SIR नोटिस को लेकर इमरान प्रतापगढ़ी ने उठाए सवाल, आम नागरिकों के अधिकारों पर बहस की मांग

नई दिल्ली: SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी जारी है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने चुनाव प्रक्रिया और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि SIR के नाम पर नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। इमरान प्रतापगढ़ी का कहना है कि नागरिकों की पहचान और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में नोटिस की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी व्यक्ति की गरिमा प्रभावित न हो। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति को नोटिस मिलने के बाद कम समय में मामला स्पष्ट हो जाता है, तो क्या देश के गरीब और सामान्य नागरिक को भी उसी तरह की सुविधा और अवसर मिल पाता है? कांग्रेस सांसद ने अपने बयान में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर किसी बड़े नेता या प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ा मामला जल्दी सुलझ जाता है, तो क्या एक आम गरीब नागरिक को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए उतना ही आसान और तेज रास्ता उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बड़े नेता और वकील तक चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत संदेह या जांच के दायरे में आ सकते हैं, तो आम नागरिकों की स्थिति को लेकर भी चर्चा जरूरी हो जाती है। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में पूरी प्रक्रिया की समीक्षा और व्यापक सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि SIR जैसे विषय का सीधा संबंध नागरिकों के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से है। इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर नियमों, प्रक्रिया और आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना जरूरी है। उन्होंने इस पूरे मामले पर गहन समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि देश में इस विषय को लेकर लंबी और गंभीर बहस होनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि चुनावी प्रक्रिया में आम नागरिक को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का उचित अवसर मिलना चाहिए। SIR को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में चुनाव आयोग की प्रक्रिया, नोटिस के आधार और नागरिकों को उपलब्ध अवसरों को लेकर आने वाले दिनों में बहस और तेज होने की संभावना है।

BAPS से PM मोदी का पुराना जुड़ाव, 12 साल में 18 से अधिक मुलाकातों और कार्यक्रमों का दावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के बीच लंबे समय से संबंध चर्चा में रहे हैं। हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि BAPS और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अभिलेखों की पड़ताल करने पर पिछले 12 वर्षों के दौरान मोदी की BAPS प्रतिनिधियों से मुलाकात या संस्था के कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी के कम से कम 18 मामले सामने आए हैं। BAPS स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़ी संस्था है, जिसका धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में मंदिर निर्माण का भी व्यापक नेटवर्क है। नरेंद्र मोदी का संस्था और इसके दिवंगत आध्यात्मिक प्रमुख प्रमुख स्वामी महाराज से जुड़ाव काफी पुराना बताया जाता है। मोदी ने खुद 2022 में अहमदाबाद के एक BAPS कार्यक्रम में अपने पुराने संबंधों का उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि उनकी प्रमुख स्वामी से पहली मुलाकात करीब 1981 में हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मोदी कई BAPS कार्यक्रमों में शामिल हुए और संस्था से जुड़े मंदिर निर्माण प्रोजेक्ट्स को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया। वर्ष 2018 में उन्होंने अबू धाबी में बनने वाले BAPS हिंदू मंदिर प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया था। इसके बाद फरवरी 2024 में उन्होंने अबू धाबी स्थित मंदिर का उद्घाटन किया। इस दौरान मोदी ने प्रमुख स्वामी महाराज के साथ अपने संबंधों को पिता-पुत्र जैसा बताया था। BAPS की गतिविधियों को लेकर हाल के वर्षों में विदेशों में भी चर्चा हुई है। फ्रांस में BAPS से जुड़े एक कार्यक्रम को लेकर महिलाओं की मौजूदगी और उनकी आवाजाही से संबंधित विवाद सामने आया। इस घटनाक्रम के बाद संस्था और मोदी के बीच लंबे समय से सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाले संबंधों पर भी ध्यान गया। हालांकि, केवल किसी धार्मिक या सामाजिक संस्था के कार्यक्रम में किसी राजनीतिक नेता की भागीदारी से उसके राजनीतिक संबंधों या निर्णयों के बारे में स्वतः कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिकॉर्ड मुख्य रूप से मुलाकातों, कार्यक्रमों और सार्वजनिक बयानों को दर्ज करते हैं।

AI की रफ्तार पर ब्रेक लगाने की मांग, अमोडेई के साथ ऑल्टमैन और मस्क भी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच इसकी विकास गति को लेकर बहस तेज हो गई है। Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने हाल ही में एडवांस्ड AI मॉडल्स के विकास की रफ्तार को कुछ समय के लिए नियंत्रित करने की अपील की। उनकी इस पहल को OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और xAI के प्रमुख एलन मस्क का भी समर्थन मिला है। अमोडेई का तर्क है कि AI की क्षमताएं जिस तेजी से बढ़ रही हैं, उस गति से सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र विकसित नहीं हो पा रहे हैं। उनका प्रस्ताव AI कंपनियों में स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ताओं की भूमिका बढ़ाने और कंपनियों के बीच सुरक्षा मानकों को लेकर सहयोग करने पर केंद्रित है। उनका कहना है कि विकास पूरी तरह रोकने के बजाय तकनीकी प्रगति और सुरक्षा के बीच बेहतर संतुलन बनाया जाना चाहिए। सैम ऑल्टमैन ने अमोडेई के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं को AI कंपनियों के सिस्टम तक पर्याप्त पहुंच देने की बात कही है। वहीं एलन मस्क ने भी सार्वजनिक तौर पर अमोडेई की बात से सहमति जताई। यह समर्थन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ये कंपनियां और उनके प्रमुख AI क्षेत्र में एक-दूसरे के बड़े प्रतिस्पर्धी हैं। हालांकि, AI की रफ्तार धीमी करने की इस मांग को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ आलोचकों का कहना है कि बड़ी AI कंपनियों के लिए सुरक्षा के नाम पर विकास की गति सीमित करने की मांग व्यावसायिक हितों से भी जुड़ी हो सकती है। ऐसे आरोपों के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण बन गया है कि AI सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम वास्तव में व्यापक सार्वजनिक हित में हैं या इनके पीछे कंपनियों के रणनीतिक और कारोबारी हित भी भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन इस बहस से अलग एक तथ्य यह है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा, गलत सूचना, धोखाधड़ी और स्वायत्त AI सिस्टम से जुड़े जोखिमों पर चर्चा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में AI की रफ्तार, सुरक्षा और नियमन को लेकर दुनिया भर में नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

IIT Bombay में छात्र की मौत के बाद Dean of Student Affairs निलंबित, जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई

मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे में एक छात्र की आत्महत्या के मामले के बाद संस्थान प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। IIT बॉम्बे के Dean of Student Affairs, प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। संस्थान की ओर से बताया गया है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी। निदेशक के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल Dean of Student Affairs को तत्काल प्रभाव से उनके पद से निलंबित किया गया है। IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद परिसर में छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ऐसे मामलों में संस्थानों की जिम्मेदारी होती है कि वे छात्रों की समस्याओं को समय रहते समझें और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराएं। हालांकि, इस मामले में किसी व्यक्ति या अधिकारी की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की भूमिका को लेकर संस्थान की ओर से जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। IIT बॉम्बे प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। छात्र की मौत से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत को सामने रखा है। हालांकि, घटना के कारणों और इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर जांच के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। IIT बॉम्बे देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल है। ऐसे में संस्थान में हुई इस घटना और उसके बाद की प्रशासनिक कार्रवाई पर छात्रों, अभिभावकों और शैक्षणिक समुदाय की नजर बनी हुई है।

बदलते जोखिमों को लेकर टाटा स्टील CEO का बड़ा बयान, बोले- अब तैयारी का दायरा बढ़ाने की जरूरत

नई दिल्ली: टाटा स्टील लिमिटेड के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्रन ने बदलते वैश्विक हालात और कारोबार के सामने उभर रहे नए जोखिमों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज कंपनियों को केवल उन चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत नहीं है, जिनकी पहले से पहचान है, बल्कि ऐसे जोखिमों के लिए भी तैयारी करनी होगी, जिनका अनुमान लगाना मुश्किल है। टीवी नरेंद्रन ने हाल में नेपाल में हुई भयावह घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हुई जनहानि और बाढ़ से हुई तबाही बेहद दुखद है। उन्होंने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं हमें भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहने का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु से जुड़ी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना कई बार बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में कारोबार और संस्थानों को अपनी तैयारी का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक रखना होगा। उनके मुताबिक, भविष्य में कंपनियों के सामने सिर्फ पारंपरिक कारोबारी जोखिम ही नहीं होंगे, बल्कि प्राकृतिक आपदाएं, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक परिस्थितियों में तेजी से होने वाले बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। टीवी नरेंद्रन ने भू-राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव को भी कारोबार के लिए बड़ी चुनौती बताया। उनका कहना था कि कई बार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम उन धारणाओं को बदल देते हैं, जिनके आधार पर कंपनियां वर्षों तक अपनी कारोबारी योजनाएं तैयार करती हैं। इसका सीधा असर आपूर्ति व्यवस्था, लागत, बाजार और निवेश से जुड़े फैसलों पर पड़ सकता है। उन्होंने तकनीकी बदलावों का भी उल्लेख किया। नरेंद्रन के अनुसार, टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है कि आज जिन कौशलों और कारोबारी मॉडलों को सामान्य माना जाता है, वे आने वाले समय में काफी अलग दिखाई दे सकते हैं। टाटा स्टील CEO ने कहा कि हालिया वैश्विक घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि भू-राजनीतिक बदलावों का असर अर्थव्यवस्था और कारोबार तक बहुत तेजी से पहुंच सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए लचीली रणनीति, जोखिमों की पहचान और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है।

जमुई में युवती से छेड़खानी का वीडियो वायरल, महिला आयोग सख्त, बोलीं- दोषी कोई भी हो, बख्शे नहीं जाएंगे

जमुई: बिहार के जमुई में युवती के साथ कथित छेड़खानी और बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि घटना 19 सितंबर की रात की है, जबकि इसका वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। मामले को लेकर राज्य महिला आयोग ने भी गंभीरता दिखाई है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने मामले की जानकारी लेते हुए कहा कि आयोग इस घटना को गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, अगर जांच में उसकी संलिप्तता सामने आती है तो उसे कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि राज्य महिला आयोग की टीम घटनास्थल पर जाकर पीड़िता से मुलाकात करेगी और पूरे मामले की जानकारी जुटाएगी। इसके साथ ही जमुई के पुलिस अधीक्षक को भी पत्र और ईमेल के माध्यम से मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा जाएगा। वायरल वीडियो में कुछ युवकों द्वारा एक युवक और युवती के साथ कथित तौर पर बदसलूकी करते हुए दिखाई देने की बात सामने आई है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वीडियो और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। जमुई प्रशासन की ओर से भी मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। महिला आयोग की अध्यक्ष ने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि महिलाओं और युवतियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। फिलहाल पुलिस वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

अखिलेश यादव पर मंत्री जयवीर सिंह का निशाना, बोले- ‘सपने में जी रहे हैं’

फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री जयवीर सिंह ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीतिक सक्रियता और सत्ता में वापसी के दावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह फिलहाल “सपने में जी रहे हैं।” मंत्री ने बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम का भी हवाला देते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा। जयवीर सिंह ने कहा कि बिहार की जनता ने ऐसे लोगों को लंबे समय तक सत्ता से दूर रखा है और वहां के राजनीतिक परिणामों से यह स्पष्ट हुआ है कि जनता किस तरह अपना जनादेश देती है। उन्होंने इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को राज्य की सत्ता से बाहर हुए अभी करीब 10 साल ही हुए हैं। मंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता भी अखिलेश यादव को लंबे समय तक सत्ता से बाहर रख सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बिहार में लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने का उदाहरण सामने आया है, उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी जनता अपने राजनीतिक फैसले के जरिए भविष्य की दिशा तय कर सकती है। जयवीर सिंह की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज है। अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की ओर से भी समय-समय पर प्रदेश सरकार की नीतियों और कामकाज को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में सत्ता पक्ष के नेताओं की ओर से आने वाले बयान राजनीतिक बहस को और धार दे रहे हैं। हालांकि, किसी भी चुनाव में अंतिम फैसला मतदाताओं के मतदान और चुनाव परिणाम से ही तय होता है। ऐसे में मंत्री जयवीर सिंह का बयान फिलहाल राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय में भाजपा और समाजवादी पार्टी समेत अन्य दलों के बीच मुद्दों और नीतियों को लेकर मुकाबला और तेज होने की संभावना है।

राहुल गांधी पर बरसे प्रतुल शाहदेव, बोले- ‘21वीं सदी के डॉन क्विक्सोट’

रांची: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतुल शाहदेव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई कथित मिमिक्री और टिप्पणी के बहाने निशाना साधा। यह विवाद इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान सामने आए एक मंचीय कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ है, जिसमें कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री मोदी की शैली की नकल की थी। भाजपा नेताओं ने इस प्रस्तुति को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं। प्रतुल शाहदेव ने राहुल गांधी की तुलना 21वीं सदी के ‘डॉन क्विक्सोट’ से करते हुए कहा कि जिस तरह डॉन क्विक्सोट अपने प्रयासों में हास्यास्पद स्थिति में पहुंच जाते थे, उसी तरह राहुल गांधी भी बार-बार ऐसी परिस्थितियां पैदा कर लेते हैं। उन्होंने राहुल गांधी की तुलना टाइटैनिक के कप्तान से करते हुए आरोप लगाया कि वे खुद ऐसी परिस्थितियां तलाशते हैं, जिनसे राजनीतिक विवाद खड़ा हो जाए। भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक बुजुर्ग महिला के लिए कुर्सी की व्यवस्था कराने की घटना को लेकर मंच से की गई मिमिक्री पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक, किसी बुजुर्ग महिला को सम्मानपूर्वक बैठाने के प्रयास में मजाक जैसा क्या है, यह समझ से परे है। प्रतुल शाहदेव ने इसे महिलाओं और बुजुर्गों के सम्मान से जोड़ते हुए राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने राहुल गांधी पर बेहद तीखा राजनीतिक हमला करते हुए उन्हें ‘भारतीय राजनीतिक व्यवस्था का सबसे बड़ा राजनीतिक जोकर’ तक कह दिया। साथ ही दावा किया कि जब तक राहुल गांधी कांग्रेस में रहेंगे, भाजपा के लिए राजनीतिक परिस्थितियां आसान रहेंगी। गौरतलब है कि इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए आलोचना की है, जबकि कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक व्यंग्य और मिमिक्री के रूप में देखा गया है। इस विवाद को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

पटना: 2005 से पहले बिहार की स्थिति पर सियासी बहस, श्याम रजक ने कही ये बात

पटना: बिहार की राजनीति में 2005 से पहले के शासन और उसके बाद हुए बदलाव को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के 2005 से पहले के लालू-राबड़ी शासन को लेकर दिए गए बयान पर JDU विधायक श्याम रजक ने प्रतिक्रिया दी है। श्याम रजक ने मंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि इसमें गलत क्या है, यह बिहार के इतिहास का हिस्सा है और इससे जुड़े तथ्य रिकॉर्ड में मौजूद हैं। श्याम रजक ने कहा कि वर्ष 2005 से पहले बिहार की स्थिति ठीक नहीं थी। उनके मुताबिक, उस दौर में राज्य के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं और विकास की रफ्तार भी प्रभावित थी। उन्होंने कहा कि बाद में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद शासन व्यवस्था में बदलाव लाने की कोशिश की गई और सुशासन को प्राथमिकता दी गई। JDU विधायक ने अपने बयान में यह भी कहा कि बिहार में बदलाव एक दिन में नहीं आया, बल्कि इसके पीछे लंबे समय तक किए गए प्रयास रहे। उनके अनुसार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सुधार को लेकर सरकार की ओर से लगातार काम किया गया। श्याम रजक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब बिहार में पुराने शासन और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। सत्ता पक्ष के नेता जहां 2005 के बाद के दौर को विकास और सुशासन से जोड़कर देखते हैं, वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार के दावों और नीतियों पर सवाल उठाता रहा है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच 2005 से पहले और बाद के बिहार की तुलना एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। श्याम रजक ने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उस दौर की परिस्थितियों का उल्लेख करना किसी व्यक्तिगत टिप्पणी से ज्यादा बिहार के राजनीतिक इतिहास का हिस्सा है। बिहार की राजनीति में यह मुद्दा आगे भी चर्चा में रहने की संभावना है, क्योंकि अलग-अलग राजनीतिक दल राज्य के विकास और शासन के अपने-अपने दौर को अलग नजरिए से पेश करते रहे हैं।

हामिद अंसारी के बयान पर सुधांशु त्रिवेदी का पलटवार, कांग्रेस और राहुल गांधी पर साधा निशाना

नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की ओर से नेहरू के कथित विचारों का हवाला दिए जाने के बाद भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश के संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति जब अपने विचार सार्वजनिक रूप से रखते हैं, तो उनके बयानों का राजनीतिक और सामाजिक असर भी होता है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हामिद अंसारी ने वर्ष 2019 में लिखी गई एक पुस्तक का संदर्भ देते हुए जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा एक दावा सामने रखा। उनके मुताबिक, इस संदर्भ में कहा गया कि नेहरू के लिए कम्युनिज्म की तुलना में हिंदू राष्ट्रवाद को बड़ा खतरा माना गया था। त्रिवेदी ने इसी बात को लेकर हामिद अंसारी पर निशाना साधा और कहा कि इससे कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक दिशा को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब अपनी पुरानी विचारधारा से काफी आगे बढ़कर वामपंथी रुख की ओर जा रही है। उन्होंने कांग्रेस को लेकर बेहद तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए दावा किया कि पार्टी की विचारधारा में बड़ा बदलाव आया है। हालांकि, ये सभी बातें त्रिवेदी के राजनीतिक आरोप और उनकी व्याख्या हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने अपने बयान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की ओर से दिए जाने वाले बयानों और राजनीतिक मुद्दों पर उनके रुख के पीछे कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक विचारधारा का प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने इसे कांग्रेस की वैचारिक विरासत से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। गौरतलब है कि हामिद अंसारी को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से पहले भी कई मौकों पर राजनीतिक सवाल उठाए जाते रहे हैं। जनवरी 2026 में भी महमूद गजनवी से जुड़े उनके एक बयान को लेकर भाजपा नेताओं ने उनकी आलोचना की थी और कांग्रेस से उनके विचारों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। इस पूरे मामले में एक तरफ भाजपा नेता हामिद अंसारी के बयानों को कांग्रेस की विचारधारा से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन टिप्पणियों को व्यापक राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।