोर ने विधान परिषद चुनाव को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस बार शिक्षक और स्नातक मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। उनके अनुसार, मतदाताओं के बीच जातिगत समीकरणों के बजाय शिक्षकों के लिए सातवें वेतनमान और स्नातकों के लिए रोजगार जैसे सवाल चर्चा में हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में अब केवल पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों की बात नहीं हो रही, बल्कि मतदाता अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दे रहे हैं। NDA उम्मीदवारों को हराने की अपील प्रशांत किशोर ने कहा कि मतदान में लगभग 10 दिन शेष रहने के बीच सत्तारूढ़ पक्ष की बेचैनी बढ़ रही है। जन सुराज का मानना है कि यदि NDA उम्मीदवारों को चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है, तो शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर अधिक मजबूती से उठाया जा सकेगा। फिलहाल, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रशांत किशोर के बयान ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। चुनाव के नतीजे और मतदाताओं का रुख आने वाले दिनों में इस राजनीतिक बहस की दिशा तय करेंगे।
उपचुनाव नतीजों पर BJP नेता केया घोष का बड़ा बयान, बोलीं- जनता ने तुष्टिकरण की राजनीति को नकारा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में उपचुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता केया घोष ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि नंदीग्राम में भाजपा की जीत को लेकर पार्टी शुरू से ही आश्वस्त थी। वहीं, रेजीनगर के नतीजों को लेकर उन्होंने कहा कि वहां की जनता ने कथित तौर पर तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों से दूरी बना ली है। केया घोष के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी मुद्दों और मतदाताओं की पसंद को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब विकास और बुनियादी सुविधाओं के आधार पर राजनीतिक दलों का मूल्यांकन कर रही है। नंदीग्राम को लेकर पहले से जीत का दावा भाजपा नेता केया घोष ने कहा कि पार्टी शुरुआत से ही नंदीग्राम में जीत को लेकर अपना भरोसा जता रही थी। उनके मुताबिक, चुनाव परिणाम भाजपा के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाते हैं। हालांकि, उनके इस दावे को चुनावी नतीजों और आधिकारिक आंकड़ों के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है। रेजीनगर में जनता के फैसले पर क्या बोलीं केया घोष? रेजीनगर के चुनावी परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए केया घोष ने कहा कि वहां के मतदाताओं ने उन लोगों को जवाब दिया है, जो उनके अनुसार तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता को अब यह समझ में आ रहा है कि सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ किस तरह मिलना चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी किसी व्यक्ति के नाम या धर्म के आधार पर सरकारी योजनाओं का आवंटन नहीं करती। उनके मुताबिक, भाजपा का जोर सभी लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने पर है। उन्होंने इसी आधार पर रेजीनगर में पार्टी के पक्ष में मतदान होने का दावा किया। विकास और सरकारी योजनाओं पर सियासत केया घोष के बयान में सरकारी योजनाओं का लाभ, समानता और तुष्टिकरण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन विषयों पर भाजपा और उसके विरोधी दलों के बीच पहले भी मतभेद देखने को मिलते रहे हैं। चुनावी राजनीति में जहां भाजपा विकास और योजनाओं के लाभ को अपना प्रमुख मुद्दा बताती है, वहीं विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से जनता के समर्थन का दावा करते हैं। ऐसे में उपचुनाव के नतीजों को लेकर नेताओं की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकती हैं। फिलहाल, केया घोष का बयान भाजपा के चुनावी रुख को सामने रखता है। हालांकि, रेजीनगर के मतदाताओं ने किन मुद्दों को प्राथमिकता दी और नतीजों के पीछे क्या प्रमुख कारण रहे, इसका आकलन आधिकारिक चुनावी आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर ही किया जा सकता है।