नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने SIR की प्रक्रिया की तुलना अमेरिका में नस्लीय अलगाव के दौर में लागू रहे Jim Crow Laws से की। कार्ति चिदंबरम का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक समावेशी बनाने के बजाय कथित तौर पर कुछ वास्तविक मतदाताओं को बाहर करने की दिशा में जा सकती है।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की मौजूदा कवायद का असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के वास्तविक निवासी और पात्र मतदाता हैं। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने SIR की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
कार्ति चिदंबरम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के समय में आयोग के फैसलों और चुनावी कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की कार्यशैली को भी निशाने पर लेते हुए इसे संवैधानिक पद की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं बताया।
हालांकि, निर्वाचन आयोग SIR को मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है। आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और अपात्र या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची की गुणवत्ता बेहतर करना है। आयोग ने यह भी कहा है कि पात्र मतदाता को सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
SIR को लेकर विपक्षी दलों और निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक बहस लगातार जारी है। एक तरफ विपक्ष प्रक्रिया में संभावित बहिष्करण और मताधिकार से जुड़े सवाल उठा रहा है, वहीं आयोग मतदाता सूची के सत्यापन और शुद्धिकरण को चुनावी प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा बता रहा है। ऐसे में SIR को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।