SIR विवाद पर संबित पात्रा का पलटवार, बोले- चुनाव आयोग लोकतांत्रिक तरीके से कर रहा काम

नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों पर सियासी बहस तेज हो गई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से मतदाता सूची और SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

इसी मुद्दे पर बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से विपक्ष लगातार चुनावों में कमजोर प्रदर्शन करता आया है और इसी वजह से वह संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है।

संबित पात्रा ने चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि SIR को लेकर आयोग में लोकतांत्रिक तरीके से विचार-विमर्श हुआ और अंतिम फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। उनके मुताबिक, आयोग किसी तानाशाही व्यवस्था के तहत काम नहीं करता, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार निर्णय लेता है।

चुनाव आयोग ने भी बुधवार को स्पष्ट किया कि आयोग के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर राय या टिप्पणियां होना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में पूर्ण आयोग द्वारा लिए गए प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

संबित पात्रा ने पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि जिन 20 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक वोट काटे गए, उनमें 13 सीटों पर TMC, एक पर कांग्रेस और छह सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार विजयी रहे थे। हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटने और अपील की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से अलग दावे किए गए हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने नाम बहाली के लिए अपील की है।

SIR को लेकर जारी यह विवाद अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची की पारदर्शिता और आयोग के भीतर होने वाले निर्णयों पर केंद्रित हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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