फरक्का जल संधि पर JDU का बड़ा सवाल, बिहार के हितों को लेकर नीतीश कुमार ने शुरू की पहल

पटना: बिहार के जल संसाधनों और फरक्का जल संधि के प्रभावों को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने एक बार फिर आवाज उठाई है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को पटना स्थित पार्टी प्रदेश कार्यालय के कर्पूरी सभागार में ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इस दौरान पार्टी नेताओं ने फरक्का बैराज और जल संधि के कारण बिहार में बाढ़, सिंचाई, पेयजल और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को प्रमुखता से उठाया। पार्टी का कहना है कि संधि के नवीनीकरण के समय बिहार की मौजूदा जरूरतों के साथ भविष्य की जल आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

2050 तक की जरूरतों को ध्यान में रखने की मांग

JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि फरक्का जल संधि के निर्धारण के दौरान बिहार के हितों की अनदेखी हुई। उन्होंने दावा किया कि शुष्क मौसम में गंगा में पानी का प्रवाह कम होने के बावजूद बांग्लादेश के लिए निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ने का प्रावधान बिहार के जल संसाधनों पर दबाव डालता है।

उन्होंने कहा कि बिहार में खेती, पेयजल, उद्योगों और रोजगार की जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में फरक्का जल संधि के नवीनीकरण में वर्ष 2050 तक बिहार की जल जरूरतों का आकलन किया जाना चाहिए।

बाढ़ और सूखे की दोहरी चुनौती का मुद्दा

JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि बिहार पिछले तीन दशकों से फरक्का बैराज और जल संधि के प्रभावों का खामियाजा भुगत रहा है। उनके अनुसार, बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने और नदी तल ऊंचा होने से बाढ़ की समस्या बढ़ने का दावा किया जाता है। वहीं, शुष्क मौसम में पानी की उपलब्धता का मुद्दा भी राज्य के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि बिहार के जल अधिकारों से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना जरूरी है। पार्टी नेताओं ने इस विषय पर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

गंगा किनारे के 12 जिलों में चलेगा अभियान

पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर जनसंवाद अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से की गई थी। इसके तहत बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में कार्यक्रम निर्धारित हैं। अभियान का समापन कटिहार में होगा।

कार्यक्रम में फरक्का बैराज और जल संधि के संभावित प्रभावों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई तथा लोगों को जागरूक करने के लिए पर्चे वितरित किए गए।

JDU नेताओं ने मांग की कि बिहार के किसानों, आम लोगों और उद्योगों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए जल बंटवारे पर विचार किया जाए, ताकि राज्य को भविष्य में पानी की कमी और बाढ़ जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सके।

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