भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर बना ग्लोबल प्रतिस्पर्धी, अश्विनी वैष्णव ने Semicon 2.0 को लेकर बताया प्लान

नई दिल्ली: भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को लेकर केंद्र सरकार का फोकस लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि देश में शुरू हुई सेमीकंडक्टर उत्पादन की प्रक्रिया अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि भारत में स्थापित पांचों सेमीकंडक्टर प्लांट में उत्पादन शुरू हो चुका है और यहां तैयार होने वाले उत्पाद गुणवत्ता और लागत, दोनों स्तरों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।

अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर अब तक की प्रगति देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका कहना है कि भारतीय कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से निकलने वाले उत्पाद निर्यात के लिहाज से भी प्रतिस्पर्धी हैं। इससे आने वाले समय में भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत जगह बनाने में मदद मिल सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को दो चरणों में समझाया। उन्होंने कहा कि Semicon 1.0 का मुख्य उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी आधार तैयार करना था। इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और जरूरी इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दिया गया।

अब सरकार Semicon 2.0 के जरिए इसी आधार को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य देश में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर क्षमता को और मजबूत करना तथा भारत को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

सेमीकंडक्टर आज मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कई आधुनिक तकनीकों का अहम हिस्सा है। ऐसे में घरेलू स्तर पर चिप निर्माण की क्षमता बढ़ने से भारत की तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि भारत अब केवल सेमीकंडक्टर निर्माण की नींव रखने के चरण से आगे बढ़कर उत्पादन, गुणवत्ता, लागत और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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