बक्सर में सम्राट चौधरी का दौरा, विकास योजनाओं को मिली रफ्तार; जीविका दीदियों से किया संवाद

बक्सर: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को बक्सर जिले के चुरामनपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पंचायत सरकार भवन और जीविका भवन का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय स्तर पर संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली और योजनाओं के लाभार्थियों तथा जीविका दीदियों से सीधे संवाद किया। चुरामनपुर में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की ओर से लगाए गए स्टॉलों का भी जायजा लिया। इस दौरान सरकार की योजनाओं से लाभान्वित लोगों से बातचीत कर उनके अनुभव और समस्याओं की जानकारी ली गई। जीविका से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली पहलों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान बक्सर जिले के लिए करीब 92 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किए जाने की जानकारी सामने आई। इन योजनाओं को स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं, रोजगार और ग्रामीण विकास को गति देने से जोड़कर देखा जा
तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, बिहार और बंगाल में फिर चुनाव की मांग

पटना, 23 सितंबर 2026: राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने बुधवार को पटना स्थित अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों के अधिकार क्षेत्र को कम किया गया और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं। तेजस्वी यादव ने हालिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के भीतर भी कुछ निर्णयों और विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मामलों में आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में SIR के दौरान राष्ट्रीय जनता दल ने शुरुआत से ही मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए थे और इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया गया था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। तेजस्वी के मुताबिक, पहले इस प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका थी, लेकिन बाद में व्यवस्था में बदलाव किया गया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच उठ रहे सवालों का समाधान जरूरी है। तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और दोनों राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए संस्थाओं के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हर शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रेस वार्ता में राजद नेता शक्ति सिंह यादव और एजाज अहमद भी मौजूद रहे।
आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती बीमारियों के बीच आयुर्वेद की भूमिका अहम: मंत्री निशांत कुमार

पटना: राजधानी पटना के ज्ञान भवन में 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद के महत्व और बदलती जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी और खान-पान की बदलती आदतों का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, अनिद्रा और फैटी लिवर जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, अनियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खान-पान में असंतुलन जैसी आदतें लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। मंत्री ने कहा कि आयुर्वेद केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और शरीर को संतुलित रखने की भारतीय परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने पर आयुर्वेद में विशेष जोर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि भारत ने आयुर्वेद को देश की सीमाओं से बाहर भी पहचान दिलाने का काम किया है। आज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोग भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और उसके सिद्धांतों के प्रति रुचि दिखा रहे हैं। आयुर्वेद दिवस जैसे आयोजनों के माध्यम से इसके महत्व और संभावनाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्री निशांत कुमार ने बिहार की प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार का आयुर्वेद से पुराना और समृद्ध संबंध रहा है। राज्य में पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की लंबी विरासत रही है, जिसे आधुनिक दौर में नई तकनीक और शोध के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, स्वस्थ खान-पान अपनाने और बदलती जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ पारंपरिक ज्ञान और जीवनशैली आधारित स्वास्थ्य दृष्टिकोण को लेकर भी जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है।
ईरान युद्ध के बीच कूटनीति पर जोर, Gulf देशों की स्थिति पर गवदत बहगत ने जताई चिंता

ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र के कई देश भी इस तनाव के कारण आर्थिक और रणनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी में नेशनल सिक्योरिटी अफेयर्स के विशिष्ट प्रोफेसर गवदत बहगत ने अपनी राय रखी है। गवदत बहगत के मुताबिक, मौजूदा हालात में MEC एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे केवल एक विकल्प के तौर पर देखने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय संकट का समाधान किसी एक रास्ते पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि अलग-अलग संभावनाओं और कूटनीतिक प्रयासों को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों की स्थिति की ओर ध्यान दिलाया। बहगत के अनुसार, ईरान युद्ध की कीमत इन देशों को भी चुकानी पड़ रही है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है। ऐसे में युद्ध का दायरा बढ़ना पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। बहगत ने उम्मीद जताई कि अंततः कूटनीति को प्राथमिकता मिलेगी और बातचीत के जरिए तनाव कम करने का रास्ता निकलेगा। उनके बयान में इस बात पर जोर दिखाई देता है कि सैन्य टकराव के बजाय संवाद और राजनीतिक समाधान क्षेत्र में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच खाड़ी देशों के लिए क्षेत्रीय स्थिरता बेहद अहम है। ईरान से जुड़े किसी भी बड़े सैन्य टकराव का प्रभाव पड़ोसी देशों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक पहल और बातचीत की कोशिशों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गवदत बहगत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध को लेकर क्षेत्रीय परिस्थितियां लगातार चर्चा में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में कूटनीति प्रभावी होगी और तनाव को कम करने के लिए बातचीत का रास्ता आगे बढ़ेगा।
अयोध्या के विकास को लेकर ब्रजेश पाठक का सपा पर हमला, बोले- पिछली सरकार ने नहीं दिया ध्यान

संत कबीर नगर: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बुधवार को संत कबीर नगर में एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए अयोध्या के विकास को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में अयोध्या विकास के लिए तरसती रही, जबकि मौजूदा सरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शहर को नए स्वरूप में विकसित करने का काम कर रही है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा नेताओं को आंकड़ों के आधार पर यह बताना चाहिए कि उनकी सरकार के समय अयोध्या के विकास पर कितना खर्च किया गया था। उनके मुताबिक, वर्तमान सरकार अयोध्या को एक महत्वपूर्ण हेरिटेज सिटी के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि देश-दुनिया के लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा शहर है। डिप्टी सीएम ने इस दौरान विपक्षी दलों पर सनातन संस्कृति को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों का सनातन संस्कृति से कोई वास्तविक जुड़ाव नहीं है। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं और विपक्ष की ओर से ऐसे बयानों पर अलग-अलग मौकों पर अपनी प्रतिक्रिया दी जाती रही है। ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में INDIA गठबंधन के नेताओं पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब विपक्षी दल चुनाव हारते हैं तो वे निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं, जबकि चुनाव जीतने की स्थिति में वही संस्थाएं उन्हें ठीक लगती हैं। डिप्टी सीएम ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और राजनीतिक दलों को इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी बात तथ्यों के आधार पर रखनी चाहिए। संतकबीरनगर में ब्रजेश पाठक का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तर प्रदेश में विकास, अयोध्या के बदलते स्वरूप और आगामी राजनीतिक मुद्दों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है।
कालकाजी मंदिर के पास कथित गैंगरेप मामले पर किरण बेदी ने उठाए सवाल, बोलीं- अपराधियों में कानून का डर जरूरी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास सामने आए कथित गैंगरेप के मामले ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और अपराधियों के मन में कानून के डर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पुलिस की कार्रवाई के बीच पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी ने भी घटना को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ आरोपियों को गिरफ्तार करना ही पर्याप्त नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समझने की जरूरत है कि अपराध करने का साहस उन्हें कहां से मिलता है। किरण बेदी ने कहा कि जब भी ऐसे गंभीर अपराध के आरोपी पकड़े जाएं, उनसे यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने इतना दुस्साहस कैसे किया। उनके मुताबिक यह जानना जरूरी है कि क्या अपराधियों को इस बात का भरोसा था कि पुलिस मौके पर नहीं पहुंचेगी या कानून का उन्हें कोई डर नहीं है। पूर्व IPS अधिकारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज में कानून का भय और पुलिस की प्रभावी मौजूदगी दोनों जरूरी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोग बार-बार इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की हिम्मत क्यों करते हैं और उन्हें रोकने के लिए व्यवस्था में किस तरह के बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के मन में यह स्पष्ट संदेश होना चाहिए कि कानून से बच निकलना आसान नहीं है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई केवल तत्काल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जांच, अभियोजन और न्याय की पूरी प्रक्रिया प्रभावी तरीके से आगे बढ़नी चाहिए। किरण बेदी ने यह भी कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए प्रशासन, न्याय व्यवस्था और समाज को मिलकर काम करना होगा। खास तौर पर संवेदनशील इलाकों में पुलिस की निगरानी, त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। कालकाजी मंदिर के पास सामने आए इस कथित मामले ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। अब मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। वहीं, घटना को लेकर सामने आने वाले तथ्यों और जांच के आधिकारिक निष्कर्षों के आधार पर ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
पशुपालकों के लिए बड़ी पहल: गो-धन विकास ऋण योजना में ब्याज पर 100% सब्सिडी

पटना: बिहार में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पशुपालकों को बैंक से मिलने वाले ऋण के ब्याज पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। इसका सीधा फायदा लाभुकों को मिलेगा, क्योंकि उन्हें ऋण की अवधि के दौरान केवल मूलधन की राशि ही चुकानी होगी। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को रोजगार और आय का मजबूत जरिया बनाना है। इसके तहत लाभुक तीन उन्नत नस्ल की गाय या दो भैंस के माध्यम से दुग्ध उत्पादन शुरू कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ छोटे पशुपालकों की आमदनी में भी सुधार आएगा। खासकर ग्रामीण परिवारों के लिए यह योजना स्वरोजगार का एक अतिरिक्त अवसर उपलब्ध करा सकती है। मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना के लिए 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इतनी बड़ी वित्तीय मंजूरी के जरिए पशुपालन क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की योजना है। इसके साथ ही कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास के लिए आठ परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के तहत क्षेत्र में करीब 500 नई दुग्ध सहकारी समितियों के गठन और डेयरी से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जाएगा। परियोजनाओं में डेयरी केंद्र, मिल्क चिलिंग सेंटर और बल्क मिल्क कूलिंग यूनिट (BMCU) जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए सरकार की ओर से 126.07 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं से दूध के उत्पादन से लेकर उसके संग्रहण और सुरक्षित भंडारण तक की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। इससे पशुपालकों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था मिलने में मदद मिल सकती है। साथ ही डेयरी क्षेत्र में सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ने से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरकार की इन पहलों का फोकस पशुपालन और डेयरी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए पशुपालकों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने पर है।
SIR विवाद पर संबित पात्रा का पलटवार, बोले- चुनाव आयोग लोकतांत्रिक तरीके से कर रहा काम

नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों पर सियासी बहस तेज हो गई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से मतदाता सूची और SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इसी मुद्दे पर बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से विपक्ष लगातार चुनावों में कमजोर प्रदर्शन करता आया है और इसी वजह से वह संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है। संबित पात्रा ने चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि SIR को लेकर आयोग में लोकतांत्रिक तरीके से विचार-विमर्श हुआ और अंतिम फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। उनके मुताबिक, आयोग किसी तानाशाही व्यवस्था के तहत काम नहीं करता, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार निर्णय लेता है। चुनाव आयोग ने भी बुधवार को स्पष्ट किया कि आयोग के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर राय या टिप्पणियां होना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में पूर्ण आयोग द्वारा लिए गए प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। संबित पात्रा ने पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि जिन 20 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक वोट काटे गए, उनमें 13 सीटों पर TMC, एक पर कांग्रेस और छह सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार विजयी रहे थे। हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटने और अपील की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से अलग दावे किए गए हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने नाम बहाली के लिए अपील की है। SIR को लेकर जारी यह विवाद अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची की पारदर्शिता और आयोग के भीतर होने वाले निर्णयों पर केंद्रित हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
पतंजलि के घी और दवाओं पर सवालों के बीच बाबा रामदेव की सफाई, बोले- ‘न तो घी नकली है, न दवाएं’

नई दिल्ली: पतंजलि के उत्पादों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच योग गुरु बाबा रामदेव ने कंपनी के गाय के घी और दवाओं को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पतंजलि के उत्पादों को लेकर कई तरह की बातें बिना पूरी जानकारी के सोशल मीडिया पर साझा की जा रही हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि आज भी गाय का घी करीब 700 रुपये प्रति लीटर की कीमत के आसपास उपलब्ध कराने में सक्षम है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी अपने उत्पादों की गुणवत्ता और कीमत को लेकर लगातार काम कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर वीडियो बना रहे हैं और उसे आगे साझा कर रहे हैं। रामदेव ने कहा कि किसी भी उत्पाद को लेकर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके बारे में सही जानकारी और तथ्यों की जांच करना जरूरी है। बाबा रामदेव ने पतंजलि के गाय के घी और दवाओं को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी का घी नकली नहीं है और न ही उसकी दवाओं को फर्जी बताया जा सकता है। उन्होंने अपने बारे में भी सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके नाम और पहचान को लेकर भी गलत बातें फैलाने की कोशिश की जा रही है। रामदेव ने कहा कि पतंजलि लंबे समय से आयुर्वेदिक उत्पादों और भारतीय परंपरागत चिकित्सा से जुड़े सामान को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही है। उनके मुताबिक, कंपनी की कोशिश है कि लोगों को उचित कीमत पर उत्पाद उपलब्ध कराए जाएं। हालांकि, किसी भी खाद्य या औषधीय उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित नियामकीय जांच, लैब टेस्ट और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल दावों को सत्य मानने से पहले उपभोक्ताओं को आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है। बाबा रामदेव के बयान के बाद पतंजलि के उत्पादों को लेकर चल रही सोशल मीडिया बहस एक बार फिर चर्चा में है।
दरभंगा में 8 कट्ठा जमीन को लेकर विवाद, तोड़फोड़ और गोलीबारी; एक की हालत गंभीर

दरभंगा: बिहार में भूमि विवाद से जुड़े मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला दरभंगा जिले से सामने आया है, जहां करीब 8 कट्ठा जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर तोड़फोड़ और गोलीबारी की घटना हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। गोली लगने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विवादित जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से तनाव चल रहा था। इसी दौरान मामला अचानक बिगड़ गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। आरोप है कि विवाद के दौरान कुछ लोगों ने मौके पर तोड़फोड़ की और इसके बाद गोलीबारी भी हुई। गोली चलने से एक व्यक्ति घायल हो गया। घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घायल व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है। परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लगी है। भूमि विवाद से जुड़े मामलों में अक्सर जमीन के स्वामित्व, कब्जे या सीमांकन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद सामने आते हैं। दरभंगा की इस घटना में भी विवाद की वास्तविक वजह और गोलीबारी की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेकर मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गोलीबारी किस परिस्थिति में हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। घटना के बाद इलाके में किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने, इसके लिए पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और शिकायत के आधार पर की जाएगी। जमीन विवाद को लेकर हुई इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर भूमि संबंधी विवादों के हिंसक रूप लेने को लेकर चिंता बढ़ा दी है।