छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने की तैयारी, ओलंपिक संघ की बैठक में बनी रणनीति

रायपुर: छत्तीसगढ़ में खेलों को नई दिशा देने और प्रदेश के खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने को लेकर छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में खेल गतिविधियों को मजबूत करने, खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने और खेल प्रतिभाओं को आगे लाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक को लेकर जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में संघ के पदाधिकारियों की ओर से भी कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुझावों पर विचार करते हुए प्रदेश में खेलों के विकास की दिशा में आगे काम किया जाएगा। सीएम साय ने देश में खेलों को लेकर बदलते माहौल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल और खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका असर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी दिखाई दे रहा है। देश के खिलाड़ी अलग-अलग खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और भारत के खाते में लगातार अधिक पदक आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि इन खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण, बेहतर सुविधाएं और अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए पर्याप्त मंच मिले। राज्य सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। बैठक में खेलों के विस्तार के साथ-साथ प्रदेश में नई खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए बेहतर अवसर मिलें। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। खेलों के विकास को लेकर सरकार और छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के बीच समन्वय के साथ आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
ब्रिक्स में बनी बड़ी सहमति, भारत की कूटनीति ने आसान की मुश्किल राह

नई दिल्ली: ब्रिक्स देशों के बीच लंबे समय से चल रही कूटनीतिक बातचीत के बाद संयुक्त बयान पर सहमति बनना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, सदस्य देशों के बीच कई संवेदनशील और विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई और बातचीत का दौर देर रात से लेकर सुबह करीब चार बजे तक जारी रहा। अलग-अलग मुद्दों पर देशों के रुख में अंतर होने के बावजूद आखिरकार संयुक्त बयान के मसौदे पर सहमति बनाने में सफलता मिली। इस पूरी प्रक्रिया में भारत ने सदस्य देशों के बीच संवाद बनाए रखने और अलग-अलग विचारों के बीच साझा सहमति तलाशने पर जोर दिया। ब्रिक्स का विस्तार होने के बाद संगठन के भीतर अब पहले की तुलना में कहीं अधिक विविध राजनीतिक और रणनीतिक हित मौजूद हैं। ऐसे में सभी देशों को एक साझा मंच पर लाना आसान नहीं है। इस चुनौती को पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों ने और जटिल बना दिया है। ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ब्रिक्स के सदस्य हैं, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति और कई रणनीतिक मुद्दों पर इन देशों के बीच मतभेद रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच इन देशों के बीच किसी साझा बयान पर सहमति बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने बातचीत के दौरान मतभेदों को ब्रिक्स की सामूहिक प्रक्रिया पर हावी नहीं होने देने की कोशिश की। लगातार संवाद और सहमति निर्माण के प्रयासों के जरिए एक ऐसा रास्ता तैयार किया गया, जिस पर विभिन्न सदस्य देश साथ आ सके। संयुक्त बयान का जारी होना ब्रिक्स के भीतर आपसी संवाद और सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यह घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताओं वाले देशों के बीच बातचीत के जरिए साझा मुद्दों पर सहमति बनाई जा सकती है। भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वैश्विक मंच पर उसकी संवाद कायम करने और विभिन्न पक्षों के बीच सहमति बनाने की कूटनीतिक क्षमता का संकेत मिलता है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए स्पेशल पैकेज की मांग, तेजस्वी यादव ने सरकार पर उठाए सवाल

पटना, बिहार। बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बाढ़ प्रभावित लोगों की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ उनके लिए विशेष आर्थिक पैकेज की व्यवस्था की जानी चाहिए। तेजस्वी यादव के मुताबिक, बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। उन्होंने दावा किया कि वे लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं और वहां लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझ रहे हैं। RJD नेता ने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उनका कहना है कि सरकार को बाढ़ पीड़ितों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए राहत और पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी बिहार के साथ कथित तौर पर भेदभाव करने का आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने बिहार के वित्तीय हालात का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के पास सीमित संसाधन हैं। ऐसे में केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक सहायता मिलना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बाढ़ जैसी गंभीर आपदा से लोगों का जीवन और उनकी संपत्ति प्रभावित हो रही है, तो उनके लिए विशेष पैकेज क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को केवल तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि नुकसान की भरपाई और आगे की जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए भी सहायता की जरूरत है। किसानों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों को हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग भी उन्होंने उठाई। तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार को बयानबाजी के बजाय जमीन पर राहत कार्यों को प्रभावी बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जनता अब सरकार की नीतियों और उसके कामकाज को समझ रही है। हालांकि, बाढ़ राहत और विशेष पैकेज को लेकर सरकार की ओर से अलग-अलग स्तर पर किए जा रहे राहत कार्यों और आधिकारिक आंकड़ों की स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे में प्रभावित जिलों में वास्तविक स्थिति और सरकारी सहायता की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से मिलान करना महत्वपूर्ण होगा।
झांसी में AI से आपत्तिजनक तस्वीरें बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप, महिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

झांसी: रेलवे के एक अधिकारी को कथित तौर पर AI तकनीक के जरिए तैयार की गई आपत्तिजनक तस्वीरों के माध्यम से ब्लैकमेल करने के मामले में पुलिस ने मरीना लाजरस उर्फ मरीना जेस्सी (27) को गिरफ्तार किया है। अदालत में पेश किए जाने के बाद आरोपी महिला को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले से जुड़ी कुछ तस्वीरों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया गया है। इन तस्वीरों की अब फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि तस्वीरें किस तरह तैयार की गईं और उनमें किसी प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ या AI तकनीक का इस्तेमाल हुआ है या नहीं। मामले में नया मोड़ तब आया जब रेलवे अधिकारी जितेंद्र कुमार शर्मा की पत्नी अंकिता भारद्वाज शुक्रवार को नवाबाद थाने पहुंचीं। उन्होंने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि उनके पति और परिवार को कथित तौर पर AI से तैयार तस्वीरों के जरिए परेशान और ब्लैकमेल किया जा रहा था। शिकायत के मुताबिक, तस्वीरों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया गया और परिवार से कथित तौर पर 15 लाख रुपये की मांग की गई। हालांकि, मामले में लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। पुलिस अब मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को जुटाने में लगी है। तस्वीरों की तकनीकी जांच के साथ-साथ यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि कथित तौर पर तस्वीरें किस डिवाइस या डिजिटल माध्यम से तैयार की गईं और उन्हें संबंधित लोगों तक कैसे पहुंचाया गया। AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इस तरह के मामलों ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की तस्वीर में डिजिटल तरीके से बदलाव कर उसका गलत इस्तेमाल गंभीर समस्या बन सकता है। फिलहाल आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में है और मामले की जांच जारी है। पुलिस की जांच तथा फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
बाराबंकी टोल प्लाजा पर अजय राय हिरासत में, गोंडा जा रहे थे पीड़ित परिवार से मिलने

बाराबंकी: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय को बाराबंकी के टोल प्लाजा के पास पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वह गोंडा के कर्नलगंज में दिवंगत बर्तन कारोबारी विनोद साहनी के परिवार से मिलने के लिए जा रहे थे। कांग्रेस के मुताबिक, अजय राय का उद्देश्य पीड़ित परिवार से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त करना और उन्हें न्याय की लड़ाई में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाना था। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी पीड़ित परिवार से मिलना और उसकी परेशानी को समझना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेताओं को पीड़ित परिवारों तक पहुंचने से रोकना जनता की आवाज को दबाने जैसा है। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि विनोद साहनी के परिवार को मुश्किल समय में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मामले में निष्पक्ष जांच तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग दोहराई है। अजय राय की हिरासत की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखने को मिली। पार्टी ने कहा कि विपक्ष का काम जनता और पीड़ितों की समस्याओं को सामने रखना है। ऐसे में यदि किसी नेता को पीड़ित परिवार से मिलने से रोका जाता है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को प्राथमिकता देगी। पार्टी का कहना है कि कानून के दायरे में रहते हुए पीड़ितों के साथ खड़ा रहना उसकी जिम्मेदारी है। बाराबंकी में हुई इस कार्रवाई के बाद अब राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस ने कहा है कि न्याय की मांग को लेकर उसका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा और पीड़ित परिवार की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा।
बिहार कांग्रेस का दो दिवसीय प्रशिक्षक-प्रशिक्षण शिविर शुरू, संगठन को मजबूत करने पर जोर

पटना: बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी की ओर से प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में दो दिवसीय ‘प्रशिक्षक-प्रशिक्षण शिविर’ की शुरुआत की गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाना, कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाना तथा उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना बताया गया है। शिविर के दौरान पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं और प्रशिक्षकों को संगठन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में कार्यकर्ताओं को जनता के बीच पार्टी की नीतियों और विचारों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने, संगठन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं को समझने जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिए जाने की बात कही गई है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, किसी भी राजनीतिक संगठन की मजबूती उसके सक्रिय और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं पर निर्भर करती है। इसी सोच के साथ आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने और उन्हें बेहतर नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में जनसेवा को संगठन की प्राथमिकता से जोड़ने पर भी चर्चा की गई। पार्टी की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि कार्यकर्ताओं का जनता से सीधा संवाद मजबूत हो और स्थानीय मुद्दों को संगठन के स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाया जाए। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से पार्टी संगठन में नई ऊर्जा लाने और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशिक्षण के बाद तैयार होने वाले प्रशिक्षक आगे अन्य कार्यकर्ताओं को भी संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी के कार्यक्रमों की जानकारी देने में भूमिका निभा सकते हैं। बिहार में आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए कांग्रेस का यह संगठनात्मक कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी स्तर पर प्रशिक्षण और कार्यकर्ता सशक्तिकरण के जरिए संगठन को बूथ और जमीनी स्तर तक मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
गोंडा में विनोद साहनी प्रकरण पर उठे कानून-व्यवस्था के सवाल, पीड़ित परिवार ने जताई चिंता

गोंडा, उत्तर प्रदेश। गोंडा में विनोद साहनी से जुड़े मामले को लेकर एक बार फिर कानून-व्यवस्था और पीड़ित परिवार की सुरक्षा का मुद्दा चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए कथित बयान में विनोद साहनी की पत्नी ने आरोपियों के प्रभाव और उनकी संभावित रिहाई को लेकर चिंता जाहिर की है। उनके बयान में कथित तौर पर कहा गया कि प्रभावशाली लोग मिलकर आरोपियों को छुड़ाने का प्रयास कर सकते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं और सरकार के आलोचकों ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रदेश सरकार लगातार अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कानून के राज की बात करती है, लेकिन कई मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय की प्रक्रिया के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक दबाव की चिंता भी झेलनी पड़ती है। मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पीड़ित परिवार को पर्याप्त सुरक्षा और निष्पक्ष जांच का भरोसा मिल रहा है। परिवार की ओर से यदि आरोपियों के प्रभाव या दबाव को लेकर शिकायत की गई है, तो प्रशासन के लिए यह जरूरी हो जाता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किसी भी तरह के दबाव की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विपक्षी राजनीति ने इस मामले को सामाजिक न्याय और जातीय समीकरणों से भी जोड़ना शुरू कर दिया है। सरकार के आलोचकों का कहना है कि यदि पीड़ित परिवार को समय पर न्याय नहीं मिला तो इसका राजनीतिक असर व्यापक हो सकता है। इसी क्रम में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठजोड़ के जरिए भाजपा को राजनीतिक चुनौती देने की बातें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, वायरल बयान में किए गए दावों और मामले से जुड़े अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस या प्रशासन की आधिकारिक कार्रवाई और जांच की स्थिति सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल विनोद साहनी प्रकरण ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, पीड़ितों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
सेवा संकल्प अभियान को लेकर भाजपा की तैयारी, 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा अभियान

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से देशभर में सेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश भाजपा ने भी एक महीने तक चलने वाले ‘सेवा संकल्प’ अभियान की घोषणा की है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी के मुताबिक यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर तक चलेगा। पंकज चौधरी ने अभियान के उद्देश्य को लेकर कहा कि इसका मूल भाव जनसेवा के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना है। उन्होंने कहा कि पार्टी ‘राष्ट्र प्रथम’ और सुशासन की भावना को आधार बनाकर लोगों तक पहुंचने का प्रयास करेगी। उनके मुताबिक अभियान के दौरान सेवा कार्यों के साथ सरकार की योजनाओं और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को भी जनता के बीच ले जाने पर जोर रहेगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंबे राजनीतिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को भी रेखांकित किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2000 से 2014 के बीच गुजरात में बिजली, पानी, सड़क, निवेश और जनभागीदारी के क्षेत्र में कई ऐसे कार्य किए गए, जिन्हें बाद में विकास के व्यापक मॉडल के तौर पर देखा गया। पंकज चौधरी ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार के कामकाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में डबल इंजन की सरकार ने उत्तर प्रदेश की पहचान और विकास की दिशा में बदलाव लाने का काम किया है। उनके अनुसार राज्य में सड़क और परिवहन ढांचे को मजबूत करने के साथ एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। भाजपा नेता ने कहा कि ‘सेवा संकल्प’ अभियान के जरिए पार्टी कार्यकर्ता समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचेंगे और सेवा कार्यों के माध्यम से संगठन की गतिविधियों को जनसरोकार से जोड़ने का प्रयास करेंगे।
रोहिणी आचार्य के ट्वीट पर भाजपा नेता का RJD पर हमला, बोले- पार्टी में अब सब कुछ ठीक नहीं

रोहिणी आचार्य के ट्वीट पर भाजपा नेता का RJD पर हमला, बोले- पार्टी में अब सब कुछ ठीक नहीं पटना, बिहार। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़े हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और रोहिणी आचार्य के ट्वीट को लेकर बिहार की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने रोहिणी आचार्य के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद के आंतरिक हालात पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि राजद की मौजूदा स्थिति के लिए पार्टी के भीतर मौजूद कई लोग जिम्मेदार हैं। उनके मुताबिक, पार्टी की राजनीतिक स्थिति लगातार कमजोर हुई है और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है, यह पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पता है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि तमाम सवाल उठने के बावजूद उनके स्तर से स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि रोहिणी आचार्य का पक्ष हो या पार्टी के भीतर कोई दूसरा गुट, अलग-अलग स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राजद के अंदर की खींचतान अब सार्वजनिक तौर पर दिखाई देने लगी है। हालांकि, ये सभी बातें भाजपा नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप हैं। तेजस्वी यादव के आसपास मौजूद नेताओं को लेकर भी मृत्युंजय तिवारी ने टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने तेजस्वी यादव को वास्तविक राजनीतिक स्थिति से दूर कर रखा है। भाजपा नेता के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। मृत्युंजय तिवारी ने आगे बिहार की मौजूदा सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि अब जनता की उम्मीदें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार से जुड़ी हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार समृद्ध और विकसित बिहार बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि रोहिणी आचार्य के ट्वीट और भाजपा नेता के बयान के बाद राजद की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली: भारत दौरे पर आए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक में भारत और ईरान के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति भवन में ईरानी राष्ट्रपति का औपचारिक स्वागत किया गया। मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत और ईरान के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, क्षेत्रीय सहयोग और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगातार सहयोग रहा है। बैठक के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दे भारत तथा ईरान दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत को रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। भारत और ईरान के संबंधों में कनेक्टिविटी परियोजनाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों देश क्षेत्रीय व्यापार और संपर्क को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग करते रहे हैं। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ मुलाकात के दौरान आपसी सहयोग के नए अवसरों और द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में चर्चा हुई। मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। भारत लगातार विभिन्न देशों के साथ संवाद और सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। राष्ट्रपति भवन में हुई इस बैठक को भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संवाद के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच आने वाले समय में सहयोग के नए क्षेत्रों पर आगे बातचीत होने की उम्मीद है।