भारत में महंगा हुआ iPhone, नए मॉडल के साथ पुराने फोन की कीमतों में भी बढ़ोतरी

नई दिल्ली। भारत में iPhone खरीदने वाले ग्राहकों के लिए कीमतों को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। Apple ने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की लॉन्चिंग के बाद कुछ पुराने iPhone मॉडल्स की कीमतों में कटौती करने के बजाय उन्हें महंगा कर दिया है। इससे भारतीय बाजार में iPhone खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों का बजट बढ़ सकता है। Apple के भारतीय ऑनलाइन स्टोर पर अब iPhone 17 की शुरुआती कीमत 99,900 रुपये है, जबकि इससे पहले इसका शुरुआती मूल्य 82,900 रुपये था। यानी बेस मॉडल की कीमत में 17,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वहीं iPhone 16 अब 89,900 रुपये और iPhone 17e 79,900 रुपये से उपलब्ध है। iPhone Air की शुरुआती कीमत 1,49,900 रुपये रखी गई है। नए Pro मॉडल्स की कीमत में भी बड़ा अंतर देखने को मिला है। iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत भारत में 1,64,900 रुपये और iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपये है। इसके अलावा Apple ने पहली बार अपने फोल्डेबल iPhone Duo को भी भारतीय बाजार में पेश किया है, जिसकी शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये बताई गई है। क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? बाजार रिपोर्टों के मुताबिक, स्मार्टफोन की लागत पर मेमोरी चिप्स और अन्य प्रमुख कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतों का असर पड़ रहा है। खास तौर पर AI डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की कीमतों में दबाव बढ़ा है। इसका प्रभाव इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों की लागत और आगे चलकर ग्राहकों को मिलने वाली कीमतों पर पड़ सकता है। iPhone की कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब आमतौर पर नया मॉडल आने के बाद पुराने मॉडल सस्ते हो जाते हैं। इस बार भारत में इसके उलट तस्वीर देखने को मिली है। ऐसे में पुराने iPhone को कम कीमत पर खरीदने की उम्मीद कर रहे ग्राहकों को अपनी खरीदारी का बजट दोबारा देखना पड़ सकता है। नोट: कीमतें Apple के भारतीय ऑनलाइन स्टोर पर उपलब्ध मौजूदा सूची के आधार पर हैं और ऑफलाइन रिटेलर, बैंक ऑफर तथा एक्सचेंज डिस्काउंट के कारण वास्तविक खरीद कीमत अलग हो सकती है।

कोचस की चार पंचायतों को कोचस थाना से जोड़ने की पहल तेज, विधायक बशिष्ठ सिंह ने एसपी को सौंपा पत्र

रोहतास। कोचस प्रखंड की चार पंचायतों के कुछ गांवों को दिनारा थाना क्षेत्र से हटाकर कोचस थाना क्षेत्र में शामिल कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल तेज हो गई है। करगहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक बशिष्ठ सिंह ने इस संबंध में रोहतास के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। शनिवार को सासाराम स्थित एसपी के कैंप कार्यालय में विधायक बशिष्ठ सिंह ने पुलिस अधीक्षक मिस्टर राज से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कोचस प्रखंड की पंचायतों नौवां, नरवर, चिताव और कंजर के उन शेष गांवों को दिनारा थाना क्षेत्र से हटाकर कोचस थाना में शामिल करने को लेकर एक पत्र सौंपा। विधायक के अनुसार, इन पंचायतों का प्रखंड एवं अंचल मुख्यालय कोचस में ही स्थित है। इसके बावजूद इन पंचायतों के कुछ गांव अभी दिनारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। इससे ग्रामीणों को पुलिस से जुड़े कार्यों के लिए दिनारा जाना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त दूरी और समय की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि संबंधित गांवों से कोचस थाना की दूरी लगभग 2 से 3 किलोमीटर के आसपास है, जबकि दिनारा थाना अपेक्षाकृत दूर पड़ता है। ऐसे में प्रशासनिक सुविधा और आम लोगों की सहूलियत को देखते हुए इन गांवों को कोचस थाना क्षेत्र में शामिल करना ज्यादा व्यावहारिक होगा। विधायक ने कहा कि थाना क्षेत्र के पुनर्गठन से ग्रामीणों को शिकायत, सत्यापन, पुलिस सहायता और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे स्थानीय स्तर पर पुलिस व्यवस्था तक लोगों की पहुंच भी आसान हो सकती है। बशिष्ठ सिंह ने बताया कि उन्होंने इस विषय को बिहार विधानसभा में भी उठाया था। उनके मुताबिक, उस समय तत्कालीन गृह मंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से इस दिशा में जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। इस संबंध में विधानसभा से संबंधित पत्र भी प्राप्त हुआ है। अब विधायक ने उसी पत्र के आधार पर रोहतास एसपी से आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर सक्षम स्तर पर भेजने का अनुरोध किया है। प्रस्ताव आगे बढ़ने के बाद थाना क्षेत्र में बदलाव की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। इससे कोचस प्रखंड के संबंधित गांवों के लोगों को पुलिस सेवाओं का लाभ अधिक आसानी से मिल सकेगा।

भारत में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी बड़ी उपलब्धि: उपेंद्र कुशवाहा

रोहतास। राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भारत में आयोजित हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन को देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। शनिवार को सासाराम अतिथिगृह में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी भारत के लिए गौरव की बात है। सम्मेलन में दुनिया के प्रमुख देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों की भागीदारी से भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का पता चलता है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच की मेजबानी भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी प्राथमिकताओं और विचारों को मजबूती से रखने का अवसर प्रदान करती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न देशों के बीच संवाद, सहयोग और आपसी संबंधों को बेहतर बनाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारत की भूमिका अंतरराष्ट्रीय मामलों में लगातार प्रभावशाली होती जा रही है। दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों के प्रतिनिधियों का भारत आना इस बात का संकेत है कि वैश्विक समुदाय भारत को एक अहम साझेदार के रूप में देख रहा है। कुशवाहा ने सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, भारत की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व से देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं है, बल्कि यह भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव और वैश्विक सहयोग में उसकी भूमिका को प्रदर्शित करने का माध्यम भी है। राज्यसभा सांसद ने कहा कि जब दुनिया के कई प्रभावशाली देशों के नेता और प्रतिनिधि भारत पहुंचते हैं, तो यह देश की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। इससे भारत को आर्थिक, कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर नए सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि BRICS सम्मेलन के जरिए भारत और अन्य सदस्य देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिलेगी। साथ ही, वैश्विक चुनौतियों पर साझा विचार-विमर्श से सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने दोहराया कि भारत द्वारा इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इसमें भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका देश के लिए सकारात्मक संदेश देने वाली है।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद सड़क की गुणवत्ता पर उठे सवाल, जगह-जगह दिखे गड्ढे

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट्स में शामिल गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर बारिश के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया और सामने आई तस्वीरों में एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में सड़क की सतह क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर गड्ढे नजर आने के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाली अहम परियोजना के तौर पर विकसित किया गया है। इस एक्सप्रेसवे से गोरखपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में आवागमन को आसान बनाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की उम्मीद जताई गई थी। ऐसे में सड़क के कुछ हिस्सों में बारिश के बाद नुकसान की तस्वीरें सामने आने से परियोजना की मजबूती और निर्माण मानकों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। विपक्षी नेताओं और सरकार के आलोचकों ने सड़क की स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि बड़े पैमाने पर खर्च होने वाली विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी नहीं की जाती। कुछ लोगों ने सड़क की खराब स्थिति को कथित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से भी जोड़कर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। जानकारों के अनुसार, किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे के निर्माण में सड़क की ऊपरी परत, जल निकासी व्यवस्था, इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण तकनीक की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है। बारिश के बाद सड़क पर नुकसान होने की स्थिति में तकनीकी जांच से ही यह स्पष्ट किया जा सकता है कि समस्या का कारण निर्माण संबंधी कमी है, जल निकासी की समस्या है या किसी अन्य वजह से सड़क प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की मांग है कि प्रभावित हिस्सों का जल्द निरीक्षण कराया जाए और जरूरत पड़ने पर तत्काल मरम्मत की जाए। साथ ही सड़क की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है। अब निगाहें संबंधित विभाग की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर हैं। यदि जांच में निर्माण मानकों में किसी तरह की कमी सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी या अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। फिलहाल, बारिश के बाद सामने आई सड़क की तस्वीरों ने उत्तर प्रदेश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है।

बिहार में रोजगार को लेकर बड़ा लक्ष्य, पांच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य

पटना: बिहार में युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर बढ़ाने को लेकर सरकार की ओर से बड़े स्तर पर प्रयास किए जाने की बात कही गई है। राज्य में रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए आने वाले वर्षों के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार के अनुसार, युवाओं को सरकारी नौकरी के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में तय किए गए 20 लाख नौकरी और रोजगार के लक्ष्य को पूरा करने का दावा किया गया है। इसके बाद अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में अगले पांच वर्षों के दौरान करीब 1 करोड़ युवा-युवतियों को नौकरी और रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के युवाओं को उनके गृह राज्य में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता को कम करना बताया गया है। सरकार का फोकस केवल सरकारी नियुक्तियों तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि निजी क्षेत्र, उद्योग, व्यवसाय, कौशल विकास और स्वरोजगार के माध्यम से भी युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। रोजगार के इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभिन्न विभागों के स्तर पर योजनाओं और कार्यक्रमों को गति देने की आवश्यकता होगी। खास तौर पर युवाओं को बाजार की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण देने, कौशल विकास को बढ़ावा देने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जा सकता है। सरकार का मानना है कि रोजगार के नए अवसरों से बिहार के युवाओं को अपने भविष्य को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है। अब सबसे बड़ी चुनौती इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने के लक्ष्य को किस तरह चरणबद्ध तरीके से पूरा करती है।

आकाश आनंद के बाद ईशान आनंद पर भी मायावती का रुख साफ, परिवार से ज्यादा पार्टी को दी प्राथमिकता

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) में इन दिनों संगठनात्मक बदलाव और परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पार्टी सुप्रीमो मायावती के हालिया फैसलों और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनके परिवार के सदस्यों की भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर चल रही अटकलों को काफी हद तक विराम मिलता नजर आ रहा है। कुछ दिन पहले मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह अलग करने का ऐलान किया था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या अब उनके छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसी बीच ईशान आनंद को संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जाने की खबरों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी थी। बताया गया कि ईशान आनंद को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर कई राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। करीब 15 राज्यों में संगठन की स्थिति और पार्टी गतिविधियों पर नजर रखने की भूमिका मिलने के बाद यह कयास लगने लगे कि मायावती उन्हें भविष्य में पार्टी में आगे बढ़ा सकती हैं। हालांकि, मायावती के एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट ने इन अटकलों को नया मोड़ दे दिया है। मायावती ने परिवार और पार्टी के बीच प्राथमिकता को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि संगठन और बहुजन आंदोलन के हित सबसे ऊपर हैं। उनके पोस्ट में उनके भाई और BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया गया। मायावती ने स्पष्ट किया कि आनंद कुमार को व्यक्तिगत या पारिवारिक स्तर पर किसी मदद की आवश्यकता होने पर वह अपनी बेटी दीपिका आनंद से सहायता ले सकते हैं। इस बयान को पार्टी में परिवार के सदस्यों की राजनीतिक भूमिका को सीमित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। दरअसल, आकाश आनंद को पार्टी से अलग करने के दौरान भी मायावती ने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों को संगठन से ऊपर रखने के खिलाफ सख्त संदेश दिया था। अब आनंद कुमार को लेकर दिए गए ताजा बयान से यह संकेत मिल रहा है कि BSP में भविष्य के फैसलों का आधार परिवार के बजाय संगठन और पार्टी की राजनीतिक प्राथमिकताएं होंगी। आकाश आनंद के बाद ईशान आनंद को लेकर उठे सवालों के बीच मायावती का यह रुख इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में BSP के संगठन में आने वाले दिनों में किसी बड़े बदलाव की संभावना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। अब देखना होगा कि मायावती आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन में किस तरह के बदलाव करती हैं और ईशान आनंद की भूमिका भविष्य में किस रूप में सामने आती है।

ब्रिक्स समिट को लेकर केशव प्रसाद मौर्य का विपक्ष पर हमला, बोले- देश की बात पर नहीं होना चाहिए राजनीतिक बंटवारा

लखनऊ। ब्रिक्स समिट को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी दूसरे देश का प्रतिनिधिमंडल भारत आता है तो वह देश का मेहमान होता है और उसके स्वागत की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की होती है। ऐसे अवसरों पर राजनीतिक दलों के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष का अंतर नहीं होना चाहिए। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल के भारत आने का विषय केवल किसी एक राजनीतिक दल या सरकार तक सीमित नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों पर सभी पक्षों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा विपक्ष सरकार का विरोध करने में इतना व्यस्त हो गया है कि कई बार ऐसे मुद्दों पर भी बयान सामने आ जाते हैं, जहां राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मंचों से जुड़े कार्यक्रमों में भारत की छवि और राष्ट्रीय हित को सबसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों के स्वागत को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। मेहमानों का सम्मान भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। ऐसे में किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल के स्वागत को लेकर पक्ष और विपक्ष के आधार पर विभाजन उचित नहीं है। ब्रिक्स समूह वैश्विक स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इसके माध्यम से सदस्य देश आर्थिक सहयोग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। ऐसे में ब्रिक्स से जुड़े कार्यक्रमों को भारत के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। केशव प्रसाद मौर्य के बयान के बाद एक बार फिर देशहित और राजनीतिक विरोध के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो सकती है। भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय हित से जुड़े विषयों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश की एकजुटता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

लखनऊ: पंचायत सहायकों के आंदोलन में पहुंचे चंद्रशेखर आजाद, मांगों को लेकर दिया समर्थन

लखनऊ के ईको गार्डन में पिछले छह दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पंचायत सहायकों का धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। पंचायत सहायक दिन-रात प्रदर्शन करते हुए सरकार से अपनी समस्याओं के समाधान और मांगों पर सकारात्मक निर्णय की मांग कर रहे हैं। शनिवार को इस आंदोलन को उस समय राजनीतिक समर्थन मिला, जब नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। चंद्रशेखर आजाद ने ईको गार्डन पहुंचकर आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों से मुलाकात की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और मांगों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान पंचायत सहायकों ने अपनी परेशानियों और लंबे समय से लंबित मांगों को सांसद के सामने रखा। प्रदर्शनकारियों की बात सुनने के बाद चंद्रशेखर आजाद ने उनके आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने पंचायत सहायकों की समस्याओं को गंभीरता से उठाने की बात कही और आंदोलन में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। पंचायत सहायकों का कहना है कि वे ग्रामीण स्तर पर सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनकी कई मांगों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसी को लेकर बड़ी संख्या में पंचायत सहायक ईको गार्डन में जुटे हैं। छह दिनों से जारी प्रदर्शन के कारण ईको गार्डन में आंदोलनकारियों की संख्या लगातार बनी हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस पहल की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, चंद्रशेखर आजाद के पहुंचने से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने के संकेत दे रहे हैं।

बलिया में पूर्व CRPF जवान की हत्या के बाद परिवार का आक्रोश, न्याय की मांग तेज

बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया में पूर्व CRPF जवान अमरीश बहादुर सिंह की हत्या के बाद उनके परिवार और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। घटना के बाद परिवार ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जल्द न्याय और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें काफी देर तक अपने घर में शवों के साथ रहने की स्थिति का सामना करना पड़ा, जिससे परिवार का गुस्सा और बढ़ गया। मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब मृतक की तीन बेटियों ने कथित तौर पर पेट्रोल की केन लेकर आत्मदाह की चेतावनी दी। परिवार के इस कदम से मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और प्रशासन के सामने स्थिति को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई। परिजनों का कहना है कि वे अपने पिता की हत्या के मामले में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई चाहते हैं। परिवार की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि हत्या के पीछे शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई में देरी हुई है। उनका कहना है कि जब एक पूर्व CRPF जवान के परिवार को ही न्याय के लिए इस तरह संघर्ष करना पड़े, तो आम लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी पुलिस की भूमिका और कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष और स्थानीय लोगों की ओर से भी सरकार से मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ सकती है। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्थिति का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही हत्या के कारणों और इसमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल परिवार अपने परिजन की हत्या के मामले में न्याय की मांग पर अड़ा है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाने के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

मुजफ्फरपुर में 317 शातिर अपराधियों पर कसेगा कानूनी शिकंजा, स्पीडी ट्रायल की तैयारी तेज

मुजफ्फरपुर: जिले में गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस की ओर से करीब 317 शातिर अपराधियों को चिन्हित कर उनके मामलों में जल्द सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों को लंबित रहने से रोकना और आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। SSP कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर पुलिस अधिकारियों ने गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल आरोपियों का रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत अपराधियों की आपराधिक पृष्ठभूमि, दर्ज मामलों और संबंधित कानूनी कार्रवाई की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का फोकस ऐसे मामलों पर है, जिनमें आरोपी लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं या जिनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के स्तर पर मामलों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि गंभीर अपराधों से जुड़े मुकदमों में अनावश्यक देरी न हो। इसके लिए संबंधित मामलों में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि अपराधियों के खिलाफ प्रभावी और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई से आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही, पुलिस की इस कवायद से अपराधियों के बीच कानून का डर बढ़ाने और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। मुजफ्फरपुर पुलिस की ओर से तैयार की जा रही अपराधियों की सूची और मामलों की समीक्षा के बाद संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने गंभीर अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं। नोट: किसी आरोपी के खिलाफ आरोप साबित होना न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करता है। स्पीडी ट्रायल का उद्देश्य मामलों की सुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाना है।