पटना: बिहार इस समय भीषण बाढ़ की स्थिति से जूझ रहा है। कई इलाकों में लोगों के घरों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में परिवार राहत एवं पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कथित तौर पर रिश्वत मांगने का मामला चर्चा में है। आरोप है कि कुछ जरूरतमंद लाभुकों से आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर 20 हजार रुपये तक की रकम मांगी जा रही है।
बाढ़ जैसी आपदा के बीच सामने आए इन आरोपों ने सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान की पुष्टि संबंधित प्रशासनिक स्तर से होना बाकी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। बिहार में इस योजना के तहत बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से अगस्त 2026 में बिहार के लिए 11.19 लाख पक्के घरों को मंजूरी और ₹13,427 करोड़ के आवंटन की जानकारी दी गई थी।
बाढ़ के मौजूदा हालात में आवास का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा है कि बाढ़ में जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
वहीं, बिहार सरकार ने हाल ही में बाढ़ प्रभावित 8.27 लाख से अधिक परिवारों को डीबीटी के माध्यम से 7-7 हजार रुपये की राहत राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 579.23 करोड़ रुपये की राहत राशि सीधे लाभुकों के बैंक खातों में भेजी गई है।
ऐसे में यदि आवास योजना के नाम पर किसी लाभुक से पैसे मांगने की शिकायत सही पाई जाती है, तो यह सरकारी योजना के उद्देश्य और पारदर्शी लाभ वितरण की व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल होगा। जरूरतमंद परिवारों की मांग है कि ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
नोट: ₹20 हजार मांगने का आरोप उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोप के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होने तक इसे प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।