लखनऊ। ब्रिक्स समिट को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी दूसरे देश का प्रतिनिधिमंडल भारत आता है तो वह देश का मेहमान होता है और उसके स्वागत की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की होती है। ऐसे अवसरों पर राजनीतिक दलों के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष का अंतर नहीं होना चाहिए।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल के भारत आने का विषय केवल किसी एक राजनीतिक दल या सरकार तक सीमित नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों पर सभी पक्षों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा विपक्ष सरकार का विरोध करने में इतना व्यस्त हो गया है कि कई बार ऐसे मुद्दों पर भी बयान सामने आ जाते हैं, जहां राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मंचों से जुड़े कार्यक्रमों में भारत की छवि और राष्ट्रीय हित को सबसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों के स्वागत को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। मेहमानों का सम्मान भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। ऐसे में किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल के स्वागत को लेकर पक्ष और विपक्ष के आधार पर विभाजन उचित नहीं है।
ब्रिक्स समूह वैश्विक स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इसके माध्यम से सदस्य देश आर्थिक सहयोग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। ऐसे में ब्रिक्स से जुड़े कार्यक्रमों को भारत के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
केशव प्रसाद मौर्य के बयान के बाद एक बार फिर देशहित और राजनीतिक विरोध के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो सकती है। भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय हित से जुड़े विषयों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश की एकजुटता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।