मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्य किरण एरोबेटिक टीम के हवाई प्रदर्शन को लेकर स्क्वाड्रन लीडर विक्रम ने टीम की कार्यप्रणाली और प्रदर्शन की अवधि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सूर्य किरण का पूरा एयर डिस्प्ले करीब 30 से 35 मिनट तक चलता है और इसे मुख्य रूप से दो हिस्सों में विभाजित किया गया है।
स्क्वाड्रन लीडर विक्रम के मुताबिक, आसमान में एक साथ दिखाई देने वाला यह शानदार प्रदर्शन बेहद सटीक तालमेल, अनुशासन और लंबे प्रशिक्षण का परिणाम होता है। प्रदर्शन के दौरान 9 विमान और 9 पायलट सीधे आसमान में उड़ान भरते हैं। हालांकि, इस पूरे शो को सफल बनाने के लिए केवल उड़ान भरने वाले पायलट ही जिम्मेदार नहीं होते, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी और समन्वित टीम काम करती है।
उन्होंने बताया कि सूर्य किरण टीम की कुल संरचना में 13 पायलट, एक कमेंटेटर और एक मेडिकल डॉक्टर शामिल हैं। वहीं विमानों की तकनीकी तैयारी, रखरखाव और उड़ान के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं को संभालने के लिए 3 से 4 इंजीनियरों की टीम भी मौजूद रहती है।
सूर्य किरण एरोबेटिक टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता, उड़ान कौशल और टीमवर्क का प्रदर्शन करने के लिए जानी जाती है। आसमान में विमानों की एक साथ तेज गति से उड़ान, सटीक फॉर्मेशन और अलग-अलग एरोबेटिक मूवमेंट दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
स्क्वाड्रन लीडर विक्रम ने जिस तरह टीम की संरचना और प्रदर्शन की अवधि के बारे में जानकारी दी, उससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ मिनटों का हवाई शो तैयार करने के पीछे पायलटों के साथ-साथ तकनीकी और सपोर्ट स्टाफ की भी अहम भूमिका रहती है।
मेरठ में सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन देखने वाले दर्शकों के लिए यह सिर्फ एक हवाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और सामूहिक समन्वय की झलक भी प्रस्तुत करता है।