जेवर एयरपोर्ट के नामकरण पर केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान, बोले- ऐतिहासिक फैसला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के नामकरण को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कैबिनेट के फैसले को ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर एयरपोर्ट का नाम रखे जाने से प्रदेशवासियों में खुशी का माहौल है और यह फैसला देशभर में सकारात्मक संदेश देगा। केशव प्रसाद मौर्य ने फैसले को बताया ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगातार तीसरी बार लोकसभा सांसद चुना जाना और तीसरी बार देश का प्रधानमंत्री बनना उनके राजनीतिक सफर की बड़ी उपलब्धि है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ रखे जाने से प्रदेश के लोगों में प्रसन्नता है। उन्होंने इस नामकरण को प्रधानमंत्री के राजनीतिक कद और उनकी उपलब्धियों के अनुरूप बताया। देशभर में जाएगा खुशी का संदेश केशव प्रसाद मौर्य के अनुसार, इस फैसले का संदेश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से एयरपोर्ट का नामकरण करना एक अच्छा निर्णय है। जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना से हवाई संपर्क को बेहतर बनाने, कारोबार को बढ़ावा देने और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भी हवाई यातायात के क्षेत्र में लाभ मिल सकता है। विकास और कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम है एयरपोर्ट जेवर एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से निवेश, पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। फिलहाल, नामकरण को लेकर केशव प्रसाद मौर्य ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया है। एयरपोर्ट का नाम बदलने से जुड़ी आधिकारिक प्रक्रिया और परियोजना की आगे की प्रगति पर भी लोगों की नजर बनी रहेगी।

पटना से दिल्ली जाने वाले रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, आज 4 प्रमुख ट्रेनें रद्द

पटना। दिल्ली में कल हुए बड़े प्रदर्शन के बाद पटना और आसपास के क्षेत्रों से राजधानी दिल्ली जाने वाले रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। आज पटना से दिल्ली के बीच चलने वाली चार प्रमुख ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी दी गई है। इससे यात्रियों की यात्रा योजना प्रभावित हो सकती है। अगर आप आज दिल्ली जाने के लिए ट्रेन से सफर करने वाले हैं, तो घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर जांच लें। अचानक ट्रेन रद्द होने की स्थिति में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आज रद्द रहने वाली प्रमुख ट्रेनें आज पटना और आसपास के क्षेत्रों से नई दिल्ली के लिए चलने वाली इन चार ट्रेनों के नाम सामने आए हैं। तेजस राजधानी एक्सप्रेस: राजेंद्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन। संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस: राजेंद्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली के बीच चलने वाली प्रमुख ट्रेन। अमृत भारत एक्सप्रेस: राजेंद्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन। मगध एक्सप्रेस: इस्लामपुर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली ट्रेन। यात्रा से पहले जरूर करें ये काम इन ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या NTES ऐप पर ट्रेन की स्थिति की पुष्टि कर लें। टिकट बुक करा चुके यात्री रद्दीकरण और रिफंड से संबंधित नियमों की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान दें: ट्रेनें रद्द होने की सूचना और उसके कारण की आधिकारिक पुष्टि रेलवे के अपडेट से जरूर करें, ताकि यात्रा के दौरान अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।

CM मोहन यादव ने पीएम मोदी को दी बधाई, लंबी उम्र की कामना की

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम के तहत आयोजित रंगोली प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 सफल वर्षों का उल्लेख करते हुए उन्हें बधाई दी और उनके दीर्घायु होने की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के राजनीतिक सफर को जनसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पित बताते हुए उनके योगदान की सराहना की। रंगोली प्रतियोगिता के जरिए दिखा सेवा और राष्ट्रभक्ति का संदेश भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के कार्यकर्ताओं और बच्चों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश देने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि संगठन के साथियों और बच्चों के साथ मिलकर यहां रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से लोगों को एक साथ जोड़ने और सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने का अवसर मिलता है। पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की सराहना मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन के 25 वर्षों को बेहद सफल बताते हुए उनके प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह सफर जनसेवा और कल्याणकारी कार्यों के लिए जाना जाता है। मोहन यादव ने अपनी ओर से और मध्य प्रदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। उनके बयान में प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और सेवा से जुड़े कार्यों के प्रति सम्मान का भाव दिखाई दिया। जनसेवा और जनकल्याण पर दिया जोर मुख्यमंत्री के संबोधन में सेवा, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषय प्रमुख रहे। रंगोली प्रतियोगिता में बच्चों और संगठन के सदस्यों की भागीदारी ने कार्यक्रम को एक सामूहिक गतिविधि का स्वरूप दिया। इस आयोजन के माध्यम से सेवा भावना और राष्ट्रहित से जुड़े विचारों को सामने रखने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के लंबे राजनीतिक सफर को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना की। मुख्य बात: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम में रंगोली प्रतियोगिता का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी के राजनीतिक जीवन के 25 सफल वर्षों पर बधाई दी और उनके दीर्घायु होने की कामना की।

UP News: जल जीवन मिशन की नई नीति में 19 अहम प्रावधान, पानी की सप्लाई और शिकायतों पर रहेगा जोर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और आम लोगों को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन (JJM) की संशोधित नीति 2026 को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कैबिनेट बैठक के संबंध में बताया कि संशोधित नीति में कुल 19 बिंदुओं को शामिल किया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य जल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना, पाइपलाइन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान करना है। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के मुताबिक, नई नीति में जल जीवन मिशन से जुड़े विभिन्न हितधारकों की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है। इससे पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में शामिल संबंधित पक्षों के दायित्व तय करने में मदद मिलेगी। सरकार का जोर इस बात पर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था व्यवस्थित और प्रभावी बनी रहे। पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने पर दंड का प्रावधान संशोधित नीति में पाइपलाइन से जुड़ी चोरी और उसे नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों को भी ध्यान में रखा गया है। मंत्री ने बताया कि यदि पाइपलाइन की चोरी होती है या उसे क्षति पहुंचाई जाती है, तो संबंधित मामले में दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे। इसका उद्देश्य जल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखना और पानी की बर्बादी को रोकना है। नियमित जल आपूर्ति के लिए नागरिक चार्टर नई नीति की एक प्रमुख विशेषता जनहित गारंटी अधिनियम के तहत जल आपूर्ति से संबंधित नागरिक चार्टर की स्थापना है। इसके माध्यम से जल आपूर्ति सेवाओं के संबंध में नागरिकों के अधिकारों और व्यवस्था की जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट किया कि लोगों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही जल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए शिकायत निस्तारण तंत्र विकसित किए जाने की जानकारी भी दी गई। प्राकृतिक आपदा के दौरान भी पानी उपलब्ध कराने पर जोर मंत्री के बयान के अनुसार, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भी लोगों को जल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है। आपात परिस्थितियों में पेयजल की उपलब्धता लोगों की बुनियादी जरूरतों और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती है। कुल मिलाकर, जल जीवन मिशन की संशोधित नीति 2026 में नियमित जल आपूर्ति, पाइपलाइन की सुरक्षा, जिम्मेदारियों का निर्धारण और शिकायतों के निस्तारण को प्रमुखता दी गई है। अब इन प्रावधानों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होगा, ताकि नागरिकों को समय पर और बेहतर जल आपूर्ति सेवाओं का लाभ मिल सके।  

जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने की तैयारी, ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने का प्रस्ताव पास

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि राज्य मंत्रिपरिषद ने एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति देने के साथ भविष्य में देश के प्रमुख एविएशन हब के रूप में उभर सकता है। मंत्रिपरिषद ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद की ओर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके तहत एयरपोर्ट का नया प्रस्तावित नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ होगा। यह फैसला राज्य में एयरपोर्ट परियोजना को लेकर चल रही विकास योजनाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रस्ताव पारित होने के बाद नाम परिवर्तन की आगे की आधिकारिक प्रक्रिया और आवश्यक मंजूरियां भी अहम होंगी। उत्तर प्रदेश को मिलेगा बड़ा हवाई संपर्क केंद्र जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। इस एयरपोर्ट से दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को हवाई यात्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट के पूरी तरह विकसित होने के साथ क्षेत्र में कारोबार, पर्यटन, परिवहन और निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, हवाई माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मिल सकती है गति नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण और संचालन से आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। होटल, परिवहन, वेयरहाउसिंग, व्यापार और अन्य सहायक सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी फायदा मिल सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट को प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। सरकार की उम्मीद है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति और हवाई संपर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर आगे की औपचारिक प्रक्रिया कब पूरी होती है और एयरपोर्ट को नए नाम से आधिकारिक पहचान कब मिलती है।

शायना एनसी का ममता बनर्जी पर हमला, बोलीं- जंतर-मंतर पर नौटंकी बंद कीजिए

मुंबई: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना नेता शायना एनसी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनसे पहले पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और कथित फर्जी मतदाताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। शायना एनसी ने अपने बयान में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में 60 लाख फर्जी वोट थे। हालांकि, यह आंकड़ा उनके बयान में किया गया दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और दस्तावेजों को देखना जरूरी है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर साधा निशाना शायना एनसी ने कहा कि ममता बनर्जी जंतर-मंतर आकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे मौजूद हैं, तो ममता बनर्जी को पहले अपने राज्य की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। शिवसेना नेता ने अपने बयान में ममता बनर्जी के आंदोलन पर भी टिप्पणी की और कहा कि उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के बजाय बंगाल में SIR से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने इस राजनीतिक पहल को लेकर कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “जंतर-मंतर पर नौटंकी बंद कीजिए।” बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर भी लगाया आरोप अपने बयान के दौरान शायना एनसी ने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का आंदोलन ऐसे लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह शायना एनसी का राजनीतिक आरोप है। इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र प्रमाण और संबंधित तथ्यों की जांच आवश्यक है। SIR पर सियासी टकराव तेज मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही बहस जारी है। एक ओर इस प्रक्रिया को चुनावी सूची की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके क्रियान्वयन और मतदाताओं पर संभावित प्रभाव को लेकर राजनीतिक सवाल उठाए जा रहे हैं। शायना एनसी के ताजा बयान से इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिलते हैं। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल, यह मामला चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में बना हुआ है।

राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे का हमला, अंबानी-अडानी के मुद्दे पर उठाए सवाल; स्टारलिंक लाइसेंस पर भी दी प्रतिक्रिया

देवघर, झारखंड। अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क की ओर से ‘रियल बॉस अंबानी’ को लेकर की गई पोस्ट पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए उनके रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को भारतीय कारोबारियों से परेशानी है, जबकि वे अमेरिकी कारोबारियों के प्रति सकारात्मक नजरिया रखते हैं। 🔴 भारतीय कारोबारियों को लेकर राहुल गांधी पर निशाना देवघर में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को अंबानी और अडानी जैसे भारतीय उद्योगपति पसंद नहीं हैं, क्योंकि वे भारत में कारोबार करते हैं और यहीं अपना पैसा रखते हैं। इसके विपरीत, उनके मुताबिक राहुल गांधी अमेरिकी कारोबारियों को पसंद करते हैं। दुबे ने इसी आधार पर राहुल गांधी की व्यापार और उद्योग से जुड़ी सोच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी कारोबारी का विरोध किया जा रहा है, तो विरोध सभी कारोबारियों के लिए एक समान होना चाहिए। किसी खास उद्योगपति के खिलाफ विरोध और दूसरे कारोबारियों के प्रति अलग रुख अपनाना उचित नहीं है। हालांकि, ये टिप्पणियां भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के राजनीतिक आरोप हैं। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और इस पूरे विवाद पर कांग्रेस का पक्ष भी इस बहस का अहम पहलू है। 🔴 अमेरिका के इशारे पर काम करने का लगाया आरोप निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अमेरिका के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय उद्योगपतियों को लेकर राहुल गांधी की आलोचना और अमेरिकी कारोबारियों के प्रति उनके कथित समर्थन के बीच तुलना की। यह बयान ऐसे समय आया है, जब एलन मस्क की पोस्ट और उस पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। इस मुद्दे ने उद्योगपतियों, व्यापारिक हितों और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। 🔴 स्टारलिंक के लाइसेंस पर क्या बोले दुबे? भाजपा सांसद ने एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक का जिक्र करते हुए कहा कि यदि भारत सरकार ने कंपनी को अभी तक जरूरी सुविधाएं नहीं दी हैं या लाइसेंस जारी नहीं किया है, तो इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। दुबे ने दावा किया कि रक्षा मंत्रालय ने भी इस विषय को उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टारलिंक जैसी कंपनी को भारत में काम करने की अनुमति देने के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। 🔴 राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में निशिकांत दुबे के इस बयान से स्पष्ट है कि विवाद अब केवल भारतीय उद्योगपतियों पर राजनीतिक टिप्पणियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विदेशी कंपनियों के भारत में कारोबार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल भी शामिल हो गए हैं। स्टारलिंक को लाइसेंस और सुविधाएं देने के संबंध में अंतिम स्थिति जानने के लिए संबंधित सरकारी विभागों की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, दुबे के बयान ने राहुल गांधी, भारतीय उद्योगपतियों और विदेशी कारोबारी कंपनियों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। (नोट: रिपोर्ट भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के उपलब्ध बयान पर आधारित है। उनके आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्यों के रूप में नहीं, बल्कि उनके बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।)

फरक्का जलसंधि पर ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम, उद्घाटन के बाद 15 मिनट में निकले नीतीश कुमार

पटना: बिहार की राजनीति में फरक्का जलसंधि का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। इसी विषय पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश कार्यालय में ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार भी पहुंचे। उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन किया, लेकिन इसके करीब 15 मिनट बाद ही वहां से रवाना हो गए। जदयू प्रदेश कार्यालय में हुआ कार्यक्रम फरक्का जलसंधि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम को जदयू की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। फरक्का बैराज और उससे जुड़े जल प्रबंधन के सवाल बिहार के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। गंगा के जल प्रवाह, बाढ़ की स्थिति और राज्य के हितों को लेकर इस विषय पर समय-समय पर चर्चा होती रही है। नीतीश कुमार ने किया उद्घाटन ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम में नीतीश कुमार की मौजूदगी खास रही। पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने प्रदेश कार्यालय पहुंचकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। हालांकि, उनकी मौजूदगी ज्यादा देर तक नहीं रही। उद्घाटन के लगभग 15 मिनट बाद ही वह कार्यक्रम स्थल से निकल गए। उनके जल्दी रवाना होने के कारण कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनके जल्द निकलने की वजह स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे लेकर किसी तरह का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। बिहार के हितों से जुड़ा है फरक्का का मुद्दा फरक्का जलसंधि का विषय बिहार के लिए केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है। इसका संबंध गंगा नदी के प्रवाह, बाढ़ की समस्या और राज्य की दीर्घकालिक जल संबंधी जरूरतों से भी जुड़ता है। ऐसे में इस मुद्दे पर होने वाली राजनीतिक चर्चा का महत्व बढ़ जाता है। फिलहाल कार्यक्रम की प्रमुख बात नीतीश कुमार का उद्घाटन के लिए पहुंचना और करीब 15 मिनट बाद वहां से रवाना होना रही। अब इस कार्यक्रम में फरक्का जलसंधि को लेकर हुई चर्चा और सामने आने वाले राजनीतिक बयानों पर नजर रहेगी।

राहुल गांधी और एलन मस्क की बातचीत पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का पलटवार, कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली: राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर हुई बातचीत के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मामले पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति पहले से तय है और इस मामले में किसी तरह का भ्रम नहीं है। सिंधिया ने लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाए। सरकार की नीति स्पष्ट, तीन कंपनियों को मिला लाइसेंस केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि संबंधित सेवा के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाइसेंस केवल किसी एक कंपनी को नहीं दिया गया है, बल्कि तीन पक्षों को इसके लिए अनुमति मिली है। सिंधिया के मुताबिक, सरकार जब राजस्व आधारित शुल्क व्यवस्था तय करेगी, तब संबंधित कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा। इसके बाद प्रत्येक कंपनी को निर्धारित सुरक्षा शर्तों को अलग-अलग पूरा करना होगा। इन शर्तों का पालन करने के बाद ही कंपनियां अपनी सेवाएं शुरू कर सकेंगी। सिंधिया ने साफ किया कि लाइसेंस मिलना और सेवाओं का संचालन शुरू करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। कांग्रेस के रुख पर उठाए सवाल केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को खुद स्पष्ट नहीं है कि वह किस दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले एक व्यक्ति को लाइसेंस दिए जाने पर आपत्ति जता रही थी, लेकिन अब उसी मामले में लाइसेंस नहीं मिलने को लेकर सवाल उठा रही है। सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस के बयानों में विरोधाभास दिखाई देता है। हालांकि, ये टिप्पणियां केंद्रीय मंत्री का राजनीतिक आकलन हैं और इन्हें कांग्रेस के आधिकारिक पक्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। लाइसेंस के बाद सुरक्षा शर्तें होंगी अहम इस पूरे मामले में सरकार की ओर से मुख्य जोर लाइसेंस, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी नियमों के पालन पर है। सिंधिया ने दोहराया कि सरकार अपनी नीति को लेकर स्पष्ट है और कंपनियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही परिचालन की अनुमति मिलेगी। राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच हुई बातचीत के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में आ गया है। अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया और सरकार की ओर से तय किए जाने वाले शुल्क संबंधी नियमों पर नजर रहेगी।

फरक्का जलसंधि पर संजय झा का बड़ा बयान, बोले- दोबारा हो तो बिहार के हितों का रखा जाए ध्यान

पटना। फरक्का बैराज और उससे जुड़े जल प्रबंधन के मुद्दे पर बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चा तेज हो सकती है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता संजय झा ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि फरक्का से जुड़े समझौते या व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाता है, तो उसमें बिहार के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके बयान ने गंगा नदी के जल प्रबंधन, बाढ़ की समस्या और बिहार के दीर्घकालिक हितों को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को सामने ला दिया है। बिहार के हितों को मिले प्राथमिकता संजय झा का कहना है कि फरक्का से संबंधित किसी भी नए समझौते या समीक्षा में बिहार की जरूरतों और परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। राज्य लंबे समय से गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव, बाढ़ और जल निकासी जैसी चुनौतियों का सामना करता रहा है। ऐसे में नदी से जुड़े किसी भी बड़े फैसले का असर बिहार पर किस तरह पड़ेगा, इस पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह है कि भविष्य में यदि फरक्का को लेकर कोई नई व्यवस्था बनती है, तो उसमें बिहार के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। बाढ़ और जल प्रबंधन का मुद्दा अहम बिहार के लिए गंगा नदी का विशेष महत्व है। राज्य के कई जिलों में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति पैदा होती है। इससे किसानों की फसलों, ग्रामीण इलाकों, सड़कों और आम जनजीवन पर असर पड़ता है। बाढ़ के कारण कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है, जबकि राहत और बचाव कार्यों पर भी प्रशासन को काफी संसाधन लगाने पड़ते हैं। हालांकि, फरक्का बैराज और बिहार में बाढ़ की समस्या के बीच संबंध को समझने के लिए नदी के प्रवाह, गाद जमाव, सहायक नदियों, वर्षा और जल निकासी सहित विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं का आकलन जरूरी है। इसलिए इस विषय पर किसी भी निर्णय में विशेषज्ञों की राय और तकनीकी अध्ययन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। नीति निर्धारण में बिहार की भागीदारी जरूरी फरक्का से जुड़े किसी भी समझौते या नीति की समीक्षा के दौरान बिहार की भौगोलिक स्थिति, कृषि, जल संसाधन और बाढ़ प्रबंधन की जरूरतों को शामिल करना अहम माना जा रहा है। राज्य के हितों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार, संबंधित राज्यों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच समन्वय भी जरूरी है। संजय झा के बयान से यह स्पष्ट होता है कि फरक्का के मुद्दे पर बिहार के हितों को चर्चा के केंद्र में रखने की मांग की जा रही है। अब इस विषय पर आगे की राजनीतिक और नीतिगत चर्चा में क्या रुख सामने आता है, इस पर नजर रहेगी। बिहार के लिए फरक्का का सवाल केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाढ़ नियंत्रण, कृषि और राज्य के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।