नई दिल्ली। टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में सोमवार, 21 सितंबर को एक बार फिर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में कई बड़े टाटा स्टॉक्स 2 फीसदी तक या उससे ज्यादा नीचे कारोबार करते नजर आए। यह गिरावट शुक्रवार के कमजोर प्रदर्शन के बाद आई है। बाजार में टाटा ग्रुप से जुड़े शेयरों पर नजर इसलिए भी बनी हुई है, क्योंकि समूह के शीर्ष स्तर पर कॉरपोरेट गवर्नेंस और नेतृत्व को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।
Tata Trusts और Tata Sons के बीच विवाद
शेयर बाजार में मौजूदा कमजोरी की सबसे बड़ी वजह Tata Sons और Tata Trusts के बीच बढ़ता मतभेद माना जा रहा है। विवाद Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल से जुड़ा है। 17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को एक और पांच साल का कार्यकाल देने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया था। इस फैसले का Tata Trusts की ओर से विरोध किया गया है। Trusts ने इस प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाते हुए अपने मतदान अधिकारों का मुद्दा उठाया है।
मामला अब कानूनी रास्ते की ओर बढ़ने की संभावना के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है। Tata Trusts की ओर से प्रस्ताव को चुनौती देने की बात सामने आने के बाद बाजार में यह आशंका बनी है कि समूह के शीर्ष स्तर पर विवाद आगे भी जारी रह सकता है।
किन शेयरों पर दिखा ज्यादा असर?
सोमवार के शुरुआती कारोबार में Tata Chemicals करीब 3 फीसदी तक कमजोर हुआ। इसके अलावा NELCO, Tata Power, Tata Investment और Tata Technologies में भी गिरावट दर्ज की गई। Tata Capital, Tata Motors PV, Tata Communications और TCS जैसे शेयरों पर भी शुरुआती दबाव देखा गया। हालांकि, सभी टाटा शेयरों में एक जैसी गिरावट नहीं रही और कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती भी दिखाई दी।
निवेशकों की चिंता क्या है?
टाटा ग्रुप के शेयरों को लंबे समय से मजबूत ब्रांड और कॉरपोरेट गवर्नेंस के कारण बाजार में खास महत्व मिलता रहा है। ऐसे में समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व और बोर्ड से जुड़ा विवाद निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह विवाद लंबे समय तक चलता है तो इसका असर निवेशकों की धारणा और कुछ टाटा कंपनियों के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है।
हालांकि, अलग-अलग टाटा कंपनियों के अपने प्रबंधन और कारोबारी संचालन हैं। इसलिए समूह स्तर के विवाद का असर हर कंपनी पर समान होना जरूरी नहीं है। फिलहाल बाजार की नजर Tata Sons-Tata Trusts विवाद से जुड़े अगले घटनाक्रम और नेतृत्व को लेकर स्पष्टता पर बनी हुई है।