महानदी जल विवाद पर जल्द समाधान की उम्मीद, सीएम विष्णुदेव साय बोले- दोनों राज्यों के हित में निकलेगा रास्ता

रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महानदी जल बंटवारे से जुड़े मामले को लेकर उम्मीद जताई है कि इसका समाधान जल्द निकल सकता है। ओडिशा दौरे से लौटने के बाद रायपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि अपने दो दिवसीय ओडिशा दौरे के दौरान उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की और दोनों राज्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। सीएम साय ने कहा कि महानदी जल से संबंधित विषय को लेकर दोनों प्रदेशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले का समाधान दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए सहमति से निकालने की दिशा में प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि महानदी जल से जुड़ा मामला पहले ट्रिब्यूनल के स्तर पर चल रहा था, लेकिन अब इसे केंद्रीय जल आयोग (CWC) को सौंपा गया है। उनके मुताबिक, संबंधित स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इस मुद्दे का समाधान होने की उम्मीद है। सीएम विष्णुदेव साय ने दोनों राज्यों के बीच मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा में बीजेपी की सरकार है, जबकि केंद्र में भी एनडीए की सरकार है। ऐसे में उनका मानना है कि आपसी बातचीत और सहमति के जरिए मामले को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल दोनों राज्यों के बीच किसी तरह के विवाद की स्थिति नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी एक राज्य के हित को प्राथमिकता देना नहीं, बल्कि दोनों प्रदेशों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशना है। महानदी जल को लेकर लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच अलग-अलग स्तर पर चर्चा होती रही है। ओडिशा दौरे के दौरान सीएम साय ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ अन्य विषयों पर भी चर्चा की। रायपुर लौटने के बाद उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल से उनके निवास पर जाकर मुलाकात की और विभिन्न विषयों पर बातचीत की।
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते से बढ़ेगा आर्थिक सहयोग, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और वर्ष 2030 तक सहयोग का नया रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत अगले चार से पांच वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। पीयूष गोयल के मुताबिक, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) इस लक्ष्य को वास्तविक आर्थिक अवसरों में बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है। समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के कारोबारियों और उद्योगों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ निवेश और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड ने इस समझौते को लागू करने के लिए 20 अक्टूबर की तारीख चुनी है। यह दिन भारत में दशहरा और विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने इस तारीख के सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि विजयादशमी को अच्छाई की बुराई पर जीत के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है और उन्हें उम्मीद है कि यह दिन भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते के लिए भी सकारात्मक शुरुआत लेकर आएगा। भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है। आने वाले वर्षों में समझौते के प्रभाव के आधार पर निर्यात, आयात, निवेश और कारोबारी सहयोग के क्षेत्रों में नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं। भारत सरकार का लक्ष्य व्यापारिक संबंधों को और व्यापक बनाते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को 2030 तक एक मजबूत आधार देना है।
विश्व अल्जाइमर दिवस पर लारा दत्ता ने साझा किया मां का अनुभव, बोलीं- भूलने की बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें

नई दिल्ली: विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर आयोजित एक जागरूकता सम्मेलन में अभिनेत्री लारा दत्ता भूपति ने अल्जाइमर और डिमेंशिया को लेकर लोगों से खुलकर बातचीत करने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। उन्होंने अपनी मां के अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उनका परिवार करीब एक दशक से इस चुनौती से जूझ रहा है। लारा दत्ता ने कहा कि अक्सर लोग अल्जाइमर को केवल भूलने की बीमारी मान लेते हैं, जबकि यह उससे कहीं अधिक गंभीर स्थिति है। उन्होंने बताया कि उनकी 80 वर्षीय मां लंबे समय से अल्जाइमर और डिमेंशिया के साथ जीवन जी रही हैं। अभिनेत्री के मुताबिक, उनकी मां की देखभाल में डॉक्टरों, परिवार के मजबूत सपोर्ट सिस्टम और केयरगिवर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अभिनेत्री ने कहा कि अल्जाइमर के बारे में सबसे जरूरी बात यह है कि लोग इसके बारे में बातचीत शुरू करें। उनका मानना है कि बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचानने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति में सोचने, समझने या याददाश्त से जुड़े बदलाव दिखाई देने लगें, तो उन्हें सामान्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लारा ने लोगों से अपील की कि परिवार में किसी सदस्य के व्यवहार या याददाश्त में लगातार बदलाव नजर आए तो अच्छे स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें और जरूरी सवाल पूछें। उन्होंने कहा कि समय रहते जानकारी मिलने से परिवार को आगे की देखभाल के लिए बेहतर तरीके से तैयार होने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्जाइमर से प्रभावित व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार और देखभाल करने वालों के लिए भी मजबूत सपोर्ट सिस्टम जरूरी होता है। बीमारी को लेकर सही जानकारी और समय पर मिलने वाली चिकित्सा सलाह परिवार को कई स्तरों पर मदद कर सकती है। विश्व अल्जाइमर दिवस का उद्देश्य भी अल्जाइमर और अन्य डिमेंशिया से जुड़ी जागरूकता बढ़ाना, शुरुआती संकेतों को समझने और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है। लारा दत्ता का व्यक्तिगत अनुभव इस बात को सामने लाता है कि ऐसी स्थितियों में परिवार, चिकित्सकों और देखभाल करने वालों का सहयोग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
मलकाजगिरी में 28 किलो गांजा जब्त, तीन गिरफ्तार

तेलंगाना के मेडचल-मलकाजगिरी जिले में आबकारी विभाग की कार्रवाई में गांजा तस्करी के दो अलग-अलग मामलों का खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने दोनों मामलों में कुल 28 किलो से अधिक सूखा गांजा बरामद कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। बरामदगी के साथ मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, पहली कार्रवाई मलकाजगिरी के आरके नगर ऑटो स्टैंड इलाके में की गई। आबकारी विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर, एनफोर्समेंट मलकाजगिरी के नेतृत्व में टीम ने संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के आधार पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान टीम ने 7.163 किलो सूखा गांजा और एक मोबाइल फोन बरामद किया। इस मामले में पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर निवासी बप्पा को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, दूसरे मामले में मलकाजगिरी की डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स (DTF) ने सिकंदराबाद स्थित पासपोर्ट ऑफिस के पास रूट वॉच के दौरान कार्रवाई की। टीम ने दो महिलाओं को संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा। उनकी पहचान इंदु रानी और राजम्मल पनजगम के रूप में हुई है। दोनों तमिलनाडु के मदुरै की रहने वाली बताई गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि दोनों महिलाओं के पास से 21 किलो सूखा गांजा और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को जानकारी मिली है कि यह गांजा विशाखापट्टनम (Vizag) एजेंसी क्षेत्र से लाया जा रहा था। हालांकि, गांजा कहां पहुंचाया जाना था और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच जारी है। आबकारी विभाग ने दोनों मामलों में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। कार्रवाई के बाद दोनों मामलों की केस फाइल और संबंधित दस्तावेज आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए मलकाजगिरी थाने के SHO को सौंप दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की आगे की जांच में गांजा सप्लाई करने वाले स्रोत, संभावित नेटवर्क और इसके पीछे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस और आबकारी विभाग की जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, कुनार में एयरस्ट्राइक की खबर; कई लोग हताहत

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। सोमवार, 21 सितंबर 2026 को पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में हवाई हमले किए जाने की खबर सामने आई है। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, हमलों में कुनार और पक्तिका प्रांत के कुछ इलाकों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कुनार प्रांत के नूरगल जिले में एक घर हवाई हमले की चपेट में आया। अफगान अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हुई, जबकि चार अन्य घायल बताए गए हैं। पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में भी हमले की जानकारी सामने आई है। वहां एक दुकान और एक खाली मकान को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। पाकिस्तान की ओर से इन हमलों को कथित तौर पर आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई बताया गया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि अफगानिस्तान में मौजूद कुछ आतंकवादी समूह पाकिस्तान में हमलों को अंजाम दे रहे हैं। वहीं, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और पाकिस्तान पर अपनी सीमा के भीतर सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाती है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पूरी पुष्टि तत्काल नहीं हो सकी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं। हाल के दिनों में पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों के बाद इस्लामाबाद ने अफगानिस्तान में मौजूद कथित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद सीमा पार सैन्य गतिविधियों की आशंका बढ़ गई थी। अफगान पक्ष ने एयरस्ट्राइक की निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ऐसे में ताजा हमलों के बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सुरक्षा विवाद का असर क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
मैरी कॉम से प्रेरित हैं सुचिका तारियाल, एशियन गेम्स की ऐतिहासिक उपलब्धि परिवार को समर्पित

नागोया, जापान: एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल जगत में अपनी पहचान बनाने वाली सुचिका तारियाल ने अपनी सफलता के पीछे की प्रेरणा का खुलासा किया है। सुचिका ने महान भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम को अपना आदर्श बताते हुए कहा कि वह बचपन से ही उनसे प्रभावित रही हैं। सुचिका के मुताबिक, मैरी कॉम को उन्होंने बचपन से पसंद किया है। उन्होंने बताया कि खेल कैंप के दौरान कई बार मैरी कॉम से उनका सामना हुआ, लेकिन उस समय दोनों के बीच व्यक्तिगत बातचीत का मौका नहीं मिल पाया। सुचिका ने कहा कि वह मैरी कॉम को हमेशा एक प्रेरणादायक खिलाड़ी के तौर पर देखती रही हैं। उन्होंने बताया कि करीब 2009-10 के दौरान कैंप में मैरी कॉम से मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों के बीच सिर्फ अभिवादन तक ही बातचीत सीमित रही। सुचिका ने कहा कि अगर भविष्य में उन्हें अपनी पसंदीदा खिलाड़ी से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने का अवसर मिलता है, तो वह जरूर उनसे बात करना चाहेंगी। सुचिका के लिए एशियन गेम्स में जीता गया कांस्य पदक सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार के लंबे समर्थन और सहयोग का भी परिणाम है। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को खास तौर पर अपने माता-पिता और पति को समर्पित किया। सुचिका ने कहा कि उनके परिवार ने हर मुश्किल दौर में उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। खेल के सफर में परिवार का समर्थन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। एशियन गेम्स में पदक जीतना सुचिका के करियर का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। उनकी कहानी यह भी बताती है कि किसी बड़े खिलाड़ी से मिली प्रेरणा किस तरह युवा खिलाड़ियों के सपनों और लक्ष्य को दिशा दे सकती है। बचपन में जिस मैरी कॉम को सुचिका अपना आदर्श मानती थीं, आज उसी प्रेरणा को अपने खेल सफर का हिस्सा बनाकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया है।
Tata Group Stocks: टाटा के शेयरों में फिर गिरावट, जानिए क्यों बढ़ा बिकवाली का दबाव

नई दिल्ली। टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में सोमवार, 21 सितंबर को एक बार फिर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में कई बड़े टाटा स्टॉक्स 2 फीसदी तक या उससे ज्यादा नीचे कारोबार करते नजर आए। यह गिरावट शुक्रवार के कमजोर प्रदर्शन के बाद आई है। बाजार में टाटा ग्रुप से जुड़े शेयरों पर नजर इसलिए भी बनी हुई है, क्योंकि समूह के शीर्ष स्तर पर कॉरपोरेट गवर्नेंस और नेतृत्व को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। Tata Trusts और Tata Sons के बीच विवाद शेयर बाजार में मौजूदा कमजोरी की सबसे बड़ी वजह Tata Sons और Tata Trusts के बीच बढ़ता मतभेद माना जा रहा है। विवाद Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल से जुड़ा है। 17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को एक और पांच साल का कार्यकाल देने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया था। इस फैसले का Tata Trusts की ओर से विरोध किया गया है। Trusts ने इस प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाते हुए अपने मतदान अधिकारों का मुद्दा उठाया है। मामला अब कानूनी रास्ते की ओर बढ़ने की संभावना के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है। Tata Trusts की ओर से प्रस्ताव को चुनौती देने की बात सामने आने के बाद बाजार में यह आशंका बनी है कि समूह के शीर्ष स्तर पर विवाद आगे भी जारी रह सकता है। किन शेयरों पर दिखा ज्यादा असर? सोमवार के शुरुआती कारोबार में Tata Chemicals करीब 3 फीसदी तक कमजोर हुआ। इसके अलावा NELCO, Tata Power, Tata Investment और Tata Technologies में भी गिरावट दर्ज की गई। Tata Capital, Tata Motors PV, Tata Communications और TCS जैसे शेयरों पर भी शुरुआती दबाव देखा गया। हालांकि, सभी टाटा शेयरों में एक जैसी गिरावट नहीं रही और कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती भी दिखाई दी। निवेशकों की चिंता क्या है? टाटा ग्रुप के शेयरों को लंबे समय से मजबूत ब्रांड और कॉरपोरेट गवर्नेंस के कारण बाजार में खास महत्व मिलता रहा है। ऐसे में समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व और बोर्ड से जुड़ा विवाद निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह विवाद लंबे समय तक चलता है तो इसका असर निवेशकों की धारणा और कुछ टाटा कंपनियों के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग टाटा कंपनियों के अपने प्रबंधन और कारोबारी संचालन हैं। इसलिए समूह स्तर के विवाद का असर हर कंपनी पर समान होना जरूरी नहीं है। फिलहाल बाजार की नजर Tata Sons-Tata Trusts विवाद से जुड़े अगले घटनाक्रम और नेतृत्व को लेकर स्पष्टता पर बनी हुई है।
चेन्नई में पुलिस सब-इंस्पेक्टर की मौत का मामला, पत्नी गिरफ्तार

चेन्नई के नुंगमबक्कम इलाके में 58 वर्षीय पुलिस सब-इंस्पेक्टर की मौत के मामले में पुलिस ने उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच के दौरान महिला ने दावा किया था कि उसने अपने पति को घर के एक कमरे में मृत पाया था। कमरे में धुआं भरा हुआ था और इसी वजह से घटना को लेकर शुरुआत में अलग तरह की आशंका जताई गई थी। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को मामले में कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे कहानी पर सवाल उठने लगे। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद महिला के बयान और मौके से मिले तथ्यों की जांच की गई। जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि मृतक के खाने में नींद की गोलियां मिलाई गई थीं। इसके बाद पुलिस ने मामले को संदिग्ध मौत के बजाय आपराधिक जांच के तौर पर आगे बढ़ाया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मृतक की पत्नी को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि मृतक पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे और उनकी उम्र 58 वर्ष थी। घटना उनके चेन्नई स्थित आवास की बताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाने में नींद की दवा मिलाने के पीछे कथित तौर पर क्या वजह थी और इसके बाद कमरे में धुआं भरने की स्थिति कैसे बनी। जांच एजेंसियां घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि मृतक की तबीयत बिगड़ने के बाद घर में क्या-क्या हुआ और घटना से पहले या बाद में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच से मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट करने में मदद मिलने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
दवाओं और मेडिकल डिवाइस की सुरक्षा को लेकर WHO का जोर, भारत के साथ मिलकर हो रहा काम

नई दिल्ली: स्वास्थ्य सेवाओं में दवाओं, मेडिकल डिवाइस और अन्य चिकित्सा उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के भारत प्रतिनिधि डॉ. यवुआन जे. एफ. ह्यूटिन ने फार्माकोविजिलेंस और हेल्थकेयर सेफ्टी मॉनिटरिंग को लेकर भारत में चल रहे सहयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। डॉ. ह्यूटिन के मुताबिक, WHO भारत की इंडिया फार्माकोपिया कमीशन (IPC) के साथ कई स्तरों पर मिलकर काम कर रहा है। इस सहयोग में चिकित्सा उत्पादों के मानक तय करने से लेकर उनकी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने तक कई पहल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल डिवाइस समेत विभिन्न स्वास्थ्य उत्पादों से जुड़े जोखिमों की पहचान और उनकी निगरानी के लिए तैयार किए जा रहे दिशा-निर्देश इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों और संस्थानों को ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिससे संभावित सुरक्षा जोखिमों को समय रहते पहचाना जा सके और आवश्यक कदम उठाए जा सकें। WHO प्रतिनिधि ने कहा कि हेल्थकेयर सेफ्टी केवल किसी एक संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, नियामक संस्थाओं और अन्य संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना जरूरी है। उन्होंने इसे एक साझा प्रयास बताते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुरक्षा की संस्कृति को लगातार मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। डॉ. ह्यूटिन के अनुसार, मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था विकसित करने के लिए निगरानी, मानकों और बेहतर दिशा-निर्देशों के साथ-साथ सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने भारत सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया और कहा कि देश में स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े इस लक्ष्य को लेकर सरकार लगातार गंभीरता से काम कर रही है। फार्माकोविजिलेंस का उद्देश्य दवाओं और चिकित्सा उत्पादों के इस्तेमाल से जुड़े संभावित प्रतिकूल प्रभावों की पहचान, निगरानी और मूल्यांकन करना है। ऐसे प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने और मरीजों के हितों की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।
ग्राम संसद से विकसित बिहार की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत: सम्राट चौधरी

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद–बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम में ग्रामीण लोकतंत्र और पंचायतों की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम संसद के माध्यम से सिर्फ स्थानीय समस्याओं पर चर्चा ही नहीं, बल्कि विकास को लेकर नए सुझाव भी सामने आने चाहिए। सम्राट चौधरी ने कहा कि ग्राम संसद के मंच से यह विचार किया जाना चाहिए कि बिहार किस तरह प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी को विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर से आने वाले सुझाव योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बिहार के भविष्य को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा समृद्ध बिहार की कल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2037 राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। ऐसे में आने वाले वर्षों में बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अभी से स्पष्ट लक्ष्य और दिशा तय करने की जरूरत है। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक व्यवस्था की भूमिका पर भी मुख्यमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को तीन स्तरों में समझा जा सकता है और आम तौर पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी जैसे पदों को सत्ता के प्रमुख केंद्रों के रूप में देखा जाता है। हालांकि, उनके अनुसार गांव के स्तर पर मुखिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सम्राट चौधरी ने कहा कि मुखिया सीधे तौर पर गांव की जनता से जुड़े होते हैं और स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में जिम्मेदारियां संभालते हैं। उन्होंने पंचायत चुनावों की प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे-जैसे लोकतांत्रिक व्यवस्था जमीनी स्तर तक पहुंचती है, चुनाव उतना ही चुनौतीपूर्ण होता जाता है। मुख्यमंत्री के मुताबिक ग्राम संसद को मजबूत बनाकर ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। इसके जरिए स्थानीय जरूरतों, विकास योजनाओं और भविष्य की प्राथमिकताओं पर संवाद को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने बिहार को समृद्ध बनाने के लक्ष्य के लिए पंचायतों और ग्रामीण प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।