पटना: राजधानी पटना के ज्ञान भवन में 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद के महत्व और बदलती जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी और खान-पान की बदलती आदतों का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, अनिद्रा और फैटी लिवर जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, अनियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खान-पान में असंतुलन जैसी आदतें लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
मंत्री ने कहा कि आयुर्वेद केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और शरीर को संतुलित रखने की भारतीय परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने पर आयुर्वेद में विशेष जोर दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि भारत ने आयुर्वेद को देश की सीमाओं से बाहर भी पहचान दिलाने का काम किया है। आज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोग भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और उसके सिद्धांतों के प्रति रुचि दिखा रहे हैं। आयुर्वेद दिवस जैसे आयोजनों के माध्यम से इसके महत्व और संभावनाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
मंत्री निशांत कुमार ने बिहार की प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार का आयुर्वेद से पुराना और समृद्ध संबंध रहा है। राज्य में पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की लंबी विरासत रही है, जिसे आधुनिक दौर में नई तकनीक और शोध के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, स्वस्थ खान-पान अपनाने और बदलती जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ पारंपरिक ज्ञान और जीवनशैली आधारित स्वास्थ्य दृष्टिकोण को लेकर भी जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है।