गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट्स में शामिल गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर बारिश के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया और सामने आई तस्वीरों में एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में सड़क की सतह क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर गड्ढे नजर आने के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाली अहम परियोजना के तौर पर विकसित किया गया है। इस एक्सप्रेसवे से गोरखपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में आवागमन को आसान बनाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की उम्मीद जताई गई थी। ऐसे में सड़क के कुछ हिस्सों में बारिश के बाद नुकसान की तस्वीरें सामने आने से परियोजना की मजबूती और निर्माण मानकों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विपक्षी नेताओं और सरकार के आलोचकों ने सड़क की स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि बड़े पैमाने पर खर्च होने वाली विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी नहीं की जाती। कुछ लोगों ने सड़क की खराब स्थिति को कथित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से भी जोड़कर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
जानकारों के अनुसार, किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे के निर्माण में सड़क की ऊपरी परत, जल निकासी व्यवस्था, इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण तकनीक की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है। बारिश के बाद सड़क पर नुकसान होने की स्थिति में तकनीकी जांच से ही यह स्पष्ट किया जा सकता है कि समस्या का कारण निर्माण संबंधी कमी है, जल निकासी की समस्या है या किसी अन्य वजह से सड़क प्रभावित हुई है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की मांग है कि प्रभावित हिस्सों का जल्द निरीक्षण कराया जाए और जरूरत पड़ने पर तत्काल मरम्मत की जाए। साथ ही सड़क की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।
अब निगाहें संबंधित विभाग की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर हैं। यदि जांच में निर्माण मानकों में किसी तरह की कमी सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी या अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। फिलहाल, बारिश के बाद सामने आई सड़क की तस्वीरों ने उत्तर प्रदेश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है।