नई दिल्ली: ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 53वें नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की आर्थिक प्रगति और बुनियादी ढांचे में हो रहे बदलावों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में अब एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। भारत मुख्य रूप से खर्च या खपत को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि निवेश को गति देने के लिए कर्ज ले रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह बदलाव भारत जैसे उभरते देशों के लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, सरकार की प्राथमिकता पूंजी निर्माण और ऐसी परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाने की है, जिनसे आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को मजबूती मिल सके।
सीतारमण ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रमुख बंदरगाहों पर औसत टर्नअराउंड टाइम पिछले एक दशक में लगभग आधा हुआ है। वहीं, देश का रेल नेटवर्क लगभग पूरी तरह विद्युतीकृत हो चुका है। माल ढुलाई के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज किया गया है और फ्रेट लोडिंग करीब 1,670 मिलियन टन तक पहुंच गई है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर वित्त मंत्री ने बताया कि अगस्त 2026 में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रतिदिन औसतन करीब 79 करोड़ लेनदेन हुए। उन्होंने इसे देश में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार का संकेत बताया।
वित्त मंत्री के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। राज्यों को पूंजीगत संपत्तियां बनाने के लिए दिए जाने वाले अनुदानों को शामिल करने पर प्रभावी पूंजीगत व्यय 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाता है।
सीतारमण ने कहा कि प्रभावी पूंजीगत व्यय का यह स्तर केंद्र के पूरे राजकोषीय घाटे के लगभग बराबर है। उनके मुताबिक, सरकारी खर्च में निवेश का बढ़ता हिस्सा भारत की अर्थव्यवस्था में हो रहे व्यापक बदलाव को दर्शाता है।