प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के बीच लंबे समय से संबंध चर्चा में रहे हैं। हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि BAPS और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अभिलेखों की पड़ताल करने पर पिछले 12 वर्षों के दौरान मोदी की BAPS प्रतिनिधियों से मुलाकात या संस्था के कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी के कम से कम 18 मामले सामने आए हैं।
BAPS स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़ी संस्था है, जिसका धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में मंदिर निर्माण का भी व्यापक नेटवर्क है। नरेंद्र मोदी का संस्था और इसके दिवंगत आध्यात्मिक प्रमुख प्रमुख स्वामी महाराज से जुड़ाव काफी पुराना बताया जाता है। मोदी ने खुद 2022 में अहमदाबाद के एक BAPS कार्यक्रम में अपने पुराने संबंधों का उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि उनकी प्रमुख स्वामी से पहली मुलाकात करीब 1981 में हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मोदी कई BAPS कार्यक्रमों में शामिल हुए और संस्था से जुड़े मंदिर निर्माण प्रोजेक्ट्स को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया। वर्ष 2018 में उन्होंने अबू धाबी में बनने वाले BAPS हिंदू मंदिर प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया था। इसके बाद फरवरी 2024 में उन्होंने अबू धाबी स्थित मंदिर का उद्घाटन किया। इस दौरान मोदी ने प्रमुख स्वामी महाराज के साथ अपने संबंधों को पिता-पुत्र जैसा बताया था।
BAPS की गतिविधियों को लेकर हाल के वर्षों में विदेशों में भी चर्चा हुई है। फ्रांस में BAPS से जुड़े एक कार्यक्रम को लेकर महिलाओं की मौजूदगी और उनकी आवाजाही से संबंधित विवाद सामने आया। इस घटनाक्रम के बाद संस्था और मोदी के बीच लंबे समय से सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाले संबंधों पर भी ध्यान गया।
हालांकि, केवल किसी धार्मिक या सामाजिक संस्था के कार्यक्रम में किसी राजनीतिक नेता की भागीदारी से उसके राजनीतिक संबंधों या निर्णयों के बारे में स्वतः कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिकॉर्ड मुख्य रूप से मुलाकातों, कार्यक्रमों और सार्वजनिक बयानों को दर्ज करते हैं।