रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका का दबाव, भारत और चीन को दी गई चेतावनी

अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

इस घटनाक्रम के बाद भारत और चीन का नाम भी चर्चा में आया है। अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने भारत और चीन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदना चाहिए।

ब्लूमेंथल का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए उसके ऊर्जा निर्यात से जुड़े देशों पर भी कार्रवाई के विकल्प तलाश रहा है। अमेरिकी नीति निर्माताओं का तर्क है कि रूस से होने वाली ऊर्जा खरीद उसके राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत है और इससे रूस को आर्थिक रूप से दबाव में लाने की कोशिशों पर असर पड़ सकता है।

प्रस्तावित विधेयक के तहत राष्ट्रपति को उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति मिल सकती है, जो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस या अन्य संबंधित ऊर्जा उत्पाद खरीदते हैं। हालांकि, अंतिम तौर पर कानून का स्वरूप और उसके तहत लागू होने वाली नीतियां आगे की विधायी प्रक्रिया और राष्ट्रपति के फैसलों पर निर्भर करेंगी।

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर विभिन्न देशों से कच्चे तेल की खरीद करता रहा है। रूस भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ नीति में संभावित बदलाव का असर भारत की ऊर्जा खरीद, व्यापार संबंधों और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।

वहीं, चीन भी रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात करता है। यदि अमेरिका रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लागू करता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार व्यवस्था और अमेरिका के साथ संबंधित देशों के आर्थिक संबंधों पर पड़ने की संभावना पर चर्चा तेज हो सकती है।

फिलहाल इस प्रस्ताव के आगे के विधायी चरण और अमेरिकी प्रशासन की अंतिम नीति पर नजर बनी हुई है। भारत की ओर से इस बयान और प्रस्तावित टैरिफ व्यवस्था पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की स्थिति अलग से महत्वपूर्ण होगी।

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