जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है और इसी बीच भाजपा तथा कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार कई निकायों में बोर्ड गठन का समीकरण निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर निर्भर कर रहा है।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने भाजपा पर लगाए जा रहे खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज किया है। बैरवा ने कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो अपने संगठनात्मक संस्कार और नीतियों के आधार पर काम करती है। उनके मुताबिक नगर निकाय चुनाव में भाजपा को व्यापक समर्थन मिला है, जबकि कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिसके बाद विपक्ष की ओर से इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने निर्दलीय उम्मीदवारों के भाजपा के साथ आने को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार अपने राजनीतिक विचार और भविष्य को लेकर स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं। यदि कोई निर्वाचित निर्दलीय पार्षद भाजपा की विचारधारा और नीतियों में विश्वास व्यक्त करते हुए पार्टी के साथ आना चाहता है, तो भाजपा उसका स्वागत करेगी।
बैरवा ने कहा कि निर्दलीय विजेताओं का किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ना उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद का हिस्सा है। ऐसे में इसे खरीद-फरोख्त से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि भाजपा किसी भी निर्दलीय जनप्रतिनिधि पर दबाव नहीं बना रही है।
राजस्थान निकाय चुनाव के बाद कई स्थानों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल निर्दलीय पार्षदों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षद स्थानीय बोर्डों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
वहीं, कांग्रेस की ओर से निकाय चुनाव के बाद भाजपा पर धनबल और प्रभाव के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए हैं। भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है। इस तरह बोर्ड गठन से पहले राजस्थान की स्थानीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है।