पटना: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के नेतृत्व में मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने, अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार करने तथा मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मानव संसाधन मजबूत करना एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता के तौर पर सामने आया है। हाल ही में राज्य सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर कार्यरत प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में संशोधन किया है। सरकार का कहना है कि इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुजफ्फरपुर में एसकेएमसीएच में 30 बेड की स्पेशल क्रिटिकल केयर यूनिट और होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में 12 बेड की आईसीयू सुविधा शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे उत्तर बिहार में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी योजनाओं पर चर्चा हुई है। पेशेंट रेफरल सिस्टम, स्मार्ट एंबुलेंस, टेलीमेडिसिन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के जरिए मरीजों को जरूरत के मुताबिक समय पर उचित अस्पताल और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
वहीं, नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। इसमें संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों, मानव संसाधन और जरूरी सुविधाओं की जांच के साथ योग्य शिक्षकों की नियुक्ति पर जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल शिक्षा, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, अस्पतालों के आधुनिकीकरण और तकनीक आधारित सेवाओं को एक साथ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। इन पहलों का उद्देश्य मरीजों को राज्य के भीतर ही बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।