एक महिला को कथित तौर पर हाईवे के बीच उतारना उबर के लिए बेहद महंगा साबित हुआ। महिला के वाहन से उतरने के बाद सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने उबर से करीब 380 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद कैब सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला ने उबर कैब के जरिए यात्रा की थी। यात्रा के दौरान किसी कारण से ड्राइवर और महिला के बीच विवाद या असहमति की स्थिति बनी। इसके बाद ड्राइवर ने महिला को हाईवे पर ही वाहन से उतार दिया। बताया गया कि महिला सड़क पर अकेली रह गई और इसी दौरान एक वाहन की चपेट में आने से उसकी जान चली गई।
घटना के बाद महिला के परिवार की ओर से कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। मामले में यह सवाल उठाया गया कि क्या ड्राइवर द्वारा यात्री को सुरक्षित स्थान के बजाय हाईवे पर उतारना उचित था और क्या कंपनी की ओर से ड्राइवर की जिम्मेदारी तय करने तथा यात्री सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया। इसके बाद उबर को महिला के परिवार को करीब 380 करोड़ रुपये की राशि देने का आदेश दिया गया। यह राशि मुआवजे के तौर पर निर्धारित की गई है।
इस घटना ने ऐप आधारित कैब सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस को फिर तेज कर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी यात्री को असुरक्षित स्थान पर उतारना गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है। खासकर हाईवे जैसे स्थानों पर, जहां तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
फिलहाल इस मामले में अदालत के आदेश को लेकर उबर की ओर से किसी संभावित अपील या आगे की कानूनी प्रक्रिया की जानकारी सामने आना बाकी है। घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि कैब कंपनियों को यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ड्राइवरों की जवाबदेही और आपातकालीन व्यवस्था को कितना मजबूत बनाना चाहिए।