UPI की फंडिंग और ₹2,000 लिमिट पर BJD सांसद संत्रप्त मिश्रा ने उठाए सवाल, बोले- नीति पर हो चर्चा

नई दिल्ली: भारत में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में UPI को एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव के तौर पर देखा जाता है। इसी मुद्दे को लेकर बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सांसद संत्रप्त मिश्रा ने UPI व्यवस्था की भविष्य की फंडिंग और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि UPI को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है और इस पर व्यापक स्तर पर चर्चा होनी चाहिए।

संत्रप्त मिश्रा के मुताबिक, UPI भारत में विकसित हुई एक ऐसी व्यवस्था है, जिसने डिजिटल लेनदेन को काफी आसान बनाया है। हालांकि, इसके विस्तार और लंबे समय तक संचालन के लिए फंडिंग का सवाल महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब यह विचार करने की जरूरत है कि इस व्यवस्था में निवेश कौन करे और इसके लिए धन की व्यवस्था किस तरीके से की जाए।

BJD सांसद ने सरकार की मौजूदा UPI नीति को लेकर भी अपनी असहमति जताई। उनका कहना है कि UPI को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी एक तरीके को अंतिम समाधान मानने के बजाय अलग-अलग संभावनाओं पर चर्चा जरूरी है।

संत्रप्त मिश्रा ने UPI से जुड़े ₹2,000 के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन लिमिट के मुद्दे को भी चर्चा के दायरे में लाने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भारत को विकसित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है, तो ₹2,000 से अधिक की राशि को हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन मानने की सीमा पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया जा सकता।

उन्होंने संकेत दिया कि बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था और बढ़ते ऑनलाइन लेनदेन को देखते हुए इस सीमा की समीक्षा की जा सकती है। यदि आवश्यकता महसूस हो तो संबंधित नियमों में बदलाव भी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद किया जा सकता है।

संत्रप्त मिश्रा की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। UPI के भविष्य, इसकी फंडिंग व्यवस्था और ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों को लेकर आगे होने वाली चर्चाओं पर अब नजर रहेगी।

Latest