लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और आम लोगों को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन (JJM) की संशोधित नीति 2026 को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कैबिनेट बैठक के संबंध में बताया कि संशोधित नीति में कुल 19 बिंदुओं को शामिल किया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य जल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना, पाइपलाइन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान करना है।
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के मुताबिक, नई नीति में जल जीवन मिशन से जुड़े विभिन्न हितधारकों की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है। इससे पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में शामिल संबंधित पक्षों के दायित्व तय करने में मदद मिलेगी। सरकार का जोर इस बात पर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था व्यवस्थित और प्रभावी बनी रहे।
पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने पर दंड का प्रावधान
संशोधित नीति में पाइपलाइन से जुड़ी चोरी और उसे नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों को भी ध्यान में रखा गया है। मंत्री ने बताया कि यदि पाइपलाइन की चोरी होती है या उसे क्षति पहुंचाई जाती है, तो संबंधित मामले में दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे। इसका उद्देश्य जल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखना और पानी की बर्बादी को रोकना है।
नियमित जल आपूर्ति के लिए नागरिक चार्टर
नई नीति की एक प्रमुख विशेषता जनहित गारंटी अधिनियम के तहत जल आपूर्ति से संबंधित नागरिक चार्टर की स्थापना है। इसके माध्यम से जल आपूर्ति सेवाओं के संबंध में नागरिकों के अधिकारों और व्यवस्था की जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट किया कि लोगों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही जल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए शिकायत निस्तारण तंत्र विकसित किए जाने की जानकारी भी दी गई।
प्राकृतिक आपदा के दौरान भी पानी उपलब्ध कराने पर जोर
मंत्री के बयान के अनुसार, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भी लोगों को जल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है। आपात परिस्थितियों में पेयजल की उपलब्धता लोगों की बुनियादी जरूरतों और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती है।
कुल मिलाकर, जल जीवन मिशन की संशोधित नीति 2026 में नियमित जल आपूर्ति, पाइपलाइन की सुरक्षा, जिम्मेदारियों का निर्धारण और शिकायतों के निस्तारण को प्रमुखता दी गई है। अब इन प्रावधानों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होगा, ताकि नागरिकों को समय पर और बेहतर जल आपूर्ति सेवाओं का लाभ मिल सके।