FCRA संशोधन बिल 2026: P. विल्सन ने JPC चेयरमैन को लिखा पत्र, आपत्तियां भी मांगने की अपील

नई दिल्ली: विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026 को लेकर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सदस्य और DMK सांसद P. विल्सन ने समिति के चेयरमैन संजय जायसवाल को पत्र लिखा है। उन्होंने बिल पर लोगों और संबंधित पक्षों से राय लेने की प्रक्रिया को और व्यापक बनाने की मांग की है।

P. विल्सन ने पत्र में उस प्रेस विज्ञप्ति का उल्लेख किया है, जिसके जरिए बिल को लेकर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक प्रतिक्रिया मांगते समय केवल सुझाव ही नहीं, बल्कि प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्तियां भी स्पष्ट रूप से आमंत्रित की जानी चाहिए।

उन्होंने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए तय समयसीमा बढ़ाने की भी मांग की है। पत्र के मुताबिक, संबंधित पक्षों को अपनी राय रखने के लिए कम से कम चार सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए, ताकि वे प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन कर विस्तृत प्रतिक्रिया दे सकें।

इसके अलावा P. विल्सन ने इस पूरी प्रक्रिया का व्यापक प्रचार-प्रसार किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि अधिक से अधिक लोगों और संबंधित संगठनों तक सूचना पहुंचना जरूरी है, ताकि वे समय रहते समिति के सामने अपनी राय और आपत्तियां दर्ज करा सकें।

FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act विदेशी स्रोतों से मिलने वाले योगदान के नियमन से संबंधित कानून है। ऐसे में इसके प्रावधानों में प्रस्तावित बदलावों पर संसदीय समिति द्वारा अलग-अलग पक्षों से प्रतिक्रिया लेना विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है।

अब देखना होगा कि JPC की ओर से P. विल्सन की इन मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है। फिलहाल उनके पत्र में तीन प्रमुख मांगें सामने आई हैं—सुझावों के साथ आपत्तियां भी आमंत्रित करना, प्रतिक्रिया की समयसीमा कम से कम चार सप्ताह करना और प्रक्रिया का व्यापक प्रचार करना।

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