मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश में एक नए आंदोलन की तैयारी की जा रही है। CJP की ओर से 2 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन आयोजित करने की तारीख तय किए जाने की बात सामने आई है। इस बार आंदोलन का केंद्र केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहने वाला है। आयोजकों के मुताबिक, देशव्यापी अभियान की शुरुआत मुंबई से करने की तैयारी है और अभिजीत दीपके इसके नेतृत्व में आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
आयोजकों का कहना है कि यह अभियान लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों को जनता के बीच ले जाने के उद्देश्य से चलाया जाएगा। अभिजीत दीपके ने लोगों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस मुहिम से जुड़ने की अपील की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
इस आंदोलन को देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने की योजना बताई जा रही है। आयोजकों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य विभिन्न स्थानों पर लोगों से संवाद करना और चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा को आगे बढ़ाना है। हालांकि, इस प्रस्तावित आंदोलन का स्वरूप, विभिन्न शहरों में कार्यक्रम और स्थानीय स्तर पर इसकी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी आयोजकों की ओर से सामने आना अभी बाकी है।
अभिजीत दीपके ने इस अभियान की तुलना महात्मा गांधी के आंदोलनों से करते हुए लोगों का ध्यान देशव्यापी जनभागीदारी की ओर आकर्षित किया है। दांडी मार्च ऐतिहासिक रूप से अहम जनआंदोलन रहा था। अब प्रस्तावित अभियान के जरिए अलग-अलग शहरों में लोगों को जोड़ने की बात कही जा रही है।
2 अक्टूबर को होने वाले इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी नजरें टिकी हैं। CJP की ओर से उठाई जा रही मांगों और चुनाव आयोग से जुड़े विवादों के बीच यह आंदोलन सार्वजनिक बहस का एक और मंच बन सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इस अभियान को कितना समर्थन मिलता है और आयोजक इसे किस स्वरूप में आगे बढ़ाते हैं।