चिराग पासवान इंडिया राइस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इंडिया राइस कॉन्फ्रेंस में चावल उद्योग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत कृषि क्षेत्र में चावल उत्पादन, खपत और निर्यात के मामले में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुल चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। ऐसे में चावल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास के लिए बेहद अहम है।
वैश्विक चावल कारोबार में भारत की मजबूत स्थिति
चिराग पासवान ने कहा कि चावल भारत की कृषि व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश न केवल बड़ी मात्रा में चावल का उत्पादन और उपभोग करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी अहम भूमिका है। वैश्विक चावल कारोबार में भारत की मजबूत उपस्थिति देश के कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को और आगे बढ़ाने के लिए किसानों, उद्योग जगत, शोधकर्ताओं, नवाचार करने वालों और कृषि मशीनरी से जुड़े लोगों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
किसानों और उद्योग को मिलेगा नई तकनीक का लाभ
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इंडिया राइस कॉन्फ्रेंस जैसे मंच चावल उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को एक साथ लाने का अवसर प्रदान करते हैं। यहां विशेषज्ञ अपने अनुभव, विचार और नई तकनीकों को साझा कर सकते हैं। इससे चावल उत्पादन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और उद्योग की चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद मिल सकती है।
मुख्य बिंदु:
- भारत वैश्विक चावल व्यापार में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।
- किसानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
- आधुनिक तकनीक और नवाचार से चावल उद्योग को मजबूत बनाने की जरूरत है।
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं।
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मिलेगा बढ़ावा
चिराग पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर जोर दिया है। चावल उद्योग में आधुनिक मशीनरी, नई तकनीक और बेहतर प्रसंस्करण व्यवस्था को बढ़ावा देकर इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
उन्होंने टिकाऊ कृषि और उत्पादों की ट्रेसबिलिटी यानी उत्पादन से लेकर बाजार तक उनकी जानकारी का पता लगाने की व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बताया। इससे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और बाजार में भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
2047 तक विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कृषि, चावल उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसके लिए किसानों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने, तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने और उद्योग को नई दिशा देने की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, इंडिया राइस कॉन्फ्रेंस के जरिए चावल उद्योग को मजबूत बनाने, किसानों की मदद करने और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को और बेहतर करने पर जोर दिया गया। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों से कृषि क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।