मुंबई में शिवसेना के चुनाव चिह्न और पार्टी की आधिकारिक पहचान को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच शिवसेना नेता संजय निरुपम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के अंतिम नतीजे को लेकर उन्हें भरोसा है कि फैसला उनकी पार्टी के पक्ष में आएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है और अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित है।
निरुपम ने अपने बयान में 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह का उल्लेख किया। उनका कहना है कि शिंदे के समर्थन में बड़ी संख्या में विधायक, सांसद और पार्टी कार्यकर्ता सामने आए थे। निरुपम के अनुसार, यह घटनाक्रम उनके गुट के दावे को मजबूत करता है।
उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के परिणामों को भी अपने पक्ष में एक महत्वपूर्ण आधार बताया। निरुपम का दावा है कि चुनाव में मतदाताओं ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन दिया और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को अलग जनादेश मिला। उनके मुताबिक, यह चुनावी परिणाम 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद जनता की प्रतिक्रिया को समझने का एक आधार है।
इस विवाद में चुनाव आयोग ने 2023 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को शिवसेना का नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न आवंटित किया था। इसी फैसले को उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
हाल की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के निर्णय से जुड़े कई अहम सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि यदि उपलब्ध मानदंड स्पष्ट नहीं थे, तो दोनों गुटों को आरक्षित चुनाव चिह्न देने से इनकार करने के विकल्प पर विचार क्यों नहीं किया गया।
ऐसे में शिवसेना के नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल दोनों पक्ष अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।