बिहार में बाढ़ के नुकसान का आकलन करने पहुंची केंद्रीय टीम, CM सम्राट चौधरी ने PM मोदी का जताया आभार

पटना: बिहार में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम के दौरे को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से जरूरी कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का प्रयास है कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द राहत और जरूरी मदद पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। बिहार में हाल के दिनों में बाढ़ के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाढ़ के पानी की वजह से लोगों को आवागमन, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में नुकसान का विस्तृत आकलन राहत और पुनर्वास की आगे की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्रीय टीम अपने दौरे के दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति और नुकसान का जायजा लेगी। टीम की रिपोर्ट और आकलन के बाद राज्य को मिलने वाली संभावित केंद्रीय सहायता की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से आकलन के आधार पर जो भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, उसका इस्तेमाल प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई की दिशा में किया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से फिलहाल प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ राहत कार्यों पर भी जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त सहायता और राहत व्यवस्था को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। बाढ़ के बाद पुनर्वास, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाना सरकार के सामने बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।

UCC के खिलाफ रैली में ओवैसी का GenZ को संदेश, बोले- ‘जो बीवी की गुलामी करते हैं, वही अच्छे मर्द कहलाते हैं’

भोपाल: यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के विरोध में भोपाल में आयोजित एक रैली के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने युवाओं और खासकर GenZ को संबोधित करते हुए शादी और वैवाहिक रिश्तों को लेकर अपनी बात रखी। उनके बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। रैली में बोलते हुए ओवैसी ने GenZ को संबोधित कर कहा कि, “तुम अपनी बीवियों की गुलामी करोगे।” उन्होंने आगे कहा कि जो पुरुष अपनी पत्नी की बात मानते हैं और उसके साथ मिलकर जीवन चलाते हैं, उन्हें अच्छे मर्द के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके इसी अंदाज और बयान को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में UCC को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से बहस जारी है। UCC का मुद्दा विवाह, तलाक, विरासत और परिवार से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता जैसे विषयों से जुड़ा है। इसके समर्थक देश में समान कानूनी व्यवस्था की बात करते हैं, जबकि विरोध करने वाले पक्ष व्यक्तिगत और धार्मिक कानूनों से जुड़े अधिकारों तथा विविधता को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करते रहे हैं। भोपाल की इस रैली में UCC को लेकर वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे। इसी दौरान ओवैसी ने युवाओं से संवाद करते हुए वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के रिश्ते और आपसी सम्मान का जिक्र किया। उनके बयान का वीडियो और अलग-अलग अंश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर किए जा रहे हैं। हालांकि, ओवैसी के बयान का राजनीतिक संदर्भ UCC के विरोध से जुड़ा था, जबकि ‘बीवी की गुलामी’ वाला उनका कथन वैवाहिक रिश्ते में पति-पत्नी के बीच समझ और व्यवहार को लेकर था। बयान को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

BPSC पेपर लीक मामले में छात्र नेता दिलीप से पूछताछ, CMO को ईमेल भेजने पर उठे सवाल

पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 67वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ा पेपर लीक मामला मई 2022 में काफी चर्चा में रहा था। परीक्षा के प्रश्नपत्र के कथित तौर पर लीक होने की खबर सामने आने के बाद आयोग ने परीक्षा रद्द कर दी थी। इसी घटनाक्रम से जुड़े मामले में छात्र नेता दिलीप से पूछताछ किए जाने की बात सामने आई थी। बताया गया कि 8 मई 2022 को 67वीं BPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) का प्रश्नपत्र लीक होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद परीक्षा की प्रक्रिया और प्रश्नपत्र की गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। मामले को लेकर अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों के बीच भी नाराजगी देखने को मिली थी। घटनाक्रम के अगले दिन, 9 मई 2022 को छात्र नेता दिलीप को पूछताछ के लिए ले जाने की बात सामने आई थी। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को ईमेल भेजा था। पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों की ओर से कथित तौर पर यह जानने की कोशिश की गई कि उन्हें पेपर लीक की जानकारी कहां से मिली और उन्होंने इस संबंध में CMO को ईमेल क्यों किया। छात्र नेता दिलीप का दावा रहा है कि उन्होंने ही परीक्षा के प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ी को सामने लाया था, जिसके बाद मामले ने व्यापक रूप लिया और परीक्षा रद्द करने का फैसला किया गया। हालांकि, किसी भी दावे की पुष्टि संबंधित आधिकारिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है। 67वीं BPSC PT परीक्षा रद्द होने के बाद इस मामले की जांच की गई थी। पेपर लीक की घटना ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। मई 2022 की यह घटना आज भी बिहार की प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े बड़े विवादों में गिनी जाती है। इस मामले में सामने आए आरोपों और दावों को समझने के लिए उस समय की जांच, आधिकारिक कार्रवाई और संबंधित दस्तावेजों को देखना महत्वपूर्ण है।

महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों को लेकर CJP का बड़ा दावा, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा पर उठाए सवाल

नागपुर, महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों में शिक्षा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नागपुर में ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की जानकारी देते हुए कहा कि आदिवासी बच्चों के लिए संचालित कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। अभिजीत दिपके के मुताबिक, इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर स्कूल भवन, रहने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति ऐसी है, जिसे तत्काल सुधारने की जरूरत है। उन्होंने महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में बच्चों की मौत को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। दिपके ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों के दौरान इन स्कूलों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। उनके अनुसार, खराब गुणवत्ता वाले भोजन, रहने की असुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याएं इसके पीछे संभावित कारण हो सकती हैं। हालांकि, इस आंकड़े और मौतों के कारणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस बयान के आधार पर नहीं हुई है। CJP नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ आश्रम स्कूलों में बच्चों के लिए पर्याप्त बिस्तरों की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें जमीन पर सोना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियों में सांप के काटने जैसी घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। दिपके ने इसे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक मुद्दा बताया। अभिजीत दिपके ने कहा कि आदिवासी समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने अभियान के माध्यम से आश्रम स्कूलों की स्थिति में सुधार, बेहतर भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षित आवास और शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग उठाई। CJP का कहना है कि ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए स्कूलों की जमीनी स्थिति को सामने लाने और सरकार का ध्यान बुनियादी सुविधाओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा।

भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे रौशन आनंद, राहत सामग्री के साथ जरूरतमंदों को दी आर्थिक मदद

भागलपुर। बिहार के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति के बीच राहत और मदद का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में पटना से रौशन आनंद बाढ़ राहत सामग्री लेकर भागलपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। यहां उन्होंने प्रभावित परिवारों के बीच आवश्यक खाद्य सामग्री का वितरण किया और उनकी परेशानियों को करीब से समझने का प्रयास किया। रौशन आनंद की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए चावल, आटा, दाल, चना का सत्तू, आलू, प्याज और नमक जैसी जरूरी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा प्रभावित लोगों के बीच ब्रेड, बिस्कुट और पीने के पानी का भी वितरण किया गया। बाढ़ के कारण रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में परेशान लोगों के लिए राहत सामग्री काफी उपयोगी साबित हुई। राहत वितरण के दौरान कई जरूरतमंद परिवारों ने अपनी समस्याएं साझा कीं। बाढ़ की वजह से भोजन, पीने के पानी और दैनिक उपयोग की वस्तुओं को लेकर लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में खाद्य सामग्री और पानी जैसी आवश्यक चीजें मिलने से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत मिलती है। बताया गया कि राहत सामग्री वितरण के साथ कुछ जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। इसका उद्देश्य बाढ़ की वजह से पैदा हुई तत्काल आर्थिक परेशानियों में प्रभावित परिवारों की मदद करना रहा। बाढ़ जैसी आपदा के दौरान प्रशासनिक राहत कार्यों के साथ सामाजिक स्तर पर होने वाली सहायता भी प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण होती है। भागलपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत सामग्री बांटने की पहल इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आई है। स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच पहुंचकर उनकी जरूरतों को समझना और आवश्यक सामान उपलब्ध कराना आपदा के दौरान राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में लोगों को भोजन, स्वच्छ पेयजल और अन्य जरूरी संसाधनों की आवश्यकता बनी हुई है।

UCC पर भाई वीरेंद्र का हमला, बोले- देश में महंगाई और बेरोजगारी पर ध्यान देने की जरूरत

पटना, बिहार। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक भाई वीरेंद्र ने UCC के मुद्दे पर केंद्र सरकार और NDA की राजनीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में सभी धर्मों के लोगों ने मिलकर योगदान दिया था और देश को धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के साथ आगे बढ़ाने की भावना रही है। भाई वीरेंद्र ने कहा कि आजादी के आंदोलन में अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोगों ने देश के लिए कुर्बानी दी थी। उनके मुताबिक, स्वतंत्रता सेनानियों का उद्देश्य ऐसा भारत बनाना था, जहां सभी नागरिकों को अपने धर्म और परंपराओं का पालन करने की स्वतंत्रता मिले। RJD विधायक ने आरोप लगाया कि UCC जैसे मुद्दे को सामने लाकर जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी और अपराध जैसे सवालों से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में आम लोगों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, जिन पर सरकार को प्राथमिकता के आधार पर काम करना चाहिए। भाई वीरेंद्र ने NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की चर्चा का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक इच्छा के आधार पर किसी बड़े कानून को लागू नहीं किया जा सकता और इसके लिए व्यापक चर्चा तथा सहमति जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि RJD UCC के प्रस्ताव का विरोध करेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब UCC को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस तेज है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में NDA शासित राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने की बात कही थी। इसके बाद बिहार में अलग-अलग दलों और NDA के सहयोगियों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। JD(U) ने भी कहा है कि वह UCC के प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद अपना रुख स्पष्ट करेगी। UCC के मुद्दे पर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है। फिलहाल RJD ने अपना विरोध स्पष्ट किया है, जबकि NDA के विभिन्न घटक दलों के रुख में अंतर दिखाई दे रहा है।

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था होगी और मजबूत, निशांत कुमार ने बनाई नई रणनीति

पटना: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के नेतृत्व में मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने, अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार करने तथा मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मानव संसाधन मजबूत करना एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता के तौर पर सामने आया है। हाल ही में राज्य सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर कार्यरत प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में संशोधन किया है। सरकार का कहना है कि इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुजफ्फरपुर में एसकेएमसीएच में 30 बेड की स्पेशल क्रिटिकल केयर यूनिट और होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में 12 बेड की आईसीयू सुविधा शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे उत्तर बिहार में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में कदम माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी योजनाओं पर चर्चा हुई है। पेशेंट रेफरल सिस्टम, स्मार्ट एंबुलेंस, टेलीमेडिसिन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के जरिए मरीजों को जरूरत के मुताबिक समय पर उचित अस्पताल और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है। वहीं, नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। इसमें संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों, मानव संसाधन और जरूरी सुविधाओं की जांच के साथ योग्य शिक्षकों की नियुक्ति पर जोर दिया गया है। कुल मिलाकर, बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल शिक्षा, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, अस्पतालों के आधुनिकीकरण और तकनीक आधारित सेवाओं को एक साथ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। इन पहलों का उद्देश्य मरीजों को राज्य के भीतर ही बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

17 सितंबर को हर घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’, CM सम्राट चौधरी ने की खास अपील

पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोगों से इस अभियान में शामिल होने और शाम 6 से 7 बजे के बीच अपने घरों में दीप जलाने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि यह दीपक कृतज्ञता, संकल्प और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रतीक होगा। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के 25 वर्षों की यात्रा को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। सम्राट चौधरी ने लोगों से प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर राष्ट्रसेवा के लिए शुभकामनाएं देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर घर में जलने वाला दीपक विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के सामूहिक संकल्प की रोशनी का प्रतीक बने। ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जुड़ने की अपील मुख्यमंत्री ने लोगों से ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा बनने की भी अपील की। इस अभियान के जरिए सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बिहार में 17 सितंबर से अभियान से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम शुरू होने की जानकारी सामने आई है। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को इसी अभियान की शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर लोगों को अपने घरों और सार्वजनिक स्थलों पर दीप जलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में कहा कि दीप जलाने की यह पहल केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के विकास और राष्ट्र निर्माण में नागरिक भागीदारी के संकल्प से जुड़ी है। 17 सितंबर को शाम 6 से 7 बजे के बीच होने वाली इस पहल में लोगों से अपने घरों में दीप जलाकर अभियान से जुड़ने की अपील की गई है। कार्यक्रम के जरिए जनभागीदारी और सेवा भावना का संदेश लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

हाजीपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण, शिवराज सिंह चौहान और CM सम्राट चौधरी ने लिया जायजा

हाजीपुर/पटना: बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच बुधवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। दोनों नेताओं ने हवाई सर्वेक्षण के जरिए प्रभावित इलाकों की स्थिति, जलभराव और फसल को हुए नुकसान का जायजा लिया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बिहार में बाढ़ से उत्पन्न हालात का आकलन करने के लिए पहुंचे हैं। उनके दौरे का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को समझना और राहत-बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उनके साथ मौजूद रहे। हवाई सर्वेक्षण के दौरान हाजीपुर समेत आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति देखी गई। इसके बाद प्रभावित गांवों और कृषि क्षेत्रों में जाकर स्थानीय लोगों तथा किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने का कार्यक्रम भी रखा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दौरे में दिघवारा और मनेर क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण तथा हाजीपुर के तेरसिया और सरायपुर जैसे इलाकों में फसल नुकसान का जायजा शामिल है। बाढ़ से प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने के साथ-साथ किसानों को हुए नुकसान का आकलन भी इस दौरे का अहम हिस्सा है। इसके बाद पटना में मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़, राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक की योजना है। दौरे के अगले चरण में मुंगेर के राहत शिविर का निरीक्षण और बाढ़ पीड़ित परिवारों से मुलाकात भी प्रस्तावित है। इस दौरान प्रभावित लोगों से सीधे उनकी समस्याएं जानने और राहत शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लेने की बात सामने आई है। बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति के बीच केंद्र और राज्य स्तर पर प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। हवाई सर्वेक्षण और जमीनी निरीक्षण से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे राहत एवं पुनर्वास से जुड़े कदमों पर विचार किया जाएगा।

पीएम मोदी के जन्मदिन पर मनोज तिवारी ने गिनाईं 25 साल की जनसेवा और विकास की उपलब्धियां

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को लेकर भारतीय जनता पार्टी की ओर से देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का जन्मदिन 17 सितंबर को मनाया जाएगा। इसी मौके पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और देश के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया। मनोज तिवारी ने कहा कि 17 सितंबर का दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के साथ-साथ विश्वकर्मा पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री की करीब 25 वर्षों की जनसेवा और राष्ट्रसेवा को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाएगा। भाजपा सांसद के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास के कई क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। उन्होंने विशेष रूप से आम लोगों की सुविधाओं, कारोबार के माहौल और बुनियादी ढांचे में हुए बदलावों का उल्लेख किया। मनोज तिवारी ने कहा कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी कारोबार को आसान बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने देश में हाईवे, सड़कों और रेलवे के विस्तार का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम हुआ है, जिसका असर देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देता है। मनोज तिवारी ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को जनसेवा और राष्ट्रसेवा से जोड़ते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश के लोगों में विकास के साथ-साथ खुशी और गर्व की भावना भी बढ़ी है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से अलग-अलग कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है। 17 सितंबर को होने वाले आयोजनों में प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन, विकास कार्यों और सरकार की विभिन्न योजनाओं को भी प्रमुखता से सामने रखा जाएगा। हालांकि, सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भाजपा नेताओं की ओर से उनके कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा जा रहा है।