विकास की राह में आदिवासी अधिकारों का सवाल, इतिहास से भारत तक

दुनिया के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जहां विकास, विस्तार और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण की प्रक्रिया ने स्थानीय समुदायों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। अमेरिका का इतिहास भी इसी तरह के बदलावों का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है। यूरोपीय उपनिवेशवाद के विस्तार के दौरान वहां रहने वाले मूलनिवासी समुदायों को व्यापक स्तर पर विस्थापन, भूमि अधिग्रहण और सामाजिक बदलावों का सामना करना पड़ा। समय के साथ उनकी पारंपरिक जमीन और संसाधनों पर नियंत्रण काफी हद तक बदल गया। भारत में भी आदिवासी समुदायों और विकास परियोजनाओं के बीच जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर बहस लंबे समय से जारी है। देश के कई हिस्सों में खनन, उद्योग, सड़क, बांध और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि के इस्तेमाल को लेकर सरकार, कंपनियों और स्थानीय समुदायों के बीच अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं। आदिवासी समुदायों के लिए जंगल केवल आय का साधन नहीं हैं। उनकी आजीविका, संस्कृति, परंपराएं और सामाजिक व्यवस्था लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी रही हैं। ऐसे में भूमि या वन क्षेत्र में बदलाव का असर केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर भी पड़ सकता है। विकास परियोजनाओं के समर्थकों का तर्क है कि खनन और बुनियादी ढांचे से रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं आदिवासी अधिकारों से जुड़े समूहों की ओर से यह सवाल उठाया जाता रहा है कि परियोजनाओं से प्रभावित लोगों की सहमति, पुनर्वास, मुआवजा और आजीविका की सुरक्षा को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं। यही वजह है कि विकास और आदिवासी अधिकारों के बीच संतुलन का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। चुनौती यह है कि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के अधिकार, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत की भी रक्षा हो। इतिहास का अनुभव यह संकेत देता है कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े फैसलों का प्रभाव कई पीढ़ियों तक रह सकता है। इसलिए विकास की किसी भी प्रक्रिया में प्रभावित समुदायों की भागीदारी और उनके अधिकारों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर यूपी सरकार की पहल, भूपेंद्र यादव ने की सीएम योगी की सराहना

लखनऊ: पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता में सुधार को लेकर उत्तर प्रदेश में चल रही विभिन्न पहलों पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदेश सरकार की सराहना की है। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में पर्यावरण और वायु गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और वृक्षारोपण सहित पर्यावरण से जुड़े कई विषयों पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण से जुड़े विषयों को लेकर संबंधित राज्यों और विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उनका कहना था कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक क्षेत्र की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। भूपेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर किए गए वृक्षारोपण अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रदेश में लगाए गए पौधों की संख्या और अभियान में लोगों की भागीदारी की सराहना की। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक संख्या में पेड़ लगाने का काम किया है। उन्होंने इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर पौधारोपण से प्रदेश में हरित क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय में पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। बैठक के दौरान वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने और पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई। आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरणीय जागरूकता को लेकर योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा सकता है। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर समन्वय को इस बैठक के प्रमुख बिंदुओं में शामिल माना जा रहा है।
ओडिशा में बड़े स्तर पर ‘सागर कवच’ अभ्यास, तटीय सुरक्षा एजेंसियों ने दिखाया बेहतर तालमेल

भुवनेश्वर: ओडिशा में तटीय सुरक्षा को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘सागर कवच’ एक्सरसाइज का आयोजन किया गया। इस अभ्यास में समुद्र से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारियों को परखा गया। बड़ी संख्या में सुरक्षा और संबंधित विभागों ने इसमें हिस्सा लिया। रेलवे एवं तटीय सुरक्षा के ADGP अरुण बोथरा ने बताया कि ‘सागर कवच’ अभ्यास वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के साथ-साथ अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की तटीय सुरक्षा व्यवस्था में कई एजेंसियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना, इंडियन कोस्ट गार्ड, मरीन पुलिस और वन विभाग समेत संबंधित एजेंसियों ने भाग लिया। अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आपात स्थिति में उनकी प्रतिक्रिया क्षमता को परखा गया। अरुण बोथरा के मुताबिक ओडिशा की तटरेखा करीब 575 किलोमीटर लंबी है। इतनी लंबी तटीय सीमा की निगरानी और सुरक्षा अपने आप में बड़ी चुनौती है। ऐसे में समुद्र से लेकर तटीय इलाकों तक सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच लगातार बेहतर तालमेल जरूरी है। ‘सागर कवच’ जैसे अभ्यासों के जरिए सुरक्षा एजेंसियां संभावित परिस्थितियों में अपनी तैयारियों का परीक्षण करती हैं। साथ ही, किसी आपात स्थिति के दौरान अलग-अलग विभाग किस तरह एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे, इसकी भी व्यावहारिक जांच की जाती है। अधिकारियों का मानना है कि तटीय सुरक्षा केवल किसी एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है। समुद्री क्षेत्र की निगरानी, तटवर्ती इलाकों की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न विभागों के बीच सूचना साझा करना और त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। ओडिशा में आयोजित इस बड़े अभ्यास को इसी समन्वित सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
चारधाम यात्रा मार्ग पर 24 घंटे निगरानी, 100 कैमरों से रखी जा रही नजर

रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड: चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया है। यात्रा मार्ग के संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों पर करीब 100 कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के जरिए सड़कों, हेलीपैड और ट्रैकिंग रूट पर लगातार नजर रखी जा रही है। कैमरों से मिलने वाला लाइव फीड सीधे जिला आपदा नियंत्रण कक्ष तक पहुंचता है, जहां अधिकारी और कर्मचारी चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के मुताबिक, चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही और मार्ग की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। लाइव कैमरा फीड के माध्यम से प्रशासन को अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति की तत्काल जानकारी मिलती रहती है। किसी स्थान पर परेशानी सामने आने की स्थिति में संबंधित टीम को जल्द सक्रिय किया जा सकता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों की सहायता के लिए आपदा नियंत्रण कक्ष को भी सक्रिय रखा गया है। श्रद्धालु या कोई अन्य व्यक्ति यात्रा मार्ग पर किसी समस्या का सामना करने पर कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकता है। शिकायत या सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग और स्थानीय टीमों के साथ समन्वय कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है। चारधाम यात्रा के दौरान मौसम, सड़क की स्थिति और पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों को देखते हुए निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कैमरों से मिलने वाली दृश्य जानकारी प्रशासन को संभावित समस्याओं पर नजर रखने में मदद करती है। इसके अलावा यात्रा मार्ग पर SOS सिस्टम भी उपलब्ध कराया गया है। इसके माध्यम से अलग-अलग स्थानों के साथ तत्काल संपर्क स्थापित करने में सुविधा मिलती है। प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था आपात परिस्थितियों में संचार और राहत कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करने में मददगार साबित हो रही है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि यह पूरी निगरानी व्यवस्था आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित की जा रही है। चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में इस तकनीकी व्यवस्था को अहम भूमिका दी जा रही है।
TMC का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज होने के बाद रिताब्रत बनर्जी का बड़ा बयान, चुनाव आयोग को भेजे 3 नाम और 3 सिंबल

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच चुका है। आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले चुनाव आयोग ने फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। आयोग के इस अंतरिम फैसले के बाद दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न सुझाने के निर्देश दिए गए हैं। इसी घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी ने कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके गुट ने चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार तीन नए पार्टी नाम और तीन चुनाव चिह्न के विकल्प तय कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि आपसी चर्चा के बाद इन विकल्पों को ईमेल के माध्यम से चुनाव आयोग के पास भेज दिया गया है। रिताब्रत बनर्जी ने कहा कि अब आगे का फैसला चुनाव आयोग को करना है और आयोग जो निर्णय लेगा, वही अंतिम रूप से मान्य होगा। उनके बयान से साफ है कि उनका गुट फिलहाल आयोग की प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रहा है और उपचुनाव के लिए नई राजनीतिक पहचान के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। आयोग ने दोनों पक्षों को तीन-तीन नाम और तीन-तीन स्वतंत्र चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा था। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों को लेकर दोनों गुटों के बीच किसी तरह की चुनावी पहचान संबंधी उलझन से बचने के लिए की गई है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव आयोग रिताब्रत बनर्जी गुट और दूसरे गुट के लिए कौन-से नाम और चुनाव चिह्न मंजूर करता है। मूल पार्टी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम स्थिति पर भी आयोग के आगे के निर्णय का इंतजार रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों पर पड़ना तय है, जहां दोनों गुटों को अलग-अलग चुनावी पहचान के साथ जनता के बीच जाना होगा।
MLC चुनाव में अनंत सिंह का बड़ा बयान, बोले- नीरज कुमार की हार निश्चित, जमानत होगी जब्त

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से MLC चुनाव को लेकर बिहार की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार के खिलाफ एक बार फिर खुलकर अपना रुख जाहिर किया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनका विरोध जेडीयू से नहीं, बल्कि नीरज कुमार से है। इससे पहले भी वह पटना स्नातक सीट से डॉ. अनुज कुमार के समर्थन का ऐलान कर चुके हैं। नीरज कुमार पर अनंत सिंह के तीखे आरोप मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने उनके विधानसभा चुनावों के दौरान उनका विरोध किया था। उन्होंने कहा कि जब उनका विरोध किया गया, तब पार्टी स्तर पर कोई बैठक नहीं हुई और न ही उनसे इस बारे में सवाल किया गया। अनंत सिंह का कहना है कि अब जब वह नीरज कुमार का समर्थन नहीं कर रहे हैं तो इस मुद्दे पर बैठक और चर्चा की जा रही है। अनंत सिंह ने अपने राजनीतिक प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि उनके वोट से मुख्यमंत्री बनते हैं, जबकि ललन सिंह के वोट से प्रधानमंत्री बनते हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि नीरज कुमार के वोट से क्या बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह पार्टी का चुनाव नहीं है और वह इस चुनाव में अपने तरीके से फैसला ले रहे हैं। अनंत सिंह ने दावा किया कि जिस तरह उन्होंने पहले अपने चुनाव में विरोध का सामना किया, उसका जवाब अब एमएलसी चुनाव में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नीरज कुमार को हराने के लिए वह अपनी पूरी राजनीतिक ताकत लगाएंगे। नार्को टेस्ट की भी मांग बयान के दौरान अनंत सिंह ने नीरज कुमार के नार्को टेस्ट की मांग भी कर दी। उन्होंने कहा कि पार्टी की बैठक के दौरान भी उन्होंने अपनी बात रखी थी। साथ ही उन्होंने नीरज कुमार की चुनावी हार और जमानत जब्त होने का दावा किया। हालांकि, चुनाव परिणाम आने से पहले अनंत सिंह के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, नीरज कुमार ने हालिया बयान में कहा है कि अभी पार्टी की ओर से उनकी उम्मीदवारी की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है और यह दलगत आधार पर होने वाला चुनाव है। पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह द्वारा डॉ. अनुज कुमार के समर्थन और नीरज कुमार के बीच बढ़ते राजनीतिक मतभेद ने आगामी MLC चुनाव को लेकर बिहार की सियासत में चर्चा बढ़ा दी है।
H.R. McMaster का ANI इंटरव्यू आज शाम 7 बजे, भारत-अमेरिका संबंधों से लेकर रूस और चीन तक कई मुद्दों पर चर्चा

नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और लेफ्टिनेंट जनरल एच.आर. मैकमास्टर के साथ समाचार एजेंसी ANI का विशेष बातचीत कार्यक्रम आज शाम 7 बजे प्रसारित किया जाएगा। इस विशेष एपिसोड में भारत-अमेरिका संबंधों, रूस से भारत की तेल खरीद, चीन की आर्थिक गतिविधियों और ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई है। प्रमो के अनुसार, बातचीत के दौरान मैकमास्टर ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने पाकिस्तान के संदर्भ में दोहरे रवैये से जुड़ी अपनी धारणा व्यक्त की। इसके अलावा चीन से जुड़े वित्तीय लेनदेन और ईरान तक धन के प्रवाह के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। मैकमास्टर के मुताबिक, ऐसे वित्तीय प्रवाह को लेकर चीनी वित्तीय संस्थानों पर भविष्य में द्वितीयक प्रतिबंधों की संभावना बन सकती है। इंटरव्यू में रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। प्रमो में मैकमास्टर के हवाले से कहा गया है कि रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका को 100 प्रतिशत टैरिफ जैसे कड़े कदम पर विचार करना चाहिए। हालांकि, यह उनके द्वारा व्यक्त किया गया दृष्टिकोण है और इसे अमेरिकी सरकार की आधिकारिक नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रूस के साथ परमाणु क्षेत्र में सहयोग का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा रहा। मैकमास्टर ने रूस से यूरेनियम खरीदने को लेकर अपनी असहमति जताई और इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इसके बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य को लेकर मैकमास्टर ने सकारात्मक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक स्तर पर भारत और अमेरिका के संबंधों के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ANI का यह विशेष इंटरव्यू आज शाम 7 बजे IST प्रसारित होगा। दर्शक एपिसोड से जुड़ी सूचना पाने के लिए ‘Notify Me’ विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं।
iPhone 18 Pro Max के लिए पहले दिन ही लगी कतार, सोशल मीडिया पर EMI और दिखावे को लेकर चर्चा

नई दिल्ली: Apple के नए iPhone 18 Pro Max को लेकर ग्राहकों में उत्साह देखने को मिल रहा है। फोन की बिक्री शुरू होने से पहले ही कई जगहों पर लोग स्टोर के बाहर कतार में नजर आए। नए iPhone को सबसे पहले खरीदने की चाहत के बीच सोशल मीडिया पर इसके खरीदने के तरीके और बढ़ती EMI संस्कृति को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। नए मॉडल के लॉन्च के साथ हर बार की तरह इस बार भी ऐसे ग्राहकों की तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, जो फोन खरीदने के लिए घंटों पहले स्टोर पहुंच गए। कुछ लोगों के लिए यह टेक्नोलॉजी और नए फीचर्स का अनुभव लेने का मौका है, जबकि कुछ लोग नए मॉडल को सबसे पहले अपने हाथ में लेने को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक टिप्पणी में महंगे स्मार्टफोन खरीदने की आदत और उसके लिए ली जाने वाली EMI को लेकर सवाल उठाया गया है। टिप्पणी में व्यंग्य करते हुए कहा गया कि कई लोग कुछ दिनों तक नए फोन को लेकर मिलने वाली चर्चा और लोगों की प्रतिक्रिया के लिए बड़ी रकम खर्च कर देते हैं। इसके बाद लंबे समय तक EMI चुकाने का दबाव बना रहता है। पोस्ट में दावा किया गया कि करीब 1.5 से 2 लाख रुपये कीमत वाले फोन के लिए कुछ ग्राहक अगले कई महीनों तक अपनी आय का बड़ा हिस्सा EMI में खर्च कर सकते हैं। टिप्पणी में यह भी कटाक्ष किया गया कि जब तक एक मॉडल की EMI पूरी होती है, तब तक बाजार में अगली पीढ़ी का iPhone दस्तक दे सकता है। हालांकि, यह टिप्पणी एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया राय के तौर पर देखी जा रही है। हर ग्राहक का फोन खरीदने का बजट, इस्तेमाल और आर्थिक निर्णय अलग होता है। महंगे स्मार्टफोन की खरीदारी में ग्राहक अपनी जरूरत, कीमत, ऑफर और भुगतान विकल्पों को ध्यान में रखकर फैसला करते हैं। iPhone 18 Pro Max को लेकर शुरुआती उत्साह यह दिखाता है कि प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में Apple के नए मॉडल को लेकर ग्राहकों की दिलचस्पी अभी भी मजबूत है। लॉन्च के शुरुआती दिनों में स्टोर के बाहर जुटने वाली भीड़ अक्सर नए डिवाइस के प्रति उपभोक्ताओं की उत्सुकता का संकेत देती है।
राजस्थान निकाय चुनाव: निर्दलीयों के समर्थन पर बैरवा का कांग्रेस को जवाब, खरीद-फरोख्त के आरोपों को बताया निराधार

जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है और इसी बीच भाजपा तथा कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार कई निकायों में बोर्ड गठन का समीकरण निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर निर्भर कर रहा है। इसी राजनीतिक माहौल के बीच राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने भाजपा पर लगाए जा रहे खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज किया है। बैरवा ने कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो अपने संगठनात्मक संस्कार और नीतियों के आधार पर काम करती है। उनके मुताबिक नगर निकाय चुनाव में भाजपा को व्यापक समर्थन मिला है, जबकि कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिसके बाद विपक्ष की ओर से इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने निर्दलीय उम्मीदवारों के भाजपा के साथ आने को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार अपने राजनीतिक विचार और भविष्य को लेकर स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं। यदि कोई निर्वाचित निर्दलीय पार्षद भाजपा की विचारधारा और नीतियों में विश्वास व्यक्त करते हुए पार्टी के साथ आना चाहता है, तो भाजपा उसका स्वागत करेगी। बैरवा ने कहा कि निर्दलीय विजेताओं का किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ना उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद का हिस्सा है। ऐसे में इसे खरीद-फरोख्त से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि भाजपा किसी भी निर्दलीय जनप्रतिनिधि पर दबाव नहीं बना रही है। राजस्थान निकाय चुनाव के बाद कई स्थानों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल निर्दलीय पार्षदों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षद स्थानीय बोर्डों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, कांग्रेस की ओर से निकाय चुनाव के बाद भाजपा पर धनबल और प्रभाव के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए हैं। भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है। इस तरह बोर्ड गठन से पहले राजस्थान की स्थानीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है।
राहुल गांधी के ट्वीट पर सुधांशु त्रिवेदी का पलटवार, बोले- TMC और NCP का कांग्रेस से रहा है संबंध

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक ट्वीट को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने राहुल गांधी के उस आरोप पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें भाजपा पर शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) को खत्म करने की कोशिश करने की बात कही गई थी। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी की ओर से किया गया यह दावा राजनीतिक इतिहास और दलों के गठन की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखे बिना किया गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम की जानकारी होनी चाहिए। भाजपा नेता ने दावा किया कि TMC और NCP का गठन कांग्रेस से अलग होकर हुआ था। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होने के बाद तृणमूल कांग्रेस बनाई, जबकि शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया था। त्रिवेदी ने इसी राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए शिवसेना, NCP और TMC का उल्लेख किया, लेकिन इन दलों के कांग्रेस से अलग होकर बनने के इतिहास को नजरअंदाज कर दिया। त्रिवेदी ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक समझ से जुड़ा विषय बताया। भाजपा नेता के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बन गया है। दोनों दल अक्सर एक-दूसरे पर क्षेत्रीय दलों और विपक्षी राजनीति को प्रभावित करने के आरोप लगाते रहे हैं। राहुल गांधी की ओर से भाजपा पर लगाए गए आरोप और सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है, जब देश में विपक्षी दलों और भाजपा के बीच राजनीतिक रणनीति को लेकर लगातार बयानबाजी जारी है। इस विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक तर्क और घटनाक्रमों का हवाला दे रहे हैं। इस पूरे मामले में राहुल गांधी के ट्वीट और सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के बयानों को उनके संबंधित राजनीतिक रुख और आरोप-प्रत्यारोप के संदर्भ में देखा जा रहा है।