बिहार विधानमंडल शीतकालीन सत्र 2026 : बिहार की राजनीति में नवंबर का आखिरी दिन महत्वपूर्ण होने जा रहा है। बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर 2026 से शुरू होगा। यह सत्र 4 दिसंबर तक चलेगा। पांच दिनों के इस सत्र में बिहार विधानसभा और विधान परिषद की कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
बिहार विधानमंडल के इस शीतकालीन सत्र पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की नजरें रहेंगी। सत्र के दौरान राज्य सरकार अपने विधायी कार्यों को आगे बढ़ाएगी। वहीं, विपक्ष को भी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछने और जवाब मांगने का मौका मिलेगा।
बिहार विधानमंडल शीतकालीन सत्र में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र राज्य की राजनीति और सरकार के कामकाज के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पांच दिनों की कार्यवाही में विभिन्न विभागों से जुड़े विषयों पर चर्चा हो सकती है। सरकार की ओर से विधेयक और अन्य सरकारी कार्य भी सदन के पटल पर रखे जा सकते हैं।
हालांकि, सत्र के दौरान कौन-कौन से विधेयक पेश होंगे और किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी, इसकी पूरी जानकारी आधिकारिक कार्यसूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सरकार को घेरने की तैयारी में रह सकता है विपक्ष
शीतकालीन सत्र में विपक्ष जनहित से जुड़े सवालों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर सदन में चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, राज्य में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी नीतियों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
दूसरी ओर, सरकार को अपनी योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यों का पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। ऐसे में सदन की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस देखने को मिल सकती है।
विधान परिषद चुनाव के बाद दिखेंगे नए चेहरे
हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधान परिषद चुनाव के बाद शीतकालीन सत्र में कुछ नए निर्वाचित सदस्य भी नजर आ सकते हैं। इन सदस्यों के लिए अपने क्षेत्र की समस्याओं और मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने का अवसर होगा।
सम्राट चौधरी सरकार के लिए अहम होगा सत्र
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए भी यह सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले जुलाई में पांच दिवसीय मानसून सत्र आयोजित किया गया था। अब शीतकालीन सत्र में सरकार के विधायी एजेंडे और विपक्ष की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।
कुल मिलाकर, 30 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलने वाला बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र पांच दिनों का होगा, लेकिन इस दौरान होने वाली चर्चाएं राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सदन में किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा चर्चा होती है और सरकार विपक्ष के सवालों का किस तरह जवाब देती है।