IDBI बैंक के विनिवेश को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कांग्रेस और पूर्ववर्ती UPA सरकार पर निशाना साधते हुए बैंकिंग व्यवस्था के कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान बैंकों और वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल निजी संस्थाओं की तरह किया जाता था।
वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय बैंक कर्मचारियों पर अपनी मर्जी के मुताबिक लोगों को कर्ज देने का दबाव बनाया जाता था। इस प्रक्रिया में कर्ज देने से जुड़े जरूरी नियमों और सावधानियों को भी नजरअंदाज किया जाता था।
बैंकों पर दबाव बनाने का लगाया आरोप
निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंक और वित्तीय संस्थान देश की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन संस्थानों को पेशेवर तरीके से काम करना चाहिए और कर्ज देने के फैसले तय नियमों के आधार पर होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि UPA सरकार के कार्यकाल में बैंकिंग संस्थानों पर अनुचित दबाव बनाया जाता था, जिससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती थी।
IDBI बैंक विनिवेश को लेकर सियासत तेज
दरअसल, IDBI बैंक के विनिवेश को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इसी मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कांग्रेस की पिछली सरकार के बैंकिंग रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं। उनके बयान के बाद बैंकिंग क्षेत्र में सरकार की नीतियों और पूर्ववर्ती सरकारों के फैसलों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है।
कांग्रेस और UPA सरकार पर साधा निशाना
वित्त मंत्री के आरोपों का मुख्य केंद्र यह रहा कि सरकारी बैंकों को राजनीतिक या निजी हितों के बजाय देश की आर्थिक जरूरतों के अनुसार काम करना चाहिए। बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सही तरीके से कर्ज वितरण को जरूरी बताते हुए उन्होंने पिछली सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
फिलहाल IDBI बैंक विनिवेश का मुद्दा केवल आर्थिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया और सरकार का पक्ष चर्चा के केंद्र में रह सकता है।