नई दिल्ली: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के प्रस्तावित मेरठ दौरे से जुड़ा ₹1.53 करोड़ का टेंडर सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी नेताओं ने इस खर्च को लेकर सवाल उठाते हुए इसे सरकारी धन के इस्तेमाल से जोड़कर निशाना साधा है। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने की तैयारी ऐसे समय में की जा रही थी, जब देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से बहस चल रही है।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में अलग तस्वीर पेश की गई है। ECI का कहना है कि जिस टेंडर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह कार्यक्रम से कई सप्ताह पहले ही रद्द किया जा चुका था। आयोग के अनुसार, इसलिए इसे मौजूदा समय में होने वाले किसी खर्च या प्रस्तावित कार्यक्रम से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
टेंडर को लेकर सामने आई जानकारी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा बढ़ गई है। विपक्ष ने खर्च की प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों पर स्पष्टीकरण की मांग की है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से टेंडर रद्द होने की बात कही गई है। ऐसे में अब विवाद का केंद्र यह बन गया है कि टेंडर कब जारी हुआ, किन परिस्थितियों में जारी किया गया और उसे कब रद्द किया गया।
इसी बीच राजधानी दिल्ली में कांग्रेस के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की तैयारी के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रदर्शन को देखते हुए प्रमुख मार्गों और संवेदनशील इलाकों में आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।
कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन के कारण दिल्ली में यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां भीड़ की स्थिति को देखते हुए आवश्यक इंतजाम कर रही हैं।
मेरठ के टेंडर विवाद और दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस प्रदर्शन ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, टेंडर को लेकर आयोग का स्पष्ट कहना है कि संबंधित प्रक्रिया पहले ही रद्द की जा चुकी थी।