नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्लास्टिक कचरे की बढ़ती चुनौती पर जोर दिया। दिल्ली में आयोजित पर्यावरण और जलवायु से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में प्लास्टिक वेस्ट भी शामिल है। इससे निपटने के लिए भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी लगातार काम कर रहा है। इसके लिए Reduce, Reuse और Recycle यानी कम उपयोग, दोबारा इस्तेमाल और पुनर्चक्रण के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सोच के जरिए देश में सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
पीएम मोदी के मुताबिक, कचरे को केवल बेकार सामग्री मानने के बजाय उसे दोबारा उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरे का प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण किया जा रहा है। इससे एक तरफ कचरे के निपटारे की समस्या कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर संसाधनों का दोबारा उपयोग संभव हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक कचरे के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने गोबरधन योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि गांवों में गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदला जा रहा है। इस प्रक्रिया से कचरा प्रबंधन के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित न रखने की जरूरत पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री के संदेश में कचरे को कम करने, उपलब्ध संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने पर जोर रहा।
भारत में प्लास्टिक प्रदूषण और कचरा प्रबंधन से जुड़ी नीतियों के बीच सरकार का फोकस अब ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें कचरे का अधिकतम उपयोग हो और संसाधनों की बर्बादी को कम किया जा सके। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ विकास की दिशा में भी आगे बढ़ने का लक्ष्य है।