बिहार बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए मनोज तिवारी ने दान की दो महीने की सैलरी

पटना: बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए राहत और सहायता का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में अपनी दो महीने की सैलरी देने की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह अपनी सैलरी बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों को समर्पित कर रहे हैं। मनोज तिवारी ने बिहार को अपना परिवार बताते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा रहना जरूरी है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री राहत कोष में दी जाने वाली यह राशि बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए इस्तेमाल की जाएगी। सांसद ने अपने पोस्ट में बिहार सरकार की ओर से चलाए जा रहे राहत कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, चिकित्सा सुविधाएं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जा रही है। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को 7 हजार रुपये की सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए NDRF और SDRF की टीमें तैनात हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में जरूरत के अनुसार राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने का काम किया जा रहा है। वहीं, बाढ़ के कारण किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके। बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से भी 18 सितंबर को मुख्यमंत्री राहत कोष में बिहार प्रदेश बीजेपी द्वारा 51 लाख रुपये दिए जाने की जानकारी जारी की गई थी। मनोज तिवारी ने अपने संदेश में बाढ़ प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि राहत और बचाव के प्रयासों में हरसंभव सहयोग किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री राहत कोष में लगातार अलग-अलग लोगों और संस्थाओं की ओर से सहयोग राशि भी पहुंच रही है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक राहत कोष में हाल के दिनों में कई लोगों और संस्थाओं ने योगदान दिया है। बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच राहत कार्यों के साथ अब फसल और अन्य नुकसान का आकलन भी अहम माना जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों और किसानों तक सहायता जल्द पहुंचाई जा सके।

नेपाल की बाढ़ से हुए नुकसान के लिए UN फंड से मदद की तैयारी, नई स्टडी बनेगी आधार

नेपाल में पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सरकार अब राहत और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहायता जुटाने की तैयारी में है। इसके लिए नेपाल संयुक्त राष्ट्र के उस फंड से मदद लेने की कोशिश कर रहा है, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। नेपाल की योजना में हालिया बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध को सामने रखने वाली एक नई वैज्ञानिक स्टडी अहम भूमिका निभा सकती है। इस अध्ययन के आधार पर यह तर्क मजबूत करने की कोशिश की जाएगी कि बाढ़ जैसी आपदा केवल प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि बदलती जलवायु परिस्थितियों से भी प्रभावित हो सकती है। आखिर क्या है यह फंड? जलवायु परिवर्तन के कारण विकासशील देशों को होने वाले नुकसान और क्षति की भरपाई के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर Loss and Damage Fund यानी नुकसान एवं क्षति कोष की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य उन देशों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, जो जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहे हैं। बाढ़, चक्रवात, समुद्र के बढ़ते स्तर, सूखा और दूसरी जलवायु संबंधी आपदाओं से प्रभावित देशों के लिए यह फंड महत्वपूर्ण माना जाता है। नेपाल जैसे पर्वतीय और जलवायु जोखिम वाले देश इस व्यवस्था से सहायता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। स्टडी क्यों है महत्वपूर्ण? नेपाल के लिए चुनौती यह साबित करना है कि हालिया बाढ़ का संबंध बदलती जलवायु परिस्थितियों से कितना है। इसी वजह से नई स्टडी के निष्कर्षों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैज्ञानिक अध्ययन आमतौर पर तापमान में बदलाव, अत्यधिक बारिश, मौसम के बदलते पैटर्न और बाढ़ की तीव्रता जैसे कारकों का विश्लेषण करते हैं। अगर अध्ययन में जलवायु परिवर्तन और बाढ़ के बीच मजबूत संबंध सामने आता है, तो नेपाल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी वित्तीय सहायता की मांग को वैज्ञानिक आधार देने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, किसी एक अध्ययन के आधार पर सहायता मिलना स्वतः तय नहीं होता। संबंधित फंड के नियम, नुकसान का आकलन, पात्रता और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण होंगी। नेपाल का यह कदम बताता है कि जलवायु परिवर्तन से होने वाली आपदाओं के बाद प्रभावित देशों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण और अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त कितने महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

मेरठ में सूर्य किरण टीम के प्रदर्शन को लेकर स्क्वाड्रन लीडर विक्रम ने दी अहम जानकारी

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्य किरण एरोबेटिक टीम के हवाई प्रदर्शन को लेकर स्क्वाड्रन लीडर विक्रम ने टीम की कार्यप्रणाली और प्रदर्शन की अवधि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सूर्य किरण का पूरा एयर डिस्प्ले करीब 30 से 35 मिनट तक चलता है और इसे मुख्य रूप से दो हिस्सों में विभाजित किया गया है। स्क्वाड्रन लीडर विक्रम के मुताबिक, आसमान में एक साथ दिखाई देने वाला यह शानदार प्रदर्शन बेहद सटीक तालमेल, अनुशासन और लंबे प्रशिक्षण का परिणाम होता है। प्रदर्शन के दौरान 9 विमान और 9 पायलट सीधे आसमान में उड़ान भरते हैं। हालांकि, इस पूरे शो को सफल बनाने के लिए केवल उड़ान भरने वाले पायलट ही जिम्मेदार नहीं होते, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी और समन्वित टीम काम करती है। उन्होंने बताया कि सूर्य किरण टीम की कुल संरचना में 13 पायलट, एक कमेंटेटर और एक मेडिकल डॉक्टर शामिल हैं। वहीं विमानों की तकनीकी तैयारी, रखरखाव और उड़ान के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं को संभालने के लिए 3 से 4 इंजीनियरों की टीम भी मौजूद रहती है। सूर्य किरण एरोबेटिक टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता, उड़ान कौशल और टीमवर्क का प्रदर्शन करने के लिए जानी जाती है। आसमान में विमानों की एक साथ तेज गति से उड़ान, सटीक फॉर्मेशन और अलग-अलग एरोबेटिक मूवमेंट दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं। स्क्वाड्रन लीडर विक्रम ने जिस तरह टीम की संरचना और प्रदर्शन की अवधि के बारे में जानकारी दी, उससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ मिनटों का हवाई शो तैयार करने के पीछे पायलटों के साथ-साथ तकनीकी और सपोर्ट स्टाफ की भी अहम भूमिका रहती है। मेरठ में सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन देखने वाले दर्शकों के लिए यह सिर्फ एक हवाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और सामूहिक समन्वय की झलक भी प्रस्तुत करता है।

UPI की फंडिंग और ₹2,000 लिमिट पर BJD सांसद संत्रप्त मिश्रा ने उठाए सवाल, बोले- नीति पर हो चर्चा

नई दिल्ली: भारत में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में UPI को एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव के तौर पर देखा जाता है। इसी मुद्दे को लेकर बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सांसद संत्रप्त मिश्रा ने UPI व्यवस्था की भविष्य की फंडिंग और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि UPI को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है और इस पर व्यापक स्तर पर चर्चा होनी चाहिए। संत्रप्त मिश्रा के मुताबिक, UPI भारत में विकसित हुई एक ऐसी व्यवस्था है, जिसने डिजिटल लेनदेन को काफी आसान बनाया है। हालांकि, इसके विस्तार और लंबे समय तक संचालन के लिए फंडिंग का सवाल महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब यह विचार करने की जरूरत है कि इस व्यवस्था में निवेश कौन करे और इसके लिए धन की व्यवस्था किस तरीके से की जाए। BJD सांसद ने सरकार की मौजूदा UPI नीति को लेकर भी अपनी असहमति जताई। उनका कहना है कि UPI को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी एक तरीके को अंतिम समाधान मानने के बजाय अलग-अलग संभावनाओं पर चर्चा जरूरी है। संत्रप्त मिश्रा ने UPI से जुड़े ₹2,000 के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन लिमिट के मुद्दे को भी चर्चा के दायरे में लाने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भारत को विकसित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है, तो ₹2,000 से अधिक की राशि को हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन मानने की सीमा पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था और बढ़ते ऑनलाइन लेनदेन को देखते हुए इस सीमा की समीक्षा की जा सकती है। यदि आवश्यकता महसूस हो तो संबंधित नियमों में बदलाव भी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद किया जा सकता है। संत्रप्त मिश्रा की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। UPI के भविष्य, इसकी फंडिंग व्यवस्था और ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों को लेकर आगे होने वाली चर्चाओं पर अब नजर रहेगी।

लखनऊ में चयनित अभ्यर्थियों को मिले नियुक्ति पत्र, CM योगी ने सौंपे दस्तावेज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवाओं में चयनित युवाओं के लिए शनिवार को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। लोकभवन सभागार में हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में चयनित उम्मीदवार शामिल हुए। इस नियुक्ति प्रक्रिया के तहत कुल 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें से 21 चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में स्वयं नियुक्ति पत्र सौंपे, जबकि अन्य चयनित उम्मीदवारों को संबंधित विभागों के माध्यम से नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। जानकारी के मुताबिक, नियुक्तियों में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता, उद्योग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं तथा आयुष विभाग से जुड़े पद शामिल हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में 357 एक्स-रे टेक्नीशियन, जबकि आयुष विभाग में 404 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इसके अलावा कौशल विकास से जुड़े 48 और उद्योग विभाग में 9 चयनित अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति दी जा रही है। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद चयनित युवाओं के लिए सरकारी सेवा में नई जिम्मेदारी की शुरुआत होगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं और उन्हें अपने दायित्वों का जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने का संदेश दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हाल के महीनों में अलग-अलग विभागों में चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र देने के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर भी नियुक्ति पत्र वितरण से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी प्रकाशित की जाती है।

पहलगाम में फिर लौटी रौनक, पर्यटन को बढ़ावा देने पर फारूक अब्दुल्ला ने दिया जोर

पहलगाम, जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटन गतिविधियों को दोबारा गति मिलती दिखाई दे रही है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने यहां आयोजित गोल्फ प्रतियोगिता के दौरान पहलगाम में लौटती रौनक पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से जम्मू-कश्मीर की खूबसूरती और पर्यटन क्षमता को देश-दुनिया के सामने रखने में मदद मिलती है। फारूक अब्दुल्ला के मुताबिक, रोटरी इंटरनेशनल की ओर से आयोजित गोल्फ टूर्नामेंट में देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी प्रतिभागी पहुंचे। उन्होंने नेपाल, दुबई और अन्य स्थानों से आए लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रतियोगिता में शामिल होने वाले लोग पहलगाम की प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय लोगों के व्यवहार से प्रभावित नजर आए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच बनने वाला यह जुड़ाव जम्मू-कश्मीर के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करता है। उनके अनुसार, जब देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां आते हैं और क्षेत्र की खूबसूरती का अनुभव करते हैं, तो इससे आपसी सद्भाव और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन को जितना अधिक प्रोत्साहन मिलेगा, उसका फायदा स्थानीय लोगों और कारोबार से जुड़े लोगों को भी मिल सकता है। होटल, परिवहन, रेस्तरां, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में गोल्फ को पर्यटन को बढ़ावा देने के एक माध्यम के तौर पर भी देखा जा रहा है। यहां पहलगाम, गुलमर्ग, श्रीनगर और जम्मू में प्रमुख गोल्फ कोर्स मौजूद हैं। हाल के वर्षों में गोल्फ आयोजनों के जरिए जम्मू-कश्मीर को खेल पर्यटन के एक संभावित केंद्र के रूप में भी पेश किया जा रहा है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पहलगाम में लोगों की मौजूदगी और पर्यटन गतिविधियों का बढ़ना क्षेत्र के लिए उत्साहजनक संकेत है।

प्लास्टिक कचरे से निपटने पर PM मोदी का जोर, बोले- Reduce, Reuse और Recycle से बढ़ेगी सर्कुलर इकोनॉमी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्लास्टिक कचरे की बढ़ती चुनौती पर जोर दिया। दिल्ली में आयोजित पर्यावरण और जलवायु से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में प्लास्टिक वेस्ट भी शामिल है। इससे निपटने के लिए भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी लगातार काम कर रहा है। इसके लिए Reduce, Reuse और Recycle यानी कम उपयोग, दोबारा इस्तेमाल और पुनर्चक्रण के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सोच के जरिए देश में सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। पीएम मोदी के मुताबिक, कचरे को केवल बेकार सामग्री मानने के बजाय उसे दोबारा उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरे का प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण किया जा रहा है। इससे एक तरफ कचरे के निपटारे की समस्या कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर संसाधनों का दोबारा उपयोग संभव हो रहा है। प्रधानमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक कचरे के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने गोबरधन योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि गांवों में गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदला जा रहा है। इस प्रक्रिया से कचरा प्रबंधन के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित न रखने की जरूरत पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री के संदेश में कचरे को कम करने, उपलब्ध संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने पर जोर रहा। भारत में प्लास्टिक प्रदूषण और कचरा प्रबंधन से जुड़ी नीतियों के बीच सरकार का फोकस अब ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें कचरे का अधिकतम उपयोग हो और संसाधनों की बर्बादी को कम किया जा सके। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ विकास की दिशा में भी आगे बढ़ने का लक्ष्य है।

नीरज कुमार को अनंत सिंह की चुनौती, मंदिर के सामने आमने-सामने बहस का दिया प्रस्ताव

पटना: बिहार की राजनीति में पूर्व विधायक अनंत सिंह और जेडीयू नेता नीरज कुमार के बीच बयानबाजी का सिलसिला लगातार चर्चा में है। इसी बीच अनंत सिंह ने नीरज कुमार को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि दोनों बजरंगबली मंदिर के सामने आमने-सामने बैठकर बातचीत करें। अनंत सिंह के मुताबिक, इस तरह आमने-सामने चर्चा होने से दोनों पक्षों की बातें जनता के सामने स्पष्ट हो सकती हैं। अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि नीरज कुमार पिछले करीब 15 से 18 वर्षों से लगातार उनके खिलाफ बयान देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मंचों पर लगाए जाने वाले आरोपों के बजाय दोनों नेताओं को सीधे एक-दूसरे के सामने बैठकर अपनी बात रखनी चाहिए। हालांकि, नीरज कुमार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह अभी देखना बाकी है। बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने चर्चित एके-47 मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और मामले से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए नार्को टेस्ट की मांग की। नार्को टेस्ट कराने का अधिकार और उसकी कानूनी प्रक्रिया अदालत के अधीन होती है, इसलिए इस मांग पर अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है। अनंत सिंह ने यह दावा भी किया कि उन्होंने कई मौकों पर नीरज कुमार की चुनावी जीत में मदद की थी। हालांकि, उनके इस दावे पर नीरज कुमार की ओर से कोई अलग पक्ष सामने आता है या नहीं, यह महत्वपूर्ण होगा। इसी बीच अनंत सिंह ने आगामी चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति के संकेत भी दिए। उन्होंने अनुज को अपना उम्मीदवार बताते हुए उनके समर्थन की घोषणा की। टिकट के सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि यदि पार्टी टिकट देती है तो ठीक है, लेकिन टिकट नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का विकल्प भी खुला है। अनंत सिंह के इस बयान के बाद बिहार की स्थानीय राजनीति में सियासी हलचल बढ़ गई है। अब निगाहें नीरज कुमार की प्रतिक्रिया और आगे होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं।

पर्यावरण संरक्षण पर अटॉर्नी जनरल का जोर, बोले- बदलती पारिस्थितिकी के साथ बदलना होगा हमारा नजरिया

नई दिल्ली: पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ में भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत की भूमिका और भविष्य की चुनौतियों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरणीय हालात के बीच दुनिया को अपने विकास मॉडल और सोच में भी आवश्यक बदलाव लाना होगा। आर. वेंकटरमणी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2024 में संयुक्त राष्ट्र के ‘समिट ऑफ द फ्यूचर’ में दिए विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जो लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं, उनके अनुरूप सामूहिक कार्रवाई भी होनी चाहिए। पर्यावरणीय चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, इसलिए इनके समाधान के लिए दुनिया के देशों और समाजों को मिलकर काम करना जरूरी है। उन्होंने समुद्र, ग्लेशियर, जंगल, जलस्रोत और वायु गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सोचने की जरूरत है कि महासागरों को सुरक्षित कैसे रखा जाए, ग्लेशियरों को संरक्षित कैसे किया जाए, जंगलों की स्थिति बेहतर कैसे बनी रहे, जलस्रोतों को लगातार पुनर्भरित कैसे किया जाए और हवा को स्वच्छ कैसे रखा जाए। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी लगातार बदलने वाली व्यवस्थाएं हैं। ऐसे में इनके सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के तरीके भी समय के साथ विकसित होने चाहिए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केवल नियमों और कानूनों का विषय मानने के बजाय जीवन और सभ्यता से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण के रूप में देखने की जरूरत बताई। उन्होंने एक ऐसे नए सभ्यतागत ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें विवेक, संवेदनशीलता, ज्ञान और दूरदर्शिता के आधार पर विकास और जीवनशैली को आगे बढ़ाया जाए। नेपाल में हाल की आपदाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पहाड़ों और ग्लेशियरों की संवेदनशीलता की गंभीर याद दिलाती हैं। प्रकृति की अपनी सीमाएं हैं और मानव गतिविधियों को उसके अनुरूप संतुलित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं, लेकिन इस संतुलन को लगातार बनाए रखना भविष्य में भी एक बड़ी चुनौती रहेगा।

PM मोदी ने लॉन्च किया NGT मोबाइल ऐप, पर्यावरण और जलवायु पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जुटे विशेषज्ञ

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘The Future of Environment and Climate Dynamics’ में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। सम्मेलन का आयोजन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा के लिए किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लॉन्च किए गए NGT मोबाइल ऐप को डिजिटल माध्यम से NGT से जुड़ी जानकारी और सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने की दिशा में एक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। मोबाइल तकनीक के जरिए न्यायिक एवं पर्यावरण संबंधी जानकारी को अधिक सुगम बनाने पर जोर दिया गया है। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण से जुड़े मामलों में आधुनिक तकनीक की भूमिका पर भी चर्चा हुई। बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहतर व्यवस्था, प्रभावी नीतियों और तकनीकी समाधान की जरूरत पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरणीय बदलावों को समझने के साथ-साथ आने वाले समय की चुनौतियों के लिए बेहतर रणनीति और समाधान तलाशना रहा। NGT मोबाइल ऐप के लॉन्च के साथ पर्यावरण और न्याय व्यवस्था से जुड़ी डिजिटल सेवाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल की शुरुआत हुई है।